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पूर्व न्यायाधीशों का बयान: "राजनीतिक बयानों से न्यायपालिका की गरिमा को खतरा"

SHIDDHANT
26 Aug 2025 8:07 PM IST
पूर्व न्यायाधीशों का बयान: राजनीतिक बयानों से न्यायपालिका की गरिमा को खतरा
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DELHI दिल्ली: देश के 56 पूर्व न्यायाधीशों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जुड़ी टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि कुछ सेवानिवृत्त न्यायाधीशों द्वारा बार-बार राजनीतिक बयान देना और न्यायिक स्वतंत्रता के नाम पर पक्षपातपूर्ण रुख अपनाना न्यायपालिका की गरिमा और निष्पक्षता के लिए हानिकारक है। यह बयान उस समय सामने आया है जब अमित शाह ने पूर्व न्यायाधीश सुदर्शन रेड्डी और सलवा जुडूम फैसले को लेकर टिप्पणी की थी। शाह की टिप्पणी पर कुछ पूर्व जजों ने असहमति जताई थी, जिसके जवाब में 56 पूर्व न्यायाधीशों ने एकजुट होकर अपनी राय रखी।

पूर्व जजों ने कहा कि यदि कोई पूर्व न्यायाधीश राजनीति में उतरता है और चुनाव लड़ता है, तो उसे अन्य उम्मीदवारों की तरह ही राजनीतिक बहस में अपनी स्थिति का बचाव करना चाहिए। इसे न्यायिक स्वतंत्रता का मुद्दा बनाना लोकतांत्रिक चर्चा को दबाने जैसा है। उनका मानना है कि न्यायिक स्वतंत्रता किसी राजनीतिक उम्मीदवार की आलोचना से खतरे में नहीं पड़ती। असल खतरा तब होता है जब पूर्व न्यायाधीश लगातार पक्षपातपूर्ण बयान देने लगते हैं, जिससे पूरी न्यायिक बिरादरी पर सवाल उठने लगते हैं और वह राजनीतिक गुट से जुड़ी हुई प्रतीत होने लगती है।

बयान में यह भी कहा गया कि एक पूर्व न्यायाधीश ने स्वेच्छा से भारत के उपराष्ट्रपति पद के लिए विपक्ष के समर्थन से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया था। ऐसे में उन्हें राजनीतिक मैदान में अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, न कि इसे न्यायपालिका की स्वतंत्रता से जोड़ना चाहिए। पूर्व न्यायाधीशों ने अपने सहयोगियों से अपील की है कि वे राजनीतिक रूप से प्रेरित बयानों से दूर रहें और न्यायपालिका को राजनीतिक विवादों से अलग रखें। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की गरिमा और स्वतंत्रता लोकतंत्र की नींव है, जिसे राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। इस बयान पर हस्ताक्षर करने वालों में पूर्व मुख्य न्यायाधीश पी. सदाशिवम, रंजन गोगोई सहित सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के कई पूर्व न्यायाधीश शामिल हैं।

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