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दिल्ली-एनसीआर
दिल्ली में सड़कों पर उतरे छात्र युवा संगठन ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन
Ratna Netam
14 Oct 2026 2:21 PM IST

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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थानों में बदलाव के फैसले के बीच छात्र और युवा संगठनों ने विरोध मार्च निकाला। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) ने फिरोज शाह रोड से जंतर-मंतर तक संयुक्त मार्च निकालकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। इस दौरान संगठनों ने जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल के रूप में दोबारा बहाल करने की मांग भी उठाई।यह विरोध मार्च ऐसे समय में निकाला गया है, जब दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को आधिकारिक विरोध प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया है। इस फैसले के बाद राजधानी में विरोध प्रदर्शन करने के अधिकार और उसके लिए निर्धारित स्थानों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।दिल्ली पुलिस की ओर से जारी आधिकारिक नोटिस के अनुसार, अब राजधानी में धरना-प्रदर्शन और रैलियों के आयोजन के लिए तीन वैकल्पिक स्थान निर्धारित किए गए हैं। इनमें रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी मैदान शामिल हैं। जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने का निर्णय 12 अक्टूबर को सार्वजनिक किया गया था।
जंतर-मंतर को दोबारा प्रदर्शन स्थल बनाने की मांग
SFI और DYFI के संयुक्त विरोध मार्च का एक प्रमुख मुद्दा जंतर-मंतर को फिर से प्रदर्शन स्थल के रूप में मान्यता दिलाना रहा। दोनों संगठनों ने इस स्थान को विरोध प्रदर्शन के लिए उपलब्ध कराने की मांग को अपने आंदोलन का हिस्सा बनाया।जंतर-मंतर लंबे समय से राजधानी में धरना-प्रदर्शन और विभिन्न जनआंदोलनों का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां छात्र संगठन, कर्मचारी संगठन, सामाजिक कार्यकर्ता और राजनीतिक दल अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते रहे हैं।राजधानी के मध्य भाग में स्थित होने के कारण यह स्थान जनआंदोलनों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि, अब इसे निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के बाद आयोजकों को नए स्थानों पर प्रदर्शन करने की व्यवस्था का पालन करना होगा।
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग
संयुक्त मार्च के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। हाल के दिनों में चुनाव आयोग और मतदाता सूची संशोधन को लेकर विपक्षी दलों तथा विभिन्न संगठनों की ओर से विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं।मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर कई आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, चुनाव आयोग इन आरोपों को खारिज करता रहा है। इस बीच मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर राजधानी में विरोध प्रदर्शन जारी हैं।
12 अक्टूबर को सामने आया था नया आदेश
दिल्ली पुलिस ने 12 अक्टूबर को जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने की घोषणा की थी। आधिकारिक आदेश के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा गठित समिति की सिफारिशों के आधार पर वैकल्पिक प्रदर्शन स्थलों का चयन किया गया है।पुलिस की नई व्यवस्था में रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और सीबीडी मैदान को स्थान दिया गया है। इन स्थानों पर प्रदर्शन आयोजित करने से संबंधित विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया अलग से जारी किए जाने की बात भी कही गई है।
CJP के प्रतिनिधि भी पहुंचे थे पुलिस स्टेशन
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने की घोषणा वाले दिन यानी 12 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधि भी संसद मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचे थे।प्रतिनिधियों का उद्देश्य जंतर-मंतर पर प्रस्तावित शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के लिए तारीख और समय तय करने की मांग संबंधी पत्र सौंपना था। इसी दौरान जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थल के रूप में हटाने का फैसला भी सामने आया।इस घटनाक्रम ने राजधानी में विरोध प्रदर्शन की अनुमति और निर्धारित स्थलों के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है।
विरोध प्रदर्शन के अधिकार पर छिड़ी बहस
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने के बाद नागरिकों के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार और प्रशासनिक व्यवस्था के बीच संतुलन का सवाल सामने आया है।भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 नागरिकों को अभिव्यक्ति और शांतिपूर्ण सभा की स्वतंत्रता प्रदान करता है। हालांकि, इन अधिकारों पर कानून के तहत उचित प्रतिबंध भी लगाए जा सकते हैं।फिलहाल SFI और DYFI के संयुक्त मार्च ने जंतर-मंतर को दोबारा निर्धारित प्रदर्शन स्थल बनाने की मांग को प्रमुखता दी है। वहीं, मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे को लेकर भी विरोध जारी है। ऐसे में दिल्ली में धरना-प्रदर्शन की नई व्यवस्था और जंतर-मंतर की स्थिति को लेकर बहस बनी हुई है।
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