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नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में रविवार को बारिश के बीच बड़ा हादसा सामने आया। दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई गई।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इमारत के मलबे में करीब 30 से 40 छात्रों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। हादसे में एक छात्र की मौत की भी खबर सामने आई है।
बारिश के बीच हुआ हादसा
जानकारी के मुताबिक, यह घटना साउथ कैंपस थाना क्षेत्र के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर हुई।
बताया जा रहा है कि लगातार बारिश के बीच अचानक इमारत कमजोर होकर गिर गई। कुछ ही देर में पूरी बिल्डिंग मलबे में तब्दील हो गई, जिससे आसपास रहने वाले लोगों में डर का माहौल बन गया।
इमारत गिरने की तेज आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू करने में जुट गए।
छात्रों के दबे होने की आशंका
स्थानीय लोगों और छात्रों के अनुसार, इस इमारत में बड़ी संख्या में छात्र रहते थे।
छात्रों का दावा है कि हादसे के समय करीब 40 छात्र इमारत के अंदर मौजूद हो सकते थे। इसके बाद से मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए बचाव अभियान चलाया जा रहा है।
हालांकि, प्रशासन की ओर से अभी तक मलबे में फंसे लोगों की सही संख्या की पुष्टि नहीं की गई है।
पुलिस और फायर टीम मौके पर
हादसे की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग और अन्य राहत बचाव टीमें मौके पर पहुंच गईं।
बचाव दल ने तुरंत मलबा हटाने का काम शुरू किया। भारी मशीनों और अन्य उपकरणों की मदद से मलबे में दबे लोगों की तलाश की जा रही है।
स्थानीय लोग भी राहत कार्य में प्रशासन की मदद कर रहे हैं।
इलाके में मचा हड़कंप
इमारत गिरने के बाद सत्य निकेतन इलाके में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।
लोग अपने परिचितों और परिवार के सदस्यों की जानकारी लेने के लिए घटनास्थल पर पहुंचने लगे। पुलिस ने सुरक्षा के लिहाज से आसपास के इलाके में व्यवस्था संभाल ली है।
बचाव अभियान जारी
प्रशासन की प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकालना है।
बचावकर्मी बेहद सावधानी से मलबा हटा रहे हैं, ताकि अंदर मौजूद लोगों को नुकसान न पहुंचे।
अधिकारियों ने बताया कि राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।
इमारत गिरने के कारणों की जांच होगी
फिलहाल हादसे की वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है। शुरुआती तौर पर बारिश के कारण इमारत कमजोर होने की आशंका जताई जा रही है।
हालांकि, प्रशासन का कहना है कि बचाव कार्य पूरा होने के बाद इमारत गिरने के वास्तविक कारणों की जांच की जाएगी।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस हादसे के बाद राजधानी में पुराने और कमजोर भवनों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
बारिश के मौसम में जर्जर इमारतों के गिरने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में प्रशासन द्वारा समय-समय पर भवनों की जांच और सुरक्षा उपायों की जरूरत महसूस की जा रही है।
फिलहाल सत्य निकेतन में राहत और बचाव अभियान जारी है। प्रशासन की नजर मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने पर है। हादसे में हुए नुकसान और प्रभावित लोगों की पूरी जानकारी बचाव अभियान पूरा होने के बाद ही सामने आ सकेगी।





