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भूख हड़ताल के बाद सोनम वांगचुक राजघाट पहुंचे

Kavita2
27 July 2026 5:40 PM IST
भूख हड़ताल के बाद सोनम वांगचुक राजघाट पहुंचे
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नई दिल्ली: जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक ने सोमवार को अपनी पत्नी गीतांजलि आंग्मो के साथ राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल से छुट्टी मिलने के तुरंत बाद यह उनकी पहली सार्वजनिक उपस्थिति थी। इससे पहले वांगचुक ने 26 दिनों तक चली अपनी भूख हड़ताल समाप्त की थी।

राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए सोनम वांगचुक ने कहा कि उन्होंने अपनी पहली सार्वजनिक यात्रा के रूप में राजघाट जाने का निर्णय लिया, ताकि वह राष्ट्रपिता के प्रति अपना आभार व्यक्त कर सकें और गांधीवादी सिद्धांतों में अपने विश्वास को दोहरा सकें।




वांगचुक ने कहा कि गांधी के विचारों ने हमेशा उन्हें प्रेरित किया है और अहिंसा, सत्य तथा शांतिपूर्ण आंदोलन के रास्ते पर उनका भरोसा कायम है। उन्होंने कहा कि राजघाट आना उनके लिए एक भावनात्मक और वैचारिक रूप से महत्वपूर्ण कदम था।

सोनम वांगचुक पिछले कुछ समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने 26 दिनों तक भूख हड़ताल की थी, जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों की सलाह और स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्हें मेदांता अस्पताल ले जाया गया था।

अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद सोमवार को वह सीधे राजघाट पहुंचे। उनके साथ उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो भी मौजूद थीं। बड़ी संख्या में समर्थकों और मीडिया की मौजूदगी के बीच उन्होंने गांधी समाधि पर पुष्प अर्पित किए।

वांगचुक ने अपने आंदोलन के दौरान भी शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीकों पर जोर दिया था। उन्होंने कहा कि किसी भी मुद्दे के समाधान के लिए संवाद और संवैधानिक रास्ते महत्वपूर्ण हैं।

राजघाट पर उन्होंने गांधी के विचारों को याद करते हुए कहा कि देश में बदलाव लाने के लिए धैर्य, सत्य और अहिंसा के रास्ते को अपनाना जरूरी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनकी आवाज और मांगों पर संबंधित पक्ष गंभीरता से विचार करेंगे।

सोनम वांगचुक शिक्षा और पर्यावरण के क्षेत्र में अपने काम के लिए जाने जाते हैं। लद्दाख में शिक्षा सुधार और टिकाऊ विकास को लेकर उनके प्रयासों की लंबे समय से चर्चा होती रही है। वह स्थानीय समुदायों की भागीदारी और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मुद्दों को लेकर सक्रिय रहे हैं।

उनकी भूख हड़ताल और आंदोलन के दौरान कई लोगों ने उनका समर्थन किया था। समर्थकों का कहना है कि वांगचुक लंबे समय से क्षेत्रीय हितों, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय लोगों की चिंताओं को सामने रखते रहे हैं।

वहीं, प्रशासन और संबंधित पक्षों की ओर से इन मुद्दों पर बातचीत और समाधान की प्रक्रिया जारी रहने की बात कही गई है। वांगचुक के अस्पताल से बाहर आने के बाद अब सभी की नजर उनके अगले कदमों पर है।

राजघाट यात्रा के दौरान वांगचुक ने यह भी संकेत दिया कि वह अपने विचारों और मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से आगे रखते रहेंगे। उन्होंने कहा कि गांधीवादी मार्ग उनके लिए केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि किसी भी आंदोलन को आगे बढ़ाने का प्रभावी तरीका है।

26 दिनों की भूख हड़ताल के बाद उनकी यह पहली सार्वजनिक मौजूदगी राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है। समर्थकों ने इसे गांधीवादी मूल्यों के प्रति उनके समर्पण और शांतिपूर्ण संघर्ष के संदेश के रूप में देखा है।

फिलहाल सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य में सुधार के बाद वह सार्वजनिक गतिविधियों में लौट आए हैं। आने वाले दिनों में उनके आंदोलन और आगे की रणनीति पर सभी की नजर रहेगी।

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