जम्मू और कश्मीर

लद्दाख मुद्दे पर केंद्र और समूहों में गतिरोध

Kavita2
20 Aug 2026 10:41 AM IST
लद्दाख मुद्दे पर केंद्र और समूहों में गतिरोध
x

लेह। केंद्र सरकार और लद्दाख के दो प्रमुख राजनीतिक समूहों के बीच चल रही बातचीत फिलहाल रुक गई है। लद्दाख में एक चुनी हुई संस्था के गठन को लेकर हुए सैद्धांतिक समझौते को लागू करने की दिशा में बुधवार को हुई बैठक में कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी। इसके बाद लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो वे राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) के तहत विशेष संरक्षण की मांग को लेकर अपना आंदोलन फिर शुरू कर सकते हैं।

जानकारी के अनुसार, गृह मंत्रालय (MHA) की एक टीम ने बुधवार को लेह में LAB, KDA और लद्दाख के अन्य प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। करीब दो घंटे तक चली इस बैठक में लद्दाख से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन 22 मई को हुए समझौते को लागू करने को लेकर कोई सहमति नहीं बन सकी।

लद्दाख के राजनीतिक समूहों की प्रमुख मांग है कि केंद्र शासित प्रदेश में ऐसी चुनी हुई संस्था बनाई जाए जिसके पास विधायी, कार्यकारी और वित्तीय अधिकार हों। उनका कहना है कि स्थानीय लोगों की भागीदारी और क्षेत्र के विकास के लिए मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था जरूरी है।

सूत्रों के मुताबिक, केंद्र और लद्दाख प्रतिनिधियों के बीच 22 मई को एक समझौते पर सहमति बनी थी, जिसमें लद्दाख के लिए एक UT-स्तरीय चुनी हुई संस्था बनाने की बात कही गई थी। हालांकि, बुधवार की बैठक में इस समझौते के प्रावधानों को आगे बढ़ाने को लेकर कोई ठोस फैसला नहीं हो पाया।

बैठक के बाद केंद्र सरकार की ओर से सितंबर के पहले सप्ताह में नई दिल्ली में एक और बैठक आयोजित करने का आश्वासन दिया गया है। उम्मीद है कि अगली बैठक में लंबित मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी और समाधान निकालने की कोशिश होगी।

KDA नेता असगर अली करबलाई ने कहा कि बैठक के दौरान केंद्र के प्रतिनिधि मुख्य रूप से विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करते नजर आए। उन्होंने कहा कि लद्दाख के राजनीतिक समूह चाहते थे कि बातचीत सीधे 22 मई के समझौते के बिंदुओं पर केंद्रित हो, ताकि चुनी हुई संस्था और अधिकारों को लेकर स्पष्ट फैसला हो सके।

लद्दाख के दोनों प्रमुख समूह लंबे समय से क्षेत्र के लिए अधिक राजनीतिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि 2019 में जम्मू-कश्मीर से अलग होकर केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद स्थानीय लोगों की चिंताओं को दूर करने के लिए मजबूत संवैधानिक सुरक्षा जरूरी है।

LAB और KDA की प्रमुख मांगों में लद्दाख को राज्य का दर्जा देना और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करना शामिल है। छठी अनुसूची के तहत आदिवासी क्षेत्रों को विशेष प्रशासनिक अधिकार मिलते हैं। लद्दाख के कई समूहों का तर्क है कि इससे क्षेत्र की संस्कृति, जमीन और प्राकृतिक संसाधनों की बेहतर सुरक्षा हो सकेगी।

इससे पहले भी लद्दाख में इन मांगों को लेकर कई बार आंदोलन और प्रदर्शन हो चुके हैं। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक सहित कई लोगों ने भी लद्दाख के मुद्दों को लेकर आवाज उठाई है। स्थानीय संगठनों का कहना है कि केंद्र को जल्द से जल्द उनकी मांगों पर स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए।

लद्दाख भौगोलिक और सांस्कृतिक रूप से एक संवेदनशील क्षेत्र है। यहां बड़ी संख्या में ऐसे समुदाय रहते हैं जो अपनी पहचान और पारंपरिक अधिकारों को लेकर चिंतित हैं। राजनीतिक समूहों का कहना है कि स्थानीय लोगों की भागीदारी के बिना विकास योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करना मुश्किल होगा।

केंद्र सरकार की ओर से लगातार यह कहा जाता रहा है कि लद्दाख के विकास और स्थानीय हितों की रक्षा के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार क्षेत्र में सड़क, पर्यटन, ऊर्जा और आधारभूत सुविधाओं के विकास पर जोर दे रही है।

हालांकि, लद्दाख के राजनीतिक समूहों का कहना है कि केवल विकास परियोजनाएं पर्याप्त नहीं हैं। उनका मानना है कि प्रशासनिक और राजनीतिक अधिकारों के बिना स्थानीय लोगों की समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो सकता।

अब सभी की नजर सितंबर में होने वाली प्रस्तावित बैठक पर है। अगर उस बैठक में भी कोई ठोस समाधान नहीं निकलता है तो LAB और KDA दोबारा आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।

लद्दाख में राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग लंबे समय से चली आ रही है। आने वाले दिनों में केंद्र और स्थानीय समूहों के बीच बातचीत इस मुद्दे के समाधान की दिशा तय करेगी।

Next Story