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चीनी की कीमतों में 40% उछाल, ISMA ने 10-15 दिन पहले पेराई शुरू करने की मांग की

नई दिल्ली। त्योहारों के मौसम से पहले चीनी की कीमतों में करीब 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बीच उद्योग संगठन इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने सरकार से नए चीनी सीजन की पेराई 10-15 दिन पहले शुरू करने की अनुमति देने की मांग की है। संगठन का कहना है कि समय से पहले पेराई शुरू होने से बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ेगी और त्योहारी मांग के दौरान कीमतों पर दबाव कम करने में मदद मिलेगी।
ISMA के वाइस प्रेसिडेंट माधव श्रीराम के मुताबिक, अगर अक्टूबर में शुरू होने वाले 2026-27 चीनी सीजन की पेराई सामान्य समय से 10-15 दिन पहले शुरू कर दी जाती है तो अकेले अक्टूबर महीने में बाजार में करीब 6 लाख टन (LMT) अतिरिक्त चीनी की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकती है। संगठन का मानना है कि अतिरिक्त उपलब्धता से घरेलू बाजार में आपूर्ति और मांग के बीच संतुलन बेहतर होगा।
त्योहारों से पहले बढ़ी कीमतों की चिंता
चीनी की कीमतों में तेजी ऐसे समय आई है जब देश में त्योहारों का मौसम शुरू होने वाला है। इस दौरान मिठाइयों, बेकरी उत्पादों, पेय पदार्थों और अन्य खाद्य वस्तुओं में चीनी की खपत बढ़ जाती है। मांग बढ़ने के कारण बाजार में कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बनने की आशंका रहती है।
ISMA का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध कराना जरूरी है। उद्योग संगठन के मुताबिक, कीमतों में करीब 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी ने चीनी की उपलब्धता और आगामी त्योहारी मांग को लेकर चिंता बढ़ाई है। ऐसे में नए सीजन की शुरुआत को कुछ दिन आगे बढ़ाना बाजार के लिए तत्काल राहत देने वाला कदम हो सकता है।
अक्टूबर में मिल सकती है 6 लाख टन अतिरिक्त चीनी
माधव श्रीराम ने बताया कि यदि चीनी मिलें सामान्य कार्यक्रम से 10-15 दिन पहले पेराई शुरू करती हैं तो अक्टूबर में लगभग 6 लाख टन अतिरिक्त चीनी बाजार में उपलब्ध कराई जा सकती है। अक्टूबर 2026-27 चीनी सीजन का पहला महीना होगा।
उद्योग के लिए सीजन की शुरुआती अवधि बेहद महत्वपूर्ण होती है। गन्ने की उपलब्धता वाले क्षेत्रों में मिलों के समय पर शुरू होने से उत्पादन चक्र जल्दी गति पकड़ सकता है। इससे बाजार में नई चीनी की आपूर्ति शुरू होगी और पुरानी स्टॉक पर निर्भरता कम हो सकती है।
कीमतों को नियंत्रित रखने में मिलेगी मदद
ISMA का तर्क है कि बाजार में आपूर्ति बढ़ने से कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी। मांग और आपूर्ति का संतुलन बिगड़ने पर कीमतों में तेजी देखने को मिलती है। त्योहारी मौसम में मांग सामान्य से अधिक होने के कारण यह दबाव और बढ़ सकता है।
संगठन चाहता है कि सरकार ऐसी व्यवस्था करे जिससे चीनी मिलों को निर्धारित तारीख से पहले पेराई शुरू करने की अनुमति मिल सके। इससे मिलों को उत्पादन शुरू करने का अतिरिक्त समय मिलेगा और बाजार में चीनी की उपलब्धता भी तेजी से बढ़ाई जा सकेगी।
मिलों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए अहम
समय से पहले पेराई शुरू करने का असर केवल बाजार की कीमतों पर ही नहीं पड़ेगा, बल्कि चीनी मिलों और गन्ना किसानों पर भी इसका प्रभाव हो सकता है। मिलों को उत्पादन चक्र जल्दी शुरू करने का अवसर मिलेगा, जबकि किसानों के लिए गन्ने की कटाई और आपूर्ति की प्रक्रिया भी समय पर शुरू हो सकती है।
हालांकि, पेराई शुरू करने का फैसला गन्ने की उपलब्धता, मौसम और संबंधित राज्यों की परिस्थितियों पर भी निर्भर करता है। इसलिए उद्योग की मांग पर सरकार और संबंधित राज्य सरकारों को सभी पहलुओं पर विचार करना होगा।
त्योहारी मांग बढ़ने की संभावना
भारत में अक्टूबर से त्योहारी गतिविधियां तेज हो जाती हैं। इस दौरान मिठाई और खाद्य उद्योग में चीनी की मांग बढ़ती है। दीपावली समेत कई प्रमुख त्योहारों के कारण बाजार में चीनी की खपत बढ़ने की संभावना रहती है।
मिठाई कारोबारियों के लिए चीनी प्रमुख कच्चे माल में शामिल है। कीमतों में तेजी का असर उत्पादन लागत पर पड़ सकता है। यदि कच्चे माल की कीमत बढ़ती है तो इसका असर तैयार उत्पादों की कीमत पर भी पड़ सकता है। ऐसे में चीनी की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना खाद्य उद्योग और उपभोक्ताओं दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
सरकार के फैसले पर नजर
ISMA की मांग ऐसे समय आई है जब सरकार को घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता और किसानों तथा मिलों के हितों के बीच संतुलन बनाना होगा। सरकार आम तौर पर चीनी की कीमतों को स्थिर रखने के साथ किसानों को गन्ने का उचित भुगतान सुनिश्चित करने और मिलों की वित्तीय स्थिति को बनाए रखने पर भी ध्यान देती है।
उद्योग संगठन की मांग पर सरकार का फैसला आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण होगा। यदि पेराई को 10-15 दिन पहले शुरू करने की अनुमति मिलती है तो अक्टूबर में ही करीब 6 लाख टन अतिरिक्त चीनी बाजार में पहुंचने का रास्ता खुल सकता है।
कीमतों पर नियंत्रण की कोशिश
ISMA का मानना है कि बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना कीमतों को नियंत्रित करने का सबसे प्रभावी तरीका है। संगठन ने इसी आधार पर नए सीजन की शुरुआत पहले करने की मांग की है। उद्योग के मुताबिक, इससे त्योहारी मौसम में मांग बढ़ने के बावजूद बाजार में उपलब्धता पर्याप्त बनी रह सकती है।
फिलहाल चीनी की बढ़ती कीमतें और आने वाले त्योहारी सीजन की मांग सरकार और उद्योग दोनों के लिए चुनौती बनी हुई है। ISMA की 10-15 दिन पहले पेराई शुरू करने की मांग का उद्देश्य बाजार में अक्टूबर से ही नई चीनी की उपलब्धता बढ़ाना है। संगठन के अनुमान के मुताबिक, इससे पहले ही महीने में करीब 6 लाख टन अतिरिक्त चीनी बाजार में आ सकती है। अब देखना होगा कि सरकार उद्योग की इस मांग पर क्या फैसला लेती है और इसका चीनी की कीमतों तथा त्योहारी बाजार पर कितना असर पड़ता है।





