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Delhi दिल्ली सरकार ने डीटीसी और क्लस्टर बस सेवाओं को आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (ईएसएमए) के तहत ला दिया है, जिससे अगले छह महीनों के लिए राजधानी की सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को बाधित करने वाली हड़तालों और आंदोलनों पर प्रभावी ढंग से रोक लगा दी गई है। गृह विभाग ने दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) और परिवहन विभाग की क्लस्टर बस योजना की सेवाओं को आवश्यक सेवाओं के रूप में घोषित किया है। इस आदेश में दोनों बस सेवाओं के संचालन में शामिल नियमित, संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों को भी शामिल किया गया है।
आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित होने की तारीख से छह महीने तक प्रतिबंध लागू रहेगा। यह कदम हाल ही में बस सेवाओं में व्यवधान के बाद आया है, जिससे यात्रियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा और दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस तरह की रुकावटों को रोकने के लिए कदमों पर सरकार से सवाल किया।
23 सितंबर को सुनवाई के दौरान, मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की अध्यक्षता वाली पीठ ने सरकार और डीटीसी को बस सेवाओं को सुचारू रूप से चालू रखने के लिए आवश्यक उपाय करने का निर्देश दिया। अदालती कार्यवाही से यह भी पता चला कि सरकार पहले से ही ईएसएमए पर विचार कर रही है। डीटीसी ने अदालत को बताया कि कानून लागू करने का प्रस्ताव 16 और 17 सितंबर को सरकार को भेजा गया था। उस समय, उसने अदालत को सूचित किया कि लगभग 96 फीसदी बसें सड़कों पर लौट आई हैं।
सरकार की नवीनतम अधिसूचना अब उस प्रस्तावित उपाय को औपचारिक छह महीने के प्रतिबंध में बदल देती है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि भविष्य में इसी तरह की हड़तालों को रोकने के लिए अदालत के निर्देशों के बाद यह कदम उठाया गया है।
आदेश का महत्व दो बस प्रणालियों को चलाने वाले कार्यबल तक इसकी पहुंच में निहित है। इसमें न केवल स्थायी कर्मचारी बल्कि संविदा और आउटसोर्स कर्मचारी भी शामिल हैं, जिसका अर्थ है कि अधिसूचित सेवाओं को प्रभावित करने वाली किसी भी हड़ताल या आंदोलन को छह महीने के निषेध का सामना करना पड़ेगा।
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