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पेपर लीक पर सख्त कानून का समर्थन, राघव चड्ढा ने बताया बड़ा कदम

नई दिल्ली। राज्यसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान भाजपा सांसद राघव चड्ढा ने विधेयक का समर्थन करते हुए इसे देश में पेपर लीक की समस्या से निपटने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक भारत का पहला समर्पित एंटी-पेपर लीक फ्रेमवर्क तैयार करेगा, जो संगठित तरीके से होने वाली परीक्षा संबंधी अनियमितताओं पर प्रभावी कार्रवाई का रास्ता खोलेगा।
सदन में अपने संबोधन के दौरान राघव चड्ढा ने कहा कि वर्षों से पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों छात्रों की मेहनत, योग्यता और भविष्य को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले छात्र कई वर्षों तक तैयारी करते हैं, लेकिन प्रश्न पत्र लीक जैसी घटनाओं के कारण उनकी मेहनत पर पानी फिर जाता है।
उन्होंने कहा कि अब देश केवल घटनाओं के बाद प्रतिक्रिया देने की व्यवस्था से आगे बढ़कर एक मजबूत कानूनी ढांचे की ओर बढ़ रहा है। यह कानून उन लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगा जो संगठित तरीके से परीक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाते हैं।
राघव चड्ढा ने कहा कि पेपर लीक केवल एक प्रशासनिक समस्या नहीं है, बल्कि यह युवाओं के विश्वास से जुड़ा मुद्दा है। जब किसी परीक्षा में गड़बड़ी होती है तो इसका असर केवल कुछ उम्मीदवारों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं।
उन्होंने कहा कि देश के युवा निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था की उम्मीद करते हैं। ऐसे में जरूरी है कि परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए कठोर कानून और प्रभावी व्यवस्था लागू की जाए।
सांसद ने विधेयक के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वाले गिरोहों और माफिया पर शिकंजा कसना है। उन्होंने कहा कि संगठित तरीके से प्रश्न पत्र लीक करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होने से भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रतियोगी परीक्षाएं युवाओं के जीवन में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले लाखों छात्र अपनी आर्थिक और मानसिक ऊर्जा लगाकर परीक्षा की तैयारी करते हैं। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है।
राघव चड्ढा ने कहा कि यह विधेयक केवल अपराधियों को दंडित करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह छात्रों के अधिकारों और उनकी मेहनत की सुरक्षा का भी प्रयास है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मजबूत कानूनी व्यवस्था लागू होने के बाद परीक्षा प्रणाली में छात्रों का भरोसा और मजबूत होगा।
राज्यसभा में चर्चा के दौरान कई सांसदों ने भी परीक्षा व्यवस्था में सुधार और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने की जरूरत पर जोर दिया। सदस्यों ने कहा कि देश में होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि इन परीक्षाओं से युवाओं के करियर जुड़े होते हैं।
पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न राज्यों और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में प्रश्न पत्र लीक के मामले सामने आए हैं। इन घटनाओं के बाद छात्रों और अभ्यर्थियों की ओर से कड़ी कार्रवाई की मांग उठती रही है। सरकार का कहना है कि नया कानूनी ढांचा ऐसे मामलों में जिम्मेदारी तय करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई को मजबूत करेगा।
राघव चड्ढा ने कहा कि देश के युवाओं को यह भरोसा मिलना चाहिए कि उनकी मेहनत का सम्मान होगा और किसी भी तरह की धांधली को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह विधेयक परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की दिशा में एक अहम कदम है। संगठित पेपर लीक नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई के लिए मजबूत कानून समय की जरूरत थी।
सदन में विधेयक पर चर्चा के बाद इसके प्रावधानों पर विचार किया गया। सरकार की ओर से कहा गया कि परीक्षा व्यवस्था की पवित्रता बनाए रखने और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए ऐसे कानून जरूरी हैं।
राघव चड्ढा के समर्थन के साथ विधेयक को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। अब नजर इस बात पर है कि कानून लागू होने के बाद पेपर लीक जैसी घटनाओं पर कितना प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो पाता है।





