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नई दिल्ली। संसद को फिर से बुलाए जाने की संभावनाओं को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के बयान के बाद विपक्षी दलों में चर्चा बढ़ गई है। रिजिजू ने संकेत दिया है कि सरकार महिला आरक्षण कानून को जल्द लागू करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं से इस कानून को लागू करने का वादा किया है और सरकार अपने वादे को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
रिजिजू के इस बयान को संसद की संभावित बैठक और परिसीमन प्रक्रिया से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं, विपक्ष ने सरकार से मांग की है कि परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर कोई भी निर्णय लेने से पहले सभी दलों के साथ चर्चा की जाए।
महिला आरक्षण कानून को लेकर सरकार सक्रिय
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि महिला आरक्षण कानून को लागू करने की दिशा में सरकार आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व में अधिक भागीदारी देना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
महिला आरक्षण कानून संसद से पारित हो चुका है, लेकिन इसके लागू होने के लिए परिसीमन और जनगणना जैसी प्रक्रियाओं को पूरा करना आवश्यक है। इसी कारण परिसीमन का मुद्दा अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।
सरकार का कहना है कि महिला आरक्षण कानून महिलाओं को लोकतांत्रिक व्यवस्था में मजबूत भागीदारी देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।
संसद सत्र को लेकर बढ़ी अटकलें
मानसून सत्र समाप्त होने के बाद भी संसद को औपचारिक रूप से अनिश्चितकाल के लिए स्थगित नहीं किए जाने को लेकर पहले से ही कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं।
अब किरेन रिजिजू के बयान के बाद यह संभावना जताई जा रही है कि सरकार किसी विशेष मुद्दे पर संसद की बैठक दोबारा बुला सकती है।
हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक संसद के विशेष सत्र को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
खरगे ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा। इसमें उन्होंने संसद की संभावित बैठक और परिसीमन से जुड़े मुद्दों पर सरकार से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की।
खरगे का कहना है कि परिसीमन देश के राजनीतिक ढांचे पर व्यापक असर डालने वाला विषय है। इसलिए इस पर सभी राजनीतिक दलों से विचार-विमर्श किया जाना चाहिए।
कांग्रेस का मानना है कि बिना व्यापक चर्चा के परिसीमन से जुड़े फैसले नहीं लिए जाने चाहिए।
परिसीमन को लेकर विपक्ष की चिंता
परिसीमन प्रक्रिया के तहत लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं और सीटों का पुनर्गठन किया जाता है। यह प्रक्रिया जनसंख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
विपक्षी दलों की चिंता है कि परिसीमन के बाद राज्यों के बीच राजनीतिक संतुलन प्रभावित हो सकता है।
खासतौर पर दक्षिण भारत के कई राज्यों में यह आशंका जताई जाती रही है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को सीटों के पुनर्वितरण में नुकसान हो सकता है।
इसी वजह से विपक्ष इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा की मांग कर रहा है।
सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ी तकरार
महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक मतभेद बढ़ते नजर आ रहे हैं।
भाजपा और केंद्र सरकार जहां इसे महिला सशक्तिकरण और लोकतांत्रिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं विपक्ष प्रक्रिया और संभावित प्रभावों को लेकर सवाल उठा रहा है।
आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद और राजनीतिक मंचों पर बड़ा विषय बन सकता है।
आगे की रणनीति पर सबकी नजर
अब नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण कानून को लेकर क्या कदम उठाती है। साथ ही यह भी देखना होगा कि विपक्ष की मांग के अनुसार सर्वदलीय बैठक आयोजित की जाती है या नहीं।
यदि संसद का विशेष सत्र बुलाया जाता है तो उसमें परिसीमन, महिला आरक्षण और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
फिलहाल किरेन रिजिजू के बयान ने संसद की संभावित बैठक और चुनावी राजनीति से जुड़े मुद्दों को लेकर नई बहस शुरू कर दी है।





