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युद्ध के लिए तैयार, विश्वसनीय और भविष्य के लिए सक्षम बनने का सुदृढ़ संकल्प: नौसेना प्रमुख
SHIDDHANT
10 Nov 2025 11:54 PM IST

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Delhi दिल्ली: भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी का कहना है कि भारतीय नौसेना युद्ध के लिए तैयार, विश्वसनीय, एकजुट और भविष्य के लिए सक्षम बनने के अपने संकल्प को निरंतर सुदृढ़ कर रही है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी वास्तव में एक सागरीय सदी है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र आज वैश्विक समुद्री शक्ति संतुलन का केंद्र बन चुका है। यह विश्व की शक्ति, समृद्धि और स्थिरता को आकार दे रहा है।
उन्होंने कहा कि इसी संदर्भ में भारत की इंडो-पैसिफिक महासागर पहल का भी विशेष महत्व है। नौसेना प्रमुख का कहना था कि यह क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और विकास के साझा दृष्टिकोण को आगे बढ़ाती है। नौसेना प्रमुख ने सोमवार को नई दिल्ली स्थित नेशनल डिफेंस कॉलेज (एनडीसी) का दौरा किया। इसी दौरान उन्होंने यह जानकारी दी। यहां उन्होंने 65वें एनडीसी पाठ्यक्रम को नेविगेटिंग दा मेरिटाइम सेंचुरी विषय पर अपनी बात रखी।
उन्होंने इंडो-पैसिफिक की वास्तविकताएं और भारतीय नौसेना के रूपांतरण पर संबोधन दिया। एडमिरल त्रिपाठी ने अपने संबोधन में इस स्वीकृत तथ्य का उल्लेख किया कि 21वीं सदी वास्तव में एक सागरीय सदी है। उन्होंने कहा कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र आज वैश्विक समुद्री शक्ति संतुलन का केंद्र बन चुका है, जो विश्व की शक्ति, समृद्धि और स्थिरता को आकार दे रहा है। इसी संदर्भ में भारत की इंडो-पैसिफिक महासागर पहल का भी विशेष महत्व है, जो क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और विकास के साझा दृष्टिकोण को आगे बढ़ाती है।
नौसेना प्रमुख ने कहा कि इस तेजी से बदलते समुद्री परिदृश्य में, भारतीय नौसेना, जो भारत की समुद्री शक्ति का प्रमुख प्रतीक है, एक सतत और सुविचारित रूपांतरण की प्रक्रिया से गुजर रही है। नौसेना प्रमुख के अनुसार यह रूपांतरण पांच स्तंभों पर आधारित है। इनमें युद्धक चपलता, क्षमता विकास, प्रौद्योगिकीय आत्मनिर्भरता, साझेदारी, और पीपल फर्स्ट दृष्टिकोण शामिल हैं।
एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि इन सिद्धांतों के माध्यम से भारतीय नौसेना युद्ध के लिए तत्पर, विश्वसनीय, एकजुट और भविष्य के लिए सक्षम बनने के अपने संकल्प को निरंतर सुदृढ़ कर रही है। उन्होंने आगे कहा कि भारत का सागरीय पुनरुत्थान, जो आत्मनिर्भरता और वैश्विक सहयोग पर आधारित है, विश्व के अस्थिर परिवेश में एक स्थिर प्रकाशस्तंभ के रूप में भारत की भूमिका को दर्शाता है
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