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नई दिल्ली। दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों की सालाना सैलरी की तुलना करने वाली एक सोशल मीडिया पोस्ट ने राजनीतिक पदों से जुड़ी आर्थिक सुविधाओं और वेतन को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। उद्योगपति हर्ष गोयनका ने सोशल मीडिया पर कई देशों के प्रमुख नेताओं की सालाना सैलरी का ब्योरा साझा किया, जिसके बाद यह पोस्ट तेजी से चर्चा में आ गई।
गोयनका द्वारा साझा की गई सूची में अलग-अलग देशों के शीर्ष नेताओं की अनुमानित सालाना आय रुपये में बताई गई है। इस सूची में सिंगापुर के प्रधानमंत्री सबसे ऊपर बताए गए हैं, जिनकी सालाना सैलरी करीब 26.6 करोड़ रुपये दर्शाई गई है। वहीं, भारत और चीन के नेताओं की सैलरी इस सूची में सबसे कम दिखाई गई है।
Annual salaries of some world leaders:
— Harsh Goenka (@hvgoenka) September 9, 2026
🇸🇬 Singapore PM: ₹26.6 cr
🇭🇰 Hong Kong Chief Executive: ₹6.83 cr
🇨🇭 Swiss President: ₹5.76 cr
🇺🇸 US President: ₹3.8 cr
🇬🇧 UK PM: ₹2.19 cr
🇨🇳 Xi Jinping: ₹21 lakh
🇮🇳 PM Modi: ₹20 lakh
Quite a range for essentially the same job…
पोस्ट के अनुसार, सिंगापुर के प्रधानमंत्री के बाद हांगकांग के चीफ एग्जीक्यूटिव का स्थान है, जिनकी सालाना सैलरी करीब 6.83 करोड़ रुपये बताई गई है। इसके बाद स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति की सालाना आय करीब 5.76 करोड़ रुपये और अमेरिकी राष्ट्रपति की सैलरी करीब 3.8 करोड़ रुपये बताई गई है।
सूची में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री की सालाना सैलरी करीब 2.19 करोड़ रुपये बताई गई है। वहीं, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सालाना सैलरी करीब 20 से 21 लाख रुपये के बीच बताई गई है।
हर्ष गोयनका ने इस तुलना के साथ लिखा, “असल में एक ही तरह के काम के लिए सैलरी में इतना बड़ा अंतर!” उनके इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने नेताओं की सैलरी, सरकारी सुविधाओं और पद की जिम्मेदारियों को लेकर अपनी-अपनी राय रखनी शुरू कर दी।
कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि अलग-अलग देशों में नेताओं की सैलरी तय करने के तरीके अलग होते हैं। कुछ देशों में नेताओं को अधिक वेतन दिया जाता है, जबकि कुछ देशों में राजनीतिक पदों को सेवा और जिम्मेदारी के रूप में देखा जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी देश के नेता की आर्थिक स्थिति को केवल वेतन से नहीं आंका जा सकता। कई देशों में राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री को वेतन के अलावा सरकारी आवास, सुरक्षा, यात्रा सुविधा, स्वास्थ्य सेवाएं और अन्य आधिकारिक सुविधाएं भी मिलती हैं।
राजनीतिक पदों पर मिलने वाली सुविधाएं और वेतन देश की आर्थिक स्थिति, शासन व्यवस्था और परंपराओं के अनुसार अलग-अलग होते हैं। कुछ देशों में नेताओं को निजी क्षेत्र के बड़े पदों के मुकाबले कम वेतन मिलता है, जबकि कुछ देशों में शीर्ष पदों के लिए अधिक वेतन निर्धारित किया गया है।
भारत में प्रधानमंत्री का वेतन सरकारी नियमों के अनुसार तय होता है। इसके अलावा प्रधानमंत्री को आधिकारिक आवास, सुरक्षा, यात्रा और अन्य सरकारी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं। इसी तरह दुनिया के अन्य देशों में भी नेताओं को वेतन के साथ कई तरह की सुविधाएं मिलती हैं।
सोशल मीडिया पर चल रही इस तुलना ने यह चर्चा भी शुरू कर दी है कि क्या बड़े संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों की सैलरी उनकी जिम्मेदारियों के अनुरूप होनी चाहिए या नहीं। कुछ लोगों का मानना है कि उच्च पदों पर बैठे नेताओं को पर्याप्त वेतन मिलना चाहिए, ताकि पद की गरिमा बनी रहे।
वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि राजनीतिक नेतृत्व का मूल्यांकन केवल वेतन से नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, नेताओं की भूमिका, नीतियां, फैसले और जनता पर उनका प्रभाव ज्यादा महत्वपूर्ण होता है।
इस तरह की सैलरी तुलना पहले भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनती रही है। हालांकि, अलग-अलग देशों में वेतन संरचना और सुविधाओं में काफी अंतर होने के कारण सीधी तुलना करना आसान नहीं होता।
हर्ष गोयनका की पोस्ट ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि दुनिया के शीर्ष राजनीतिक पदों पर बैठे लोगों को कितना वेतन मिलना चाहिए और क्या वेतन उनकी जिम्मेदारियों के अनुपात में है।
फिलहाल यह पोस्ट सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग अपने-अपने नजरिए से नेताओं की सैलरी और सुविधाओं को लेकर प्रतिक्रिया दे रहे हैं।





