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ब्रिक्स समिट में भारत की तकनीकी ताकत का प्रदर्शन 37 डीप-टेक इनोवेशन बने आकर्षण

Kavita2
11 Sept 2026 3:57 PM IST
ब्रिक्स समिट में भारत की तकनीकी ताकत का प्रदर्शन 37 डीप-टेक इनोवेशन बने आकर्षण
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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमताओं का विशेष प्रदर्शन किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, भारत मंडपम में 11 से 12 सितंबर तक आयोजित ‘भारत इनोवेट्स एक्सपोजिशन’ में देश के 37 डीप-टेक इनोवेशन प्रदर्शित किए गए हैं। इस प्रदर्शनी में स्वच्छ ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवा, समुद्री सुरक्षा, रोबोटिक्स और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी से जुड़े अत्याधुनिक समाधान शामिल हैं।

प्रदर्शनी में शामिल नवाचारों का उद्देश्य केवल नई तकनीक दिखाना नहीं, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों में मौजूद वास्तविक समस्याओं के व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करना है। यहां जटिल जल निकायों के लिए विकसित उन्नत फ्लोटिंग सोलर पीवी प्लेटफॉर्म, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के निरीक्षण के लिए फुल-स्टैक मरीन रोबोटिक प्लेटफॉर्म, रेयर-अर्थ तत्वों के बिना तैयार ई-पावरट्रेन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग प्रणाली जैसे नवाचार प्रदर्शित किए जा रहे हैं।

अधिकारियों ने बताया कि एआई आधारित सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग तकनीक 60 सेकंड से भी कम समय में जोखिम का आकलन करने में सक्षम है। यह तकनीक महिलाओं के स्वास्थ्य के क्षेत्र में विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दूरदराज और संसाधन-विहीन क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकों तथा जांच सुविधाओं की कमी के कारण समय पर बीमारी की पहचान नहीं हो पाती। ऐसी स्थिति में तेजी से जोखिम का आकलन करने वाली तकनीक प्रारंभिक स्क्रीनिंग में मददगार बन सकती है।

हालांकि स्क्रीनिंग से प्राप्त परिणाम को अंतिम चिकित्सकीय निदान नहीं माना जाएगा। जोखिम की पहचान होने पर रोगी को विशेषज्ञ डॉक्टर और आवश्यक जांच के लिए भेजा जा सकता है। इस प्रकार एआई तकनीक स्वास्थ्यकर्मियों को अधिक लोगों तक स्क्रीनिंग सुविधा पहुंचाने और संदिग्ध मामलों की जल्द पहचान करने में सहायता दे सकती है।

फ्लोटिंग सोलर पीवी प्लेटफॉर्म भी प्रदर्शनी का प्रमुख आकर्षण है। इसे ऐसे जटिल जल निकायों के लिए तैयार किया गया है, जहां पारंपरिक तरीके से सौर पैनल लगाना कठिन होता है। जलाशयों, बांधों और अन्य बड़े जल क्षेत्रों की सतह का इस्तेमाल सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए करने से जमीन की आवश्यकता कम हो सकती है। यह तकनीक स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग में सहायक हो सकती है।

फ्लोटिंग सोलर प्रणाली के सामने तेज हवा, लहरों, जलस्तर में बदलाव और नमी जैसी चुनौतियां होती हैं। इन परिस्थितियों में प्लेटफॉर्म की स्थिरता और टिकाऊपन महत्वपूर्ण हो जाता है। प्रदर्शनी में पेश उन्नत प्रणाली को इन्हीं व्यावहारिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर विकसित किए जाने की जानकारी दी गई है। इसे देश की बढ़ती नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के लिए उपयोगी समाधान माना जा रहा है।

महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के निरीक्षण के लिए विकसित फुल-स्टैक मरीन रोबोटिक प्लेटफॉर्म भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। इसका उपयोग बंदरगाहों, समुद्री प्रतिष्ठानों, पुलों के पानी के भीतर स्थित हिस्सों और अन्य संवेदनशील ढांचों के निरीक्षण में किया जा सकता है। पारंपरिक निरीक्षण में गोताखोरों को जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में काम करना पड़ता है। रोबोटिक तकनीक इन कार्यों को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बना सकती है।

मरीन रोबोटिक प्लेटफॉर्म के जरिए पानी के भीतर से तस्वीरें, वीडियो और तकनीकी डेटा एकत्र किया जा सकता है। इससे किसी ढांचे में जंग, दरार, क्षति या अन्य खराबी की समय रहते पहचान संभव हो सकती है। समुद्री सुरक्षा और रखरखाव से जुड़े क्षेत्रों में ऐसी स्वदेशी तकनीक की उपयोगिता काफी व्यापक मानी जाती है।

रेयर-अर्थ फ्री ई-पावरट्रेन प्रदर्शनी में पेश किया गया एक अन्य महत्वपूर्ण इनोवेशन है। इलेक्ट्रिक वाहनों की मोटर और कई उन्नत उपकरणों में दुर्लभ खनिजों का इस्तेमाल होता है। इन खनिजों की आपूर्ति कुछ सीमित देशों पर निर्भर रहने से लागत और उपलब्धता की चुनौती पैदा हो सकती है। रेयर-अर्थ तत्वों पर निर्भरता कम करने वाली पावरट्रेन तकनीक भारत की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और विनिर्माण क्षमता को मजबूती दे सकती है।

इस प्रकार की तकनीक से इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग की आपूर्ति श्रृंखला को अधिक सुरक्षित बनाने में सहायता मिल सकती है। यदि इसे व्यावसायिक स्तर पर सफलतापूर्वक अपनाया जाता है तो आयात पर निर्भरता घटाने, उत्पादन लागत नियंत्रित करने और स्वदेशी विनिर्माण को प्रोत्साहन देने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है।

‘भारत इनोवेट्स एक्सपोजिशन’ में प्रदर्शित 37 तकनीकों के माध्यम से भारत अपने अनुसंधान संस्थानों, स्टार्टअप, वैज्ञानिकों और उद्यमियों की क्षमता दुनिया के सामने रख रहा है। ब्रिक्स जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच के दौरान यह आयोजन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सदस्य देशों के प्रतिनिधियों को भारतीय नवाचारों को सीधे देखने और उनके उपयोग की संभावनाओं को समझने का अवसर मिल रहा है।

अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शनी का मुख्य आकर्षण क्रिएशन हब फॉर एडवांस्ड नेशनल टेक्नोलॉजीज यानी ‘CHANT’ परियोजना है। लगभग 1200 करोड़ रुपये लागत वाली इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य भारतीय नवाचार व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण कमी को दूर करना है।

भारत में अनुसंधान और प्रयोगशाला स्तर पर बड़ी संख्या में तकनीकें विकसित होती हैं, लेकिन उनमें से कई व्यावसायिक उत्पादन तक नहीं पहुंच पातीं। प्रयोगशाला में सफल मॉडल को उद्योग के लिए तैयार उत्पाद में बदलने के दौरान वित्त, परीक्षण, प्रमाणन, डिजाइन और बड़े पैमाने पर उत्पादन जैसी चुनौतियां सामने आती हैं। इसे तकनीकी विकास की “लैब से मार्केट” वाली दूरी भी कहा जाता है।

CHANT परियोजना इसी अंतर को कम करने पर केंद्रित है। इसके माध्यम से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के टेक्नोलॉजी ट्रांसलेशन इंस्टीट्यूशंस को मजबूत किए जाने की योजना है। ये संस्थान नई तकनीकों को प्रयोगशाला से बाहर निकालकर उद्योग की जरूरत के अनुसार विकसित करने, परीक्षण करने और बाजार तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

परियोजना से शोधकर्ताओं, स्टार्टअप और उद्योग के बीच सहयोग बढ़ने की उम्मीद है। किसी तकनीक को व्यावसायिक रूप देने के लिए केवल वैज्ञानिक सफलता पर्याप्त नहीं होती। उत्पाद की लागत, सुरक्षा मानक, उपयोगकर्ता की जरूरत, पेटेंट, निर्माण क्षमता और बाजार की मांग जैसे पहलुओं पर भी काम करना पड़ता है। CHANT के तहत इन सभी क्षेत्रों में संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान आयोजित इस प्रदर्शनी से सदस्य देशों के बीच प्रौद्योगिकी साझेदारी की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं। स्वास्थ्य, ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन और समुद्री सुरक्षा जैसी चुनौतियां कई देशों के लिए समान हैं। भारत में विकसित कम लागत और बड़े पैमाने पर उपयोग योग्य तकनीकें अन्य विकासशील देशों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती हैं।

‘भारत इनोवेट्स एक्सपोजिशन’ भारत के उस प्रयास को रेखांकित करती है, जिसके तहत देश केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक समाधान तैयार करने वाला केंद्र बनना चाहता है। 37 डीप-टेक इनोवेशन और CHANT जैसी परियोजना से यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि भारतीय अनुसंधान को प्रयोगशाला से उद्योग एवं समाज तक पहुंचाने के लिए अब अधिक संगठित ढांचा तैयार किया जा रहा है।

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