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सोनम वांगचुक का आह्वान कहा 2047 तक सम्मानित राष्ट्र बनने के लिए चाहिए बड़ा बदलाव

Kavita2
14 Aug 2026 10:27 AM IST
सोनम वांगचुक का आह्वान कहा 2047 तक सम्मानित राष्ट्र बनने के लिए चाहिए बड़ा बदलाव
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नई दिल्ली: सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक ने भारत में राजनीतिक नेतृत्व चुनने के तरीके में बदलाव की जरूरत बताते हुए "शांतिपूर्ण क्रांति" का आह्वान किया है। स्वतंत्रता दिवस से पहले जारी एक वीडियो संदेश में वांगचुक ने कहा कि अगर भारत को 2047 तक एक सम्मानित राष्ट्र के रूप में अपनी पहचान बनाए रखनी है तो देश को बड़े सुधारों और बदलावों की आवश्यकता होगी।

सोनम वांगचुक ने अपने संदेश में नागरिकों से सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश के भविष्य को बेहतर दिशा देने के लिए ऐसे लोगों को आगे लाना जरूरी है जो निस्वार्थ भावना से काम करें, जिनमें साहस हो और जिनका चरित्र एवं क्षमता मजबूत हो।

उन्होंने लोगों से अपील की कि वे ऐसे स्त्री-पुरुषों के नाम सुझाएं जो देश का नेतृत्व करने की योग्यता रखते हों और समाज के हित में काम करने की सोच रखते हों। वांगचुक ने कहा कि भारत को ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जो व्यक्तिगत लाभ से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को प्राथमिकता दे।




वांगचुक ने अपने संदेश में "भारत के दूसरे स्वतंत्रता आंदोलन" की बात भी कही। उन्होंने इसे किसी राजनीतिक संघर्ष के बजाय एक शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक बदलाव की प्रक्रिया बताया। उनका कहना था कि देश को ऐसी व्यवस्था की ओर बढ़ना चाहिए जहां योग्य और ईमानदार लोगों को नेतृत्व के अवसर मिल सकें।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता केवल विदेशी शासन से मुक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों को ऐसी व्यवस्था बनाने की दिशा में भी काम करना चाहिए जिसमें पारदर्शिता, जवाबदेही और जनभागीदारी मजबूत हो।

सोनम वांगचुक लंबे समय से शिक्षा, पर्यावरण और सामाजिक मुद्दों को लेकर आवाज उठाते रहे हैं। उन्होंने अपने संदेश में युवाओं और आम नागरिकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना है कि देश का भविष्य केवल सरकारों से नहीं बल्कि नागरिकों की सोच और भागीदारी से भी तय होता है।

वांगचुक ने कहा कि भारत के पास दुनिया में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की क्षमता है, लेकिन इसके लिए व्यवस्था में सुधार और बेहतर नेतृत्व की आवश्यकता है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे राजनीति को केवल नेताओं की जिम्मेदारी न मानें, बल्कि देश निर्माण की प्रक्रिया में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।

उन्होंने अपने संदेश में अच्छे चरित्र और योग्यता वाले लोगों को सामने लाने पर जोर दिया। उनका कहना था कि नेतृत्व के लिए केवल लोकप्रियता पर्याप्त नहीं होनी चाहिए, बल्कि ईमानदारी, जिम्मेदारी और दूरदर्शिता भी जरूरी है।

वांगचुक का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों में जुटा हुआ है। स्वतंत्रता दिवस से पहले उन्होंने नागरिकों को लोकतंत्र की मजबूती और देश के भविष्य को लेकर सोचने का संदेश दिया।

उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत को कई चुनौतियों का सामना करना होगा। आर्थिक विकास, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समानता और बेहतर प्रशासन जैसे क्षेत्रों में प्रभावी कदम उठाने होंगे। इसके लिए सक्षम और जिम्मेदार नेतृत्व की जरूरत होगी।

सोनम वांगचुक के इस संदेश ने राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में चर्चा को जन्म दिया है। उनके समर्थकों का कहना है कि उन्होंने नागरिकों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया है। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि राजनीतिक बदलाव के लिए संस्थागत सुधार और व्यापक जनभागीदारी जरूरी है।

वांगचुक ने अपने संदेश के माध्यम से यह सवाल उठाया कि देश के नेतृत्व का चयन किस तरह किया जाता है और क्या इसमें बदलाव की जरूरत है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे अपने आसपास ऐसे लोगों की पहचान करें जो समाज और देश के लिए बेहतर योगदान दे सकते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत को मजबूत और सम्मानित राष्ट्र बनाने के लिए केवल आर्थिक विकास ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि नैतिक मूल्यों और जिम्मेदार नेतृत्व की भी आवश्यकता है।

फिलहाल सोनम वांगचुक का यह आह्वान देश में राजनीतिक सुधार और नागरिक भागीदारी को लेकर नई बहस को जन्म दे रहा है। स्वतंत्रता दिवस से पहले दिए गए इस संदेश में उन्होंने लोगों से बदलाव की दिशा में शांतिपूर्ण और सकारात्मक भूमिका निभाने की अपील की है।

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