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नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ जंतर-मंतर के पास विपक्षी दलों और संगठनों के विरोध-प्रदर्शन के बीच BRS नेता वी. श्रीनिवास गौड़ ने शुक्रवार को चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसकी स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के फैसलों और कामकाज को लेकर ज्यादा स्पष्टता की जरूरत है, ताकि जनता के मन में पैदा होने वाले संदेहों को दूर किया जा सके। गौड़ का बयान ऐसे समय आया है, जब चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की ओर से विरोध दर्ज कराया जा रहा है।
श्रीनिवास गौड़ ने कहा कि चुनाव आयोग के कामकाज का स्पष्ट आकलन होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने आयोग के आयुक्तों की भूमिका और उनके फैसलों को लेकर उठ रहे सवालों पर भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उनका कहना था कि चुनाव आयोग जैसी संस्था के कामकाज को लेकर जनता के बीच किसी तरह का संदेह बना रहता है तो उसका समाधान किया जाना जरूरी है।
गौड़ ने आयोग के भीतर अलग-अलग विचार सामने आने की स्थिति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को संबंधित विभागों से विचार-विमर्श करना चाहिए, ताकि अलग-अलग राय के कारण किसी तरह की गड़बड़ी या भ्रम की स्थिति पैदा न हो। उन्होंने चुनाव आयोग के फैसलों और उसके आयुक्तों की भूमिका को लेकर अधिक पारदर्शिता की आवश्यकता बताई।
BRS नेता ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि आयोग के स्वतंत्र होने की बात कही जाती है, लेकिन उनके अनुसार वास्तविक स्थिति इससे अलग है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग स्वतंत्र रूप से काम करने के बजाय सरकार के अधीन काम करता है। यह श्रीनिवास गौड़ का राजनीतिक आरोप है।
गौड़ ने कहा कि जनता के मन में चुनाव आयोग को लेकर जो सवाल और संदेह हैं, उन्हें दूर करने के लिए स्पष्ट जवाब सामने आने चाहिए। उन्होंने आयोग के कामकाज और आयुक्तों की भूमिका के आकलन की जरूरत बताते हुए कहा कि चुनावी व्यवस्था में लोगों का विश्वास बनाए रखने के लिए पारदर्शिता महत्वपूर्ण है।
शुक्रवार को दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन भी देखने को मिला। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI), डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) और विपक्ष से जुड़े नेताओं ने जंतर-मंतर के पास प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग उठाई और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया को लेकर सवाल किए।
विरोध-प्रदर्शन को देखते हुए नई दिल्ली इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली पुलिस ने प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लगाए गए थे। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग के खिलाफ अपनी मांगों को लेकर विरोध दर्ज कराया।
इसी विरोध के बीच श्रीनिवास गौड़ का बयान सामने आया। उन्होंने आयोग के फैसलों में स्पष्टता की मांग करते हुए कहा कि जनता के सवालों का जवाब मिलना चाहिए। उनके मुताबिक चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली का ऐसा आकलन होना चाहिए जिससे उसके फैसलों और आयुक्तों की भूमिका को लेकर स्थिति साफ हो सके।
गौड़ ने आयोग के भीतर संभावित मतभेदों के संदर्भ में भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि अलग-अलग राय होने की स्थिति में संबंधित विभागों से सलाह-मशविरा किया जाना चाहिए। उनके अनुसार इससे किसी तरह की गड़बड़ी की आशंका को कम किया जा सकता है और फैसलों को लेकर जनता के बीच स्पष्टता बढ़ सकती है।
BRS नेता ने सरकार की भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आखिरकार सरकार को इस मामले में कदम उठाना होगा। इसी दौरान उन्होंने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर सवाल उठाते हुए सरकार के अधीन काम करने का आरोप लगाया। हालांकि यह उनका दावा है और इसे उनके राजनीतिक बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बहस ऐसे समय तेज हुई है, जब मतदाता सूची और SIR की प्रक्रिया को लेकर भी विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं। शुक्रवार को दिल्ली के साथ मुंबई में भी चुनाव आयोग और SIR को लेकर प्रदर्शन हुआ। मुंबई के शिवाजी पार्क में भी प्रदर्शनकारियों ने कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए।
जंतर-मंतर के पास प्रदर्शन करने वाले संगठनों ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग उठाई। दिल्ली में प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। नई दिल्ली क्षेत्र में सभाओं, प्रदर्शनों और जुलूसों को लेकर प्रतिबंध लागू किए गए थे।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच BRS नेता श्रीनिवास गौड़ ने अपनी प्रतिक्रिया में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, फैसलों और स्वतंत्रता को मुख्य मुद्दा बनाया। उनका कहना था कि आयोग को लेकर जनता के बीच जो संदेह पैदा हुए हैं, उन्हें स्पष्ट किया जाना चाहिए।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि चुनाव आयोग के आयुक्तों की भूमिका और उनके काम को लेकर भी स्पष्टता होनी चाहिए। गौड़ के मुताबिक किसी भी तरह की अलग-अलग राय के कारण भ्रम पैदा नहीं होना चाहिए और आयोग को जरूरी विचार-विमर्श के बाद अपने फैसलों को स्पष्ट तरीके से सामने रखना चाहिए।
जंतर-मंतर के पास हुए विरोध-प्रदर्शन और BRS नेता के बयान के बाद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और स्वतंत्रता को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर सामने आई है। श्रीनिवास गौड़ ने आयोग के कामकाज के आकलन, आयुक्तों की भूमिका में स्पष्टता और जनता के संदेह दूर करने की मांग करते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े फैसलों में पारदर्शिता आवश्यक है।
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