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नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने बुधवार को कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि उन्होंने बार-बार कानून तोड़ा था और इस बात की आशंका थी कि अगर उन्हें रिहा किया गया, तो वे फिर से "कानून तोड़ेंगे और दूसरों को भी ऐसा करने के लिए उकसाएंगे"।
पुलिस ने आगे बताया कि CJP के अजिंक्य शिंदे को 5,000 रुपये के पर्सनल बॉन्ड और ज़मानत पर छह महीने तक "शांति और अच्छा व्यवहार" बनाए रखने का पाबंद किया गया।
पुलिस ने एक बयान में कहा, "13 अक्टूबर 2026 की सुबह, सौरव दास, आशुतोष रंका, अजिंक्य शिंदे और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 11 अन्य सदस्य एक निजी परिसर से घुसकर जंतर-मंतर पहुँचे, जिसे अब विरोध-प्रदर्शन के लिए तय जगह के तौर पर मान्यता नहीं दी गई है।"
अधिकारियों के अनुसार, मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने बीच-बचाव किया और उन्हें रोकने की कोशिश की। हालाँकि, प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर पुलिसकर्मियों को उनके सरकारी काम करने से रोका।
बयान में कहा गया, "सभी 14 लोगों को हिरासत में लिया गया और उनके खिलाफ FIR नंबर 289/26 PS कनॉट प्लेस (धारा 223a/332/61(2), तारीख 13.10.2026) और FIR नंबर 128/26 (धारा 221/115(2)/132/121(1)/3(5), तारीख 13.10.2026 PS पार्लियामेंट स्ट्रीट) दर्ज की गईं।"
इसमें आगे कहा गया कि इसके बाद, कानून के अनुसार सभी लोगों को संबंधित मामले में पाबंद किया गया।
पुलिस ने यह भी बताया कि "सार्वजनिक शांति भंग करने और कानून तोड़ने की बार-बार कोशिशों" को देखते हुए, आशुतोष रंका, सौरव दास और अजिंक्य शिंदे को कानून के संबंधित एहतियाती प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों ने कहा, "सोशल मीडिया के ज़रिए दूसरों को ऐसी ही गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल होने के लिए उकसाने की उनकी कथित कोशिशों पर भी ध्यान दिया गया।"
इन तीनों लोगों को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने पेश किया गया, जहाँ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126/170 के तहत कार्यवाही शुरू की गई।
दास, रंका और शिंदे को बुधवार सुबह नई दिल्ली के मंदिर मार्ग पर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया।
पुलिस ने कहा, "मामले पर विचार करने के बाद, SEM कोर्ट ने कलंद्रा (पुलिस रिपोर्ट) की जानकारी और कानून के बार-बार उल्लंघन को देखते हुए, और इस गंभीर आशंका के आधार पर कि ज़मानत पर रिहा होने पर वे फिर से कानून तोड़ेंगे और दूसरों को भी कानून तोड़ने के लिए उकसाएंगे, सौरव दास और आशुतोष रंका को 05 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।"
उन्होंने आगे कहा, "अजिंक्य शिंदे को 5,000 रुपये के पर्सनल बॉन्ड और ज़मानत पर 06 महीने तक शांति बनाए रखने और अच्छा व्यवहार करने का पाबंद किया गया।"
इससे पहले, 10 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शन से जुड़े एक मामले में CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके को दास और रंका के साथ 50,000 रुपये का बॉन्ड भरने और इस शर्त पर रिहा किया गया था कि वे एक साल तक शांति भंग करने वाले किसी भी मामले में शामिल नहीं होंगे।
इस बार, दास और रंका पर बिना इजाज़त घुसने (trespassing) और बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने का मामला दर्ज किया गया है। उन्हें बार-बार नियम तोड़ने वाले (repeat offenders) के तौर पर देखा जा रहा है।
CJP के तीनों नेताओं को मंगलवार सुबह पुलिस बैरिकेड्स पार करके जंतर-मंतर में घुसने के आरोप में हिरासत में लिया गया था; जंतर-मंतर को अब विरोध प्रदर्शन के लिए तय जगह (designated site) नहीं माना जाता है।
वे वोटर लिस्ट की 'स्पेशल इंटेंसिव रिव्यू' (SIR) में कथित गड़बड़ियों को लेकर भारत के चुनाव आयोग (ECI) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने जा रहे थे। पुलिस बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश करते हुए उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगाते देखा गया।
इसके बाद, तीनों को हिरासत में ले लिया गया।
दिल्ली पुलिस ने बताया कि 12 अक्टूबर को जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन के लिए "तय" जगह (designated site) के तौर पर हटा दिया गया था। दिल्ली पुलिस के स्टैंडिंग ऑर्डर नंबर L&O/48/2026 के तहत विरोध प्रदर्शनों के लिए नई गाइडलाइंस जारी की गईं।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, यह फ़ैसला गृह मंत्रालय की एक कमेटी की सिफारिशों के आधार पर लिया गया।
दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के लिए तीन नई जगहें तय की गई हैं -- रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का CBD मैदान।
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