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मतदाता सूची विवाद पर कांग्रेस से सुधांशु त्रिवेदी के तीखे सवाल
Ratna Netam
6 Oct 2026 2:22 PM IST

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नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव मंगलवार को और तेज हो गया। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी बिना सत्यापन के अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और डुप्लिकेट मतदाताओं से जुड़े नामों को लेकर सवाल उठा रही है। त्रिवेदी ने कांग्रेस से पूछा कि वह इस तरह की मांगों के जरिए आखिर किसे लाभ पहुंचाना चाहती है।
सुधांशु त्रिवेदी की टिप्पणी ऐसे समय सामने आई, जब नई दिल्ली में INDIA ब्लॉक के सांसदों और नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। विपक्षी सांसद संसद से निर्वाचन सदन की ओर मार्च कर रहे थे, लेकिन सुरक्षा बलों ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद कई सांसदों ने धरना दिया।
भाजपा प्रवक्ता ने कांग्रेस पर मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे पर देश को गुमराह करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की ओर से ऐसे दावे किए जा रहे हैं जिनका पर्याप्त आधार नहीं है। त्रिवेदी ने सवाल उठाया कि यदि किसी मतदाता का नाम डुप्लिकेट है, वह संबंधित स्थान से स्थानांतरित हो चुका है, उसकी मृत्यु हो चुकी है या उसकी स्थिति सत्यापित नहीं है, तो ऐसे मामलों की जांच और सत्यापन का विरोध क्यों किया जा रहा है। यह भाजपा का राजनीतिक आरोप है, जबकि विपक्ष का कहना है कि SIR के दौरान वैध मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका है।
त्रिवेदी ने कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास को लेकर भी तीखी टिप्पणी की और पार्टी पर वंशवादी राजनीति को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उनके मुताबिक विपक्ष चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाकर ऐसी स्थिति पैदा कर रहा है जिससे मतदाता सूची के सत्यापन की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
मंगलवार का राजनीतिक घटनाक्रम मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर चल रहे विवाद के बीच सामने आया। INDIA ब्लॉक के नेताओं ने चुनाव आयोग पर पक्षपात और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के आरोप लगाए हैं। विपक्षी दलों की मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा दें और SIR की प्रक्रिया की निष्पक्ष समीक्षा हो। चुनाव आयोग और भाजपा ने विपक्ष के इन आरोपों को खारिज किया है।
नई दिल्ली में हुए प्रदर्शन में कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए। मार्च संसद परिसर से चुनाव आयोग के मुख्यालय की ओर निकाला गया था। सुरक्षा व्यवस्था के चलते प्रदर्शनकारियों को रास्ते में रोक दिया गया। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई नेताओं को कुछ समय के लिए हिरासत में भी लिया गया।
विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी है और किसी भी वैध मतदाता का नाम सूची से नहीं हटना चाहिए। कांग्रेस सहित INDIA ब्लॉक के दलों ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाने या बदलाव किए जाने से मताधिकार प्रभावित हो सकता है। हालांकि इन आरोपों को लेकर राजनीतिक और कानूनी विवाद जारी है।
इस पूरे विवाद में फॉर्म-6 का मुद्दा भी चर्चा में है। सुप्रीम कोर्ट में भी चुनावी सूची और फॉर्म-6 से जुड़े बदलावों को लेकर मामला उठा है। अदालत ने चुनाव आयोग से संबंधित रिकॉर्ड देखने की बात कही है। विपक्ष इसे चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने का आधार बता रहा है, जबकि भाजपा का कहना है कि विपक्ष अदालत की टिप्पणियों को अपने तरीके से प्रस्तुत कर रहा है।
सुधांशु त्रिवेदी ने इसी पृष्ठभूमि में कांग्रेस पर सवालों की बौछार करते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया में मतदाता की पहचान और पात्रता का सत्यापन सामान्य और जरूरी प्रक्रिया है। उनका आरोप है कि कांग्रेस इस विषय पर भ्रम की स्थिति पैदा कर रही है और सत्यापन की प्रक्रिया को राजनीतिक विवाद में बदल रही है।
दूसरी ओर विपक्ष का तर्क है कि उसकी आपत्ति सत्यापन से नहीं बल्कि प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर है। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि SIR के जरिए वास्तविक मतदाताओं के नाम भी प्रभावित हो सकते हैं। इसी मांग को लेकर मंगलवार को INDIA ब्लॉक के सांसदों ने दिल्ली में प्रदर्शन किया और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई।
मतदाता सूची विवाद अब केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। भाजपा जहां इसे मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने की प्रक्रिया बता रही है, वहीं विपक्ष इसे मताधिकार और चुनावी पारदर्शिता से जोड़कर देख रहा है। आने वाले दिनों में चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट और राजनीतिक दलों के अगले कदम पर नजर रहेगी।
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