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जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्रों का विरोध प्रदर्शन
Ratna Netam
21 Oct 2026 8:17 PM IST

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नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में जारी छात्र आंदोलन के बीच प्रशासन ने विवाद सुलझाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विश्वविद्यालय ने प्रदर्शनकारी छात्रों की मांगों पर विचार करने और परिसर में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए सात सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। समिति में वरिष्ठ डीन और प्रोफेसरों को शामिल किया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वह बातचीत, आपसी विश्वास और रचनात्मक संवाद के माध्यम से छात्रों की समस्याओं का समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध है। छात्रों की प्रमुख मांगों में छात्रसंघ की बहाली और प्रदर्शन में शामिल विद्यार्थियों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेना शामिल है।
18 अक्टूबर को गठित की गई उच्चस्तरीय समिति
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, 18 अक्टूबर 2026 को कुलपति प्रोफेसर मजहर आसिफ की अध्यक्षता में वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में कुलसचिव, विभिन्न संकायों के डीन, छात्र कल्याण अधिष्ठाता और अन्य अधिकारियों ने हिस्सा लिया।इस दौरान परिसर में जारी विरोध प्रदर्शन, भूख हड़ताल और छात्रों की मांगों पर विस्तार से चर्चा हुई।बैठक के बाद सात सदस्यीय समिति बनाने का निर्णय लिया गया। समिति को प्रदर्शनकारी छात्रों से सीधे बातचीत करने, उनकी शिकायतों की समीक्षा करने और विश्वविद्यालय में शांति बहाल करने के उपाय सुझाने की जिम्मेदारी सौंपी गई।
19 अक्टूबर को छात्रों से शुरू हुई बातचीत
विश्वविद्यालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, समिति ने गठन के अगले दिन 19 अक्टूबर को प्रदर्शनकारी छात्रों से संपर्क किया।समिति के सदस्य विरोध स्थल पर पहुंचे और छात्रों के साथ शुरुआती बातचीत की। प्रशासन ने इस संवाद को सार्थक बताते हुए कहा कि इससे आगे की चर्चा का आधार तैयार हुआ है।विश्वविद्यालय का कहना है कि छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से सुना जा रहा है और आपसी विश्वास के आधार पर समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।हालांकि, अब तक सभी मांगों पर अंतिम सहमति बनने की पुष्टि नहीं हुई है।
छात्रसंघ की बहाली को लेकर जारी है विरोध
जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र लंबे समय से छात्रसंघ चुनाव दोबारा शुरू करने की मांग कर रहे हैं।विश्वविद्यालय में वर्ष 2006 से केंद्रीय छात्रसंघ के चुनाव नहीं हुए हैं। छात्रों का कहना है कि छात्रसंघ नहीं होने के कारण विश्वविद्यालय से जुड़े निर्णयों में विद्यार्थियों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं हो पाता।इसी मांग को लेकर 12 अक्टूबर को पांच छात्रों ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी।प्रदर्शनकारी छात्र चाहते हैं कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रसंघ की बहाली पर स्पष्ट निर्णय ले और नियमित चुनाव कराने की व्यवस्था शुरू करे।
अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने की भी मांग
छात्रों ने आंदोलन में शामिल कुछ विद्यार्थियों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई का भी विरोध किया है।रिपोर्टों के अनुसार, विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रदर्शन से जुड़े तीन विद्यार्थियों के खिलाफ कार्रवाई की थी। इनमें एक छात्र को विश्वविद्यालय से निष्कासित करने और अन्य दो को निलंबित करने की जानकारी सामने आई थी।प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें उठाने वाले विद्यार्थियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।दूसरी ओर, विश्वविद्यालय प्रशासन ने अनुशासन और परिसर की व्यवस्था बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
सात सदस्यीय समिति में वरिष्ठ शिक्षाविद शामिल
समिति में मानविकी एवं भाषा संकाय के डीन प्रोफेसर इक्तिदार मोहम्मद खान, जीवन विज्ञान संकाय के डीन प्रोफेसर लुकमान अहमद खान और सामाजिक विज्ञान संकाय के डीन प्रोफेसर जुबैर मीनाई शामिल हैं।इसके अलावा छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रोफेसर नीलोफर अफजल, शैक्षणिक मामलों की डीन प्रोफेसर तनुजा, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग की प्रोफेसर मिनी एस. थॉमस और अंग्रेजी विभाग की प्रोफेसर सीमि मल्होत्रा को समिति का सदस्य बनाया गया है।समिति छात्रों की मांगों की समीक्षा करके अपनी रिपोर्ट कुलपति को सौंपेगी।
हॉस्टल और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे भी उठे
छात्रसंघ बहाली के अलावा विद्यार्थियों ने छात्रावास, पेयजल, शौचालय, पुस्तकालय, खेल सुविधाओं और परिसर में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों से जुड़े मुद्दे भी उठाए हैं।छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय में बेहतर शैक्षणिक वातावरण के साथ उनकी समस्याओं के समाधान की नियमित व्यवस्था होनी चाहिए।प्रशासन ने इन मुद्दों को भी समिति के सामने रखने की बात कही है, ताकि संबंधित विभागों के माध्यम से आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
बातचीत से विवाद सुलझाने पर प्रशासन का जोर
जामिया मिलिया इस्लामिया प्रशासन ने दोहराया है कि विश्वविद्यालय में शांतिपूर्ण और सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है।प्रशासन के अनुसार, समिति के माध्यम से छात्रों और अधिकारियों के बीच संवाद को आगे बढ़ाया जाएगा।विश्वविद्यालय प्रबंधन ने उम्मीद जताई है कि रचनात्मक बातचीत से छात्रों की समस्याओं का व्यावहारिक समाधान खोजा जा सकेगा।फिलहाल छात्रसंघ बहाली और अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने की मांग पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। ऐसे में समिति की आगामी बैठकों और उसकी रिपोर्ट पर छात्रों तथा विश्वविद्यालय प्रशासन की निगाहें टिकी हैं।
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