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पासपोर्ट और नागरिकता को लेकर स्थिति साफ

Saba Naaz
25 Jun 2026 2:57 PM IST
पासपोर्ट और नागरिकता को लेकर स्थिति साफ
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नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय (MEA) ने भारतीय पासपोर्ट को लेकर वर्षों से चले आ रहे कन्फ्यूजन को खत्म करते हुए स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण पत्र (Citizenship Certificate) नहीं होता है। मंत्रालय ने कहा कि पासपोर्ट एक ट्रैवल डॉक्यूमेंट है, जिसे अंतरराष्ट्रीय यात्रा को सुगम बनाने के लिए भारत सरकार जारी करती है।

यह स्पष्टीकरण 14वें पासपोर्ट सेवा दिवस के अवसर पर दिया गया, जिसमें मंत्रालय ने साफ किया कि पासपोर्ट भले ही व्यक्ति की भारतीय राष्ट्रीयता को दर्शाता है, लेकिन इसे हर कानूनी स्थिति में नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।

पासपोर्ट और नागरिकता में अंतर क्या है?

विदेश मंत्रालय के अनुसार, पासपोर्ट नागरिकता के आधार पर जारी किया जाता है, लेकिन यह स्वयं नागरिकता प्रदान नहीं करता। पासपोर्ट जारी करने से पहले कई दस्तावेजों की जांच की जाती है, जिनमें जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, शैक्षणिक दस्तावेज और अन्य सरकारी रिकॉर्ड शामिल होते हैं।

इन सभी दस्तावेजों के आधार पर व्यक्ति की पात्रता की जांच की जाती है, जिसके बाद पासपोर्ट जारी किया जाता है। यानी पासपोर्ट नागरिकता का संकेत जरूर देता है, लेकिन कानूनी रूप से यह नागरिकता का प्रमाण नहीं है।

नागरिकता का फैसला कैसे होता है?

भारत में नागरिकता से जुड़े सभी नियम नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत निर्धारित किए गए हैं। इस कानून के अनुसार किसी व्यक्ति को नागरिकता कई आधारों पर मिल सकती है, जैसे—

जन्म के आधार पर, वंश (Descent) के आधार पर, पंजीकरण के माध्यम से और प्राकृतिककरण (Naturalisation) के जरिए।

इसके अलावा 1987 और 2004 के संशोधनों के बाद जन्म और माता-पिता से जुड़ी जानकारी नागरिकता तय करने में अहम भूमिका निभाती है। इस प्रक्रिया का अंतिम निर्णय कानूनी प्रावधानों के अनुसार होता है, न कि केवल किसी एक दस्तावेज के आधार पर।

आधार और वोटर आईडी पर भी स्थिति साफ

मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि आधार कार्ड और वोटर आईडी भी नागरिकता का प्रमाण नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट पहले ही यह स्पष्ट कर चुका है कि आधार केवल पहचान का दस्तावेज है, जबकि वोटर आईडी मुख्य रूप से मतदान, पहचान और निवास संबंधी जानकारी को दर्शाता है।

इसका मतलब है कि ये दस्तावेज व्यक्ति की पहचान और सुविधा के लिए हैं, लेकिन नागरिकता तय करने का आधार नहीं हैं।

कौन सा दस्तावेज क्या साबित करता है?

सरकारी जानकारी के अनुसार अलग-अलग दस्तावेजों की अलग-अलग भूमिका होती है। पासपोर्ट अंतरराष्ट्रीय यात्रा और राष्ट्रीयता का संकेत देता है, आधार पहचान का प्रमाण है, वोटर आईडी मतदान और पहचान से जुड़ा दस्तावेज है, जबकि जन्म प्रमाण पत्र जन्म संबंधी जानकारी को दर्शाता है।

नागरिकता का वास्तविक निर्धारण नागरिकता अधिनियम के तहत सरकारी रिकॉर्ड और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से किया जाता है।

सरकार ने यह स्पष्टीकरण क्यों दिया?

विदेश मंत्रालय ने यह क्लैरिफिकेशन इसलिए जारी किया क्योंकि लंबे समय से लोगों के बीच यह गलत धारणा बनी हुई थी कि पासपोर्ट या आधार जैसे दस्तावेज ही नागरिकता का अंतिम प्रमाण हैं। कई मामलों में इन दस्तावेजों को लेकर भ्रम की स्थिति देखी जाती रही है।

मंत्रालय ने यह भी याद दिलाया कि भारतीय पासपोर्ट भारत सरकार की संपत्ति होता है और कानूनी प्रावधानों के तहत जरूरत पड़ने पर इसे वापस भी लिया जा सकता है।

इस स्पष्टीकरण के बाद नागरिकता और दस्तावेजों को लेकर फैला भ्रम काफी हद तक दूर माना जा रहा है। सरकार का यह कदम आम नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे पहचान और नागरिकता से जुड़े कानूनी पहलुओं की स्पष्ट समझ मिलती है।

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