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हर सड़क के साथ हो फुटपाथ सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को निर्देश
Ratna Netam
5 Oct 2026 8:03 PM IST

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नई दिल्ली। देशभर में पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित फुटपाथ सुनिश्चित करने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार को महत्वपूर्ण निर्देश दिए। शीर्ष अदालत ने केंद्र से ऐसी केंद्रीय अथॉरिटी की पहचान करने को कहा है, जो देशभर में सड़कों के साथ फुटपाथ की सुविधा सुनिश्चित करने और इससे जुड़े निर्देशों के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभाल सके। इसके साथ ही कोर्ट ने केंद्र से पांच शहरों का चयन करने को कहा है, जहां शुरुआत में इन निर्देशों को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जा सके।जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज से प्रस्तावित केंद्रीय अथॉरिटी की पहचान को लेकर सरकार से निर्देश प्राप्त करने को कहा। कोर्ट ने उनसे अगली सुनवाई के दौरान इस संबंध में रिपोर्ट पेश करने का भी निर्देश दिया है।सुप्रीम कोर्ट की पीठ अपने जून में दिए गए उस फैसले के पालन की निगरानी कर रही थी, जिसमें पैदल यात्रियों के अधिकार और सड़कों के किनारे फुटपाथ की उपलब्धता को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए थे। अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि फुटपाथ पर सुरक्षित तरीके से चलने का अधिकार मौलिक अधिकार से जुड़ा है और सड़कों पर पैदल यात्रियों के लिए अलग तथा सुरक्षित फुटपाथ उपलब्ध होने चाहिए।
केंद्रीय अथॉरिटी की पहचान पर जोर
सोमवार की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर ध्यान केंद्रित किया कि देशभर में फुटपाथ से संबंधित निर्देशों को प्रभावी तरीके से लागू कराने के लिए एक स्पष्ट केंद्रीय व्यवस्था होनी चाहिए। इसी उद्देश्य से केंद्र सरकार को ऐसी अथॉरिटी की पहचान करने को कहा गया है जो इस दिशा में समन्वय और निगरानी कर सके।देश के अलग-अलग राज्यों और शहरों में सड़कों का निर्माण तथा रखरखाव विभिन्न एजेंसियों के जिम्मे होता है। ऐसे में फुटपाथ की उपलब्धता और उनके मानकों को लेकर भी अलग-अलग परिस्थितियां देखने को मिलती हैं। केंद्रीय स्तर पर किसी अथॉरिटी की पहचान होने से संबंधित निर्देशों को लागू करने और अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल स्थापित करने में मदद मिल सकती है।हालांकि इस जिम्मेदारी के लिए किस अथॉरिटी को चुना जाएगा, यह अभी तय नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से इस मुद्दे पर विचार कर अगली सुनवाई में जानकारी देने को कहा है।
पांच शहरों में पायलट प्रोजेक्ट
अदालत ने केंद्र सरकार से पांच शहरों की पहचान करने को भी कहा है, जहां फुटपाथ से संबंधित निर्देशों को पहले पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया जा सके। इससे जमीनी स्तर पर योजना को लागू करने के दौरान आने वाली चुनौतियों और जरूरतों को समझने का अवसर मिलेगा।पायलट प्रोजेक्ट के अनुभव के आधार पर आगे अन्य शहरों के लिए भी व्यवस्था विकसित की जा सकती है। फिलहाल किन पांच शहरों को इस परियोजना के लिए चुना जाएगा, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है।अदालत का जोर ऐसी व्यवस्था तैयार करने पर है, जिसमें सड़क निर्माण और शहरी विकास के दौरान पैदल यात्रियों की जरूरतों को भी प्राथमिकता दी जाए।
जून के फैसले के पालन की निगरानी
सुप्रीम कोर्ट की पीठ इस मामले में जून में दिए गए अपने फैसले के क्रियान्वयन की निगरानी कर रही है। उस फैसले में कोर्ट ने फुटपाथ की उपलब्धता को पैदल यात्रियों की सुरक्षा और अधिकारों से जोड़ते हुए कहा था कि सड़कों के साथ अलग फुटपाथ की व्यवस्था होनी चाहिए।शहरी इलाकों में कई जगह पैदल यात्रियों को फुटपाथ उपलब्ध नहीं होने या उनके इस्तेमाल योग्य नहीं होने के कारण सड़क पर चलना पड़ता है। इससे उन्हें तेज रफ्तार वाहनों के बीच आवाजाही करनी पड़ सकती है। बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांग लोगों के लिए ऐसी परिस्थितियां और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं।इसी संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सड़क से जुड़ी योजनाओं में पैदल यात्रियों के लिए भी पर्याप्त और सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराया जाए।
पैदल चलने के अधिकार पर कोर्ट का जोर
सुप्रीम कोर्ट ने अपने पहले के फैसले में फुटपाथ पर चलने के अधिकार को मौलिक अधिकार से जोड़ते हुए पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित सार्वजनिक स्थान की आवश्यकता पर जोर दिया था। इसी फैसले के क्रियान्वयन को लेकर अब आगे की प्रक्रिया चल रही है।अदालत का मानना है कि सड़क केवल मोटर वाहनों के आवागमन के लिए नहीं होती, बल्कि पैदल चलने वाले लोगों की जरूरतों को भी सड़क योजना का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। ऐसे में अलग फुटपाथ की व्यवस्था सड़क सुरक्षा के महत्वपूर्ण पहलुओं में शामिल है।
अगली सुनवाई में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश
पीठ ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज को केंद्र सरकार से आवश्यक निर्देश लेने और अगली सुनवाई में रिपोर्ट पेश करने को कहा है। रिपोर्ट में प्रस्तावित केंद्रीय अथॉरिटी को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।इसके अलावा पांच शहरों में पायलट प्रोजेक्ट लागू करने की योजना को लेकर भी केंद्र को आगे की रूपरेखा तैयार करनी होगी। इसके बाद अदालत इस बात की समीक्षा कर सकेगी कि उसके जून के फैसले को जमीनी स्तर पर लागू करने की दिशा में क्या कदम उठाए जा रहे हैं।सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देशों के बाद अब केंद्र सरकार के सामने केंद्रीय अथॉरिटी की पहचान और पायलट प्रोजेक्ट के लिए पांच शहरों के चयन की जिम्मेदारी है। अगर यह व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू होती है तो भविष्य में सड़क निर्माण और शहरी नियोजन में फुटपाथ तथा पैदल यात्रियों की सुरक्षा को अधिक व्यवस्थित तरीके से शामिल करने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकेगा।
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