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चीनी की कीमतों में फिर उछाल, औसत खुदरा भाव 65 रुपये किलो के पार पहुंचा

नई दिल्ली। देश में महंगाई का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। प्याज के बाद अब चीनी की बढ़ती कीमतों ने भी आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। त्योहारों के मौसम में मांग बढ़ने के कारण देश के खुदरा बाजार में चीनी के दाम लगातार दूसरे दिन बढ़े हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बुधवार को चीनी की औसत खुदरा कीमत 65 रुपये प्रति किलो के पार पहुंच गई।
उपभोक्ता मामलों के विभाग के प्राइस मॉनिटरिंग डिवीजन के आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत 65.05 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई। इससे एक दिन पहले मंगलवार को यही कीमत 63.97 रुपये प्रति किलो थी। यानी एक दिन में चीनी के औसत भाव में करीब 1 रुपये प्रति किलो से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
चीनी की कीमतों में यह तेजी ऐसे समय में आई है, जब देश में त्योहारों का मौसम शुरू हो चुका है। इस दौरान मिठाइयों, बेकरी उत्पादों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाती है। बाजार में मांग बढ़ने के कारण चीनी की खपत भी बढ़ रही है, जिसका असर कीमतों पर दिखाई दे रहा है।
व्यापारियों के अनुसार, त्योहारों के समय मिठाई दुकानों और खाद्य कारोबारियों की ओर से चीनी की खरीद बढ़ जाती है। इसके अलावा घरेलू उपयोग के लिए भी लोग ज्यादा मात्रा में चीनी खरीदते हैं। मांग बढ़ने से बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ जाता है।
हालांकि, सरकार की ओर से चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर लगातार नजर रखी जा रही है। उपभोक्ता मामलों का विभाग देशभर में जरूरी वस्तुओं की कीमतों की निगरानी करता है और बाजार में हो रहे बदलावों का आंकलन करता रहता है।
चीनी की बढ़ती कीमतों का असर आम लोगों के घरेलू बजट पर पड़ सकता है। पहले से ही कई खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी का सामना कर रहे उपभोक्ताओं के लिए अब चीनी का महंगा होना अतिरिक्त बोझ बन सकता है।
मिठाई कारोबारियों पर भी बढ़ती कीमतों का असर देखने को मिल रहा है। कारोबारियों का कहना है कि चीनी के दाम बढ़ने से उत्पादन लागत बढ़ जाती है। त्योहारों के समय जब मिठाई की मांग अधिक होती है, तब कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी सीधे कारोबार को प्रभावित करती है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें मांग में बढ़ोतरी, बाजार में स्टॉक की स्थिति, उत्पादन अनुमान और आपूर्ति व्यवस्था जैसे कारक शामिल हैं।
त्योहारी सीजन में मिठाई, पेय पदार्थ और खाद्य उद्योग में चीनी की मांग सबसे ज्यादा बढ़ती है। यही वजह है कि इस समय कीमतों में उतार-चढ़ाव आम बात है। हालांकि, यदि मांग और आपूर्ति में संतुलन बना रहता है तो कीमतों में स्थिरता आने की संभावना रहती है।
सरकार की ओर से समय-समय पर चीनी के उत्पादन, भंडारण और बिक्री को लेकर कदम उठाए जाते हैं, ताकि बाजार में अनावश्यक तेजी को नियंत्रित किया जा सके। इसके बावजूद खुदरा बाजार में कीमतों पर नजर रखना जरूरी होता है।
आम उपभोक्ताओं का कहना है कि रोजमर्रा की जरूरी चीजों के दाम बढ़ने से महीने का बजट प्रभावित हो रहा है। चीनी ऐसी वस्तु है जिसका इस्तेमाल लगभग हर घर में होता है, इसलिए इसकी कीमतों में थोड़ी भी बढ़ोतरी का असर बड़ी संख्या में लोगों पर पड़ता है।
फिलहाल देश में चीनी की औसत कीमत 65 रुपये प्रति किलो के पार पहुंच चुकी है। आने वाले दिनों में त्योहारों की मांग को देखते हुए बाजार पर नजर बनी हुई है। उपभोक्ताओं को उम्मीद है कि सरकार और बाजार की कोशिशों से जल्द ही कीमतों में राहत मिल सकती है।





