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तमिल भाषा को लेकर राहुल गांधी पर भड़के सुधांशु त्रिवेदी
Ratna Netam
11 Oct 2026 6:46 PM IST

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नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) जैसी नीतियों के कारण तमिल भाषा के खतरे में पड़ने संबंधी दावों को खारिज कर दिया। त्रिवेदी ने विपक्ष के इन दावों को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने तमिल भाषा, साहित्य और संस्कृति को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की हैं।सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में शास्त्रीय तमिल साहित्य और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार ने तमिल भाषा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के लिए ऐसे कदम उठाए हैं, जिनसे भारतीय संस्कृति को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने का अवसर मिला है।प्रेस कॉन्फ्रेंस में त्रिवेदी ने तमिल साहित्य के प्रसिद्ध ग्रंथ 'तिरुक्कुरल', तिरुवल्लुवर सांस्कृतिक केंद्र और काशी-तमिल संगमम जैसी पहलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये कार्यक्रम तमिल भाषा और संस्कृति के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
NEET को लेकर राहुल गांधी के दावों पर सवाल
सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की आलोचना करते हुए कहा कि NEET जैसी नीतियों को तमिल भाषा के लिए खतरा बताना गलत है। उन्होंने विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर आपत्ति जताई।त्रिवेदी के अनुसार, केंद्र सरकार की नीतियों को तमिल भाषा और संस्कृति के विरोध में प्रस्तुत करना उचित नहीं है। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में तमिल भाषा के सम्मान और प्रचार-प्रसार के लिए कई प्रयास हुए हैं।हालांकि, उपलब्ध जानकारी में राहुल गांधी के उस विशिष्ट बयान का पूरा विवरण नहीं दिया गया है, जिस पर सुधांशु त्रिवेदी ने प्रतिक्रिया दी। इसलिए उनके बयान के संदर्भ में कांग्रेस नेता की पूरी दलील स्पष्ट नहीं है।NEET एक राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा है, जिसके माध्यम से देशभर में चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिया जाता है। तमिलनाडु में इस परीक्षा को लेकर राजनीतिक और शैक्षणिक स्तर पर लंबे समय से बहस होती रही है।
तमिल साहित्य को वैश्विक पहचान देने का दावा
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी तमिल साहित्य और संस्कृति को महत्व दिया है।उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री ने रूस के राष्ट्रपति जैसे अंतरराष्ट्रीय नेताओं को तमिल साहित्य के प्रसिद्ध ग्रंथ 'तिरुक्कुरल' की प्रति भेंट की है।त्रिवेदी ने इसे तमिल साहित्य को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने की पहल बताया। उन्होंने कहा कि तमिल साहित्य की समृद्ध परंपरा भारतीय सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।'तिरुक्कुरल' तमिल भाषा का प्रसिद्ध साहित्यिक ग्रंथ है, जिसकी रचना महान तमिल कवि और दार्शनिक तिरुवल्लुवर ने की थी। इस ग्रंथ में नैतिकता, सदाचार, सामाजिक जीवन और मानवीय मूल्यों से संबंधित विचार प्रस्तुत किए गए हैं।सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि ऐसे साहित्यिक ग्रंथों को अंतरराष्ट्रीय नेताओं के सामने प्रस्तुत करना तमिल भाषा की सांस्कृतिक पहचान को आगे बढ़ाने का प्रयास है।
सिंगापुर से तिरुवल्लुवर सांस्कृतिक केंद्र की पहल
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुधांशु त्रिवेदी ने तिरुवल्लुवर सांस्कृतिक केंद्र स्थापित करने की पहल का भी उल्लेख किया।उन्होंने कहा कि दुनिया के विभिन्न देशों में तमिल भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ऐसे सांस्कृतिक केंद्र स्थापित करने की योजना बनाई गई है। इसके लिए सिंगापुर को शुरुआती स्थान के रूप में चुने जाने का उल्लेख किया गया।त्रिवेदी के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य तमिल साहित्य, सांस्कृतिक परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है।उन्होंने कहा कि भारत की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने में इस प्रकार की पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।हालांकि, उपलब्ध विवरण में प्रस्तावित सांस्कृतिक केंद्रों की कुल संख्या, उनके निर्माण की समयसीमा और संचालन से संबंधित विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है।
काशी-तमिल संगमम का किया जिक्र
सुधांशु त्रिवेदी ने केंद्र सरकार की सांस्कृतिक पहलों का उल्लेख करते हुए काशी-तमिल संगमम कार्यक्रम को भी महत्वपूर्ण बताया।उन्होंने कहा कि यह आयोजन उत्तर भारत और दक्षिण भारत की सांस्कृतिक परंपराओं के बीच संबंधों को मजबूत करने का प्रयास है।काशी-तमिल संगमम का उद्देश्य तमिलनाडु और काशी के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और ज्ञान परंपराओं से जुड़े संबंधों को सामने लाना है।इस आयोजन में साहित्य, भाषा, कला, संगीत, आध्यात्मिक परंपराओं और अन्य सांस्कृतिक विषयों पर गतिविधियां आयोजित की जाती रही हैं।त्रिवेदी ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम भारतीय संस्कृति की विविधता और एकता को दर्शाते हैं। उन्होंने इसे तमिल संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।
प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाईं
भाजपा प्रवक्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तमिल भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए किए गए प्रयासों का उल्लेख किया।उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने तमिल साहित्य को केवल देश तक सीमित रखने के बजाय अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।त्रिवेदी के अनुसार, तिरुक्कुरल को अंतरराष्ट्रीय नेताओं को भेंट करना, तिरुवल्लुवर सांस्कृतिक केंद्रों की पहल और काशी-तमिल संगमम जैसे आयोजन इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं।उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में शास्त्रीय तमिल साहित्य और संस्कृति को अभूतपूर्व पहचान मिली है।हालांकि, तमिल भाषा को बढ़ावा देने से संबंधित इन पहलों और NEET को लेकर उठाई गई आपत्तियों के बीच नीतिगत संबंध का स्वतंत्र मूल्यांकन अलग विषय है।
भाषा और शिक्षा नीति पर राजनीतिक बहस
तमिल भाषा और NEET को लेकर भाजपा तथा कांग्रेस के बीच सामने आया यह विवाद भाषा, शिक्षा और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े व्यापक राजनीतिक विमर्श का हिस्सा है।एक ओर सुधांशु त्रिवेदी ने केंद्र सरकार की सांस्कृतिक पहलों को तमिल भाषा के प्रति सम्मान का प्रमाण बताया है। दूसरी ओर, NEET को लेकर उठने वाली आपत्तियां मुख्य रूप से शिक्षा व्यवस्था, प्रवेश प्रक्रिया और छात्रों पर उसके प्रभाव जैसे मुद्दों से भी संबंधित रही हैं।तमिलनाडु में NEET को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच मतभेद रहे हैं। परीक्षा के समर्थक राष्ट्रीय स्तर पर समान प्रवेश व्यवस्था की बात करते हैं, जबकि आलोचक छात्रों की सामाजिक और शैक्षणिक परिस्थितियों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।ऐसे में तमिल साहित्य को बढ़ावा देने की सांस्कृतिक पहल और चिकित्सा प्रवेश परीक्षा से जुड़े नीतिगत प्रश्नों को अलग-अलग संदर्भों में समझना आवश्यक है।
राहुल गांधी पर भाजपा का हमला जारी
रविवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी और विपक्ष के दावों को गलत बताते हुए केंद्र सरकार की तमिल संस्कृति से संबंधित पहलों को सामने रखाउन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तमिल भाषा और साहित्य को राष्ट्रीय तथा वैश्विक मंचों पर सम्मान मिला है।फिलहाल त्रिवेदी के इन ताजा आरोपों पर राहुल गांधी या कांग्रेस की ओर से दी गई किसी नई प्रतिक्रिया का विवरण उपलब्ध नहीं है।तमिल भाषा, NEET और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े इस विवाद में भाजपा ने केंद्र सरकार की पहलों का हवाला देकर अपना पक्ष रखा है। वहीं, शिक्षा नीति और भाषाई अधिकारों से संबंधित प्रश्न राजनीतिक चर्चा का विषय बने हुए हैं।
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