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अनशन खत्म करने को लेकर सोनम वांगचुक का बड़ा खुलासा, बोले- राहुल से भी की गई थी पहल

Kavita2
6 Aug 2026 10:42 AM IST
अनशन खत्म करने को लेकर सोनम वांगचुक का बड़ा खुलासा, बोले- राहुल से भी की गई थी पहल
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नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में अपना 26 दिन का अनशन खत्म करने को लेकर आलोचनाओं के बीच पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने बड़ा खुलासा किया है। वांगचुक ने कहा है कि उनका अनशन खत्म करवाने के लिए विपक्ष के नेता राहुल गांधी से भी संपर्क करने की कोशिश की गई थी, लेकिन वहां से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली।

एक इंटरव्यू में सोनम वांगचुक ने बताया कि उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो इस कोशिश में जुटी थीं कि राहुल गांधी के माध्यम से उनका अनशन समाप्त कराया जा सके। उन्होंने कहा कि गीतांजलि राहुल गांधी के खिलाफ नहीं थीं, बल्कि वह समाधान निकालने की कोशिश कर रही थीं।




राहुल गांधी के जरिए अनशन खत्म करने की थी योजना

सोनम वांगचुक ने इंटरव्यू में कहा कि शुरुआत में यह विचार किया गया था कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी के जरिए उनका अनशन खत्म कराया जाए। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी गीतांजलि इस दिशा में प्रयास कर रही थीं।

वांगचुक के मुताबिक, गीतांजलि ने इस मुद्दे पर पहल करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें राहुल गांधी की ओर से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद अनशन खत्म करने को लेकर दूसरे विकल्पों पर विचार किया गया।

नड्डा और जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में खत्म किया था अनशन

सोनम वांगचुक ने लद्दाख से जुड़े मुद्दों को लेकर अपना अनशन शुरू किया था। 26 दिन तक चले इस अनशन के बाद उन्होंने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में इसे समाप्त किया।

इस घटनाक्रम के बाद कुछ लोगों ने सवाल उठाए कि उन्होंने सरकार के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में अनशन क्यों खत्म किया। आलोचनाओं के बीच वांगचुक ने अब अपनी स्थिति स्पष्ट की है।

पत्नी की भूमिका को किया स्पष्ट

वांगचुक ने कहा कि उनकी पत्नी गीतांजलि पूरे मामले में सक्रिय रूप से समाधान तलाशने की कोशिश कर रही थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि गीतांजलि किसी राजनीतिक दल के विरोध में नहीं थीं और उनका उद्देश्य केवल बातचीत के माध्यम से रास्ता निकालना था।

उन्होंने कहा कि अनशन खत्म करने के लिए अलग-अलग स्तरों पर बातचीत की संभावनाएं तलाश की गई थीं।

लद्दाख के मुद्दों को लेकर आंदोलन

सोनम वांगचुक लद्दाख के पर्यावरण, संस्कृति और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर लंबे समय से आवाज उठाते रहे हैं। उनके आंदोलन में लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा, राज्य का दर्जा और स्थानीय लोगों की भागीदारी जैसे मुद्दे प्रमुख रहे हैं।

उनके अनशन को लेकर देशभर में चर्चा हुई और कई लोगों ने इसे लद्दाख के भविष्य से जुड़े सवालों के रूप में देखा।

राजनीतिक समर्थन को लेकर चर्चा

वांगचुक के आंदोलन के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों और नेताओं की प्रतिक्रियाएं भी सामने आती रही हैं। उनके अनशन खत्म करने के तरीके को लेकर जहां कुछ लोगों ने सवाल उठाए, वहीं कई लोगों ने इसे बातचीत के रास्ते आगे बढ़ने का प्रयास बताया।

वांगचुक ने अपने ताजा बयान में यह संकेत दिया कि उनका उद्देश्य किसी एक राजनीतिक पक्ष के साथ खड़ा होना नहीं, बल्कि मुद्दों का समाधान तलाशना था।

बातचीत को बताया जरूरी

सोनम वांगचुक ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में बातचीत का रास्ता हमेशा खुला रहना चाहिए। उन्होंने अलग-अलग पक्षों से संवाद की कोशिश को इसी दिशा में उठाया गया कदम बताया।

उन्होंने कहा कि किसी भी आंदोलन का उद्देश्य केवल विरोध करना नहीं, बल्कि समाधान तक पहुंचना होना चाहिए।

आगे भी जारी रहेगा प्रयास

वांगचुक ने कहा कि लद्दाख से जुड़े मुद्दों पर उनका प्रयास जारी रहेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में सभी पक्षों के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकाला जा सकेगा।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं है, बल्कि क्षेत्र के लोगों की मांगों और चिंताओं को सामने रखने के लिए है।

कुल मिलाकर, सोनम वांगचुक के ताजा बयान ने उनके अनशन खत्म करने को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को नया मोड़ दे दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अनशन समाप्त करने से पहले राहुल गांधी के माध्यम से पहल की कोशिश की गई थी, लेकिन सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिलने के बाद अन्य विकल्पों के जरिए प्रक्रिया आगे बढ़ी।

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