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ई-केवाईसी नहीं कराने वाले गैस उपभोक्ताओं को झटका, अब कमर्शियल दर पर मिल सकता है सिलेंडर

Kavita2
2 Oct 2026 5:01 PM IST
ई-केवाईसी नहीं कराने वाले गैस उपभोक्ताओं को झटका, अब कमर्शियल दर पर मिल सकता है सिलेंडर
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नई दिल्ली। गैस कनेक्शन धारकों के लिए ई-केवाईसी की निर्धारित अंतिम तिथि समाप्त हो चुकी है, लेकिन जनपद में अभी भी करीब 10 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने अपनी ई-केवाईसी पूरी नहीं कराई है। निर्धारित समय के भीतर प्रक्रिया पूरी नहीं करने वाले इन उपभोक्ताओं को अब घरेलू दर के बजाय कमर्शियल दर पर गैस सिलेंडर लेना पड़ सकता है। जिले में करीब 3.88 लाख पंजीकृत गैस उपभोक्ता हैं, जिनमें लगभग 90 प्रतिशत ने ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी कर ली है।

जनपद में करीब 23 गैस एजेंसियां संचालित हैं। इन एजेंसियों के माध्यम से लगभग 3.88 लाख उपभोक्ताओं को एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति की जाती है। केंद्र सरकार की ओर से गैस कनेक्शन धारकों के लिए ई-केवाईसी कराने के निर्देश दिए गए थे। इसके लिए 30 सितंबर तक का समय निर्धारित किया गया था। उपभोक्ताओं को तय समय के भीतर अपनी पहचान से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहा गया था।

गैस एजेंसियों की ओर से लगातार उपभोक्ताओं को ई-केवाईसी कराने के लिए जागरूक किया गया। इसके बावजूद निर्धारित समय सीमा समाप्त होने तक सभी उपभोक्ताओं की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। आंकड़ों के अनुसार, करीब 90 प्रतिशत गैस कनेक्शन धारकों ने अपनी ई-केवाईसी पूरी कर ली है, जबकि लगभग 10 प्रतिशत उपभोक्ता अब भी इससे बाकी हैं।

3.88 लाख पंजीकृत उपभोक्ताओं के हिसाब से देखें तो करीब 38 हजार से अधिक गैस कनेक्शन धारक ई-केवाईसी से बाकी हो सकते हैं। ऐसे उपभोक्ताओं के लिए अब परेशानी बढ़ सकती है। निर्धारित समय के भीतर ई-केवाईसी पूरी नहीं होने पर उन्हें घरेलू गैस सिलेंडर सामान्य घरेलू दर पर मिलने में समस्या आ सकती है और कमर्शियल दर के अनुसार भुगतान करना पड़ सकता है।

इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड के सेल्स मैनेजर दीपक राना ने बताया कि आईओसीएल के 87.20 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी कर ली है। इसका मतलब है कि कंपनी से जुड़े कुछ उपभोक्ताओं की प्रक्रिया अभी बाकी है। अंतिम तिथि से पहले अधिक से अधिक लोगों की ई-केवाईसी कराने के लिए प्रयास किए गए थे।

ई-केवाईसी का उद्देश्य गैस कनेक्शन से जुड़े उपभोक्ताओं की पहचान को सत्यापित करना है। इसके जरिए यह सुनिश्चित किया जाता है कि गैस कनेक्शन जिस व्यक्ति के नाम पर पंजीकृत है, उसकी जानकारी रिकॉर्ड में सही और अपडेट है। इसी वजह से सभी कनेक्शन धारकों को निर्धारित समय में प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए थे।

हालांकि लगातार जागरूकता और गैस एजेंसियों के प्रयासों के बावजूद जिले में शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल नहीं हो पाया। करीब 10 प्रतिशत उपभोक्ताओं की ई-केवाईसी बाकी रह जाने के बाद अब ऐसे कनेक्शन धारकों के सामने अतिरिक्त आर्थिक बोझ की स्थिति बन सकती है। घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में अंतर होने के कारण इसका सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा।

जिले में बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं जो नियमित रूप से घरेलू एलपीजी सिलेंडर का इस्तेमाल करते हैं। ई-केवाईसी पूरी नहीं कराने वाले परिवारों को यदि कमर्शियल दर पर सिलेंडर लेना पड़ा तो उनका घरेलू बजट प्रभावित हो सकता है। यही कारण है कि ई-केवाईसी से जुड़ी प्रक्रिया को लेकर गैस एजेंसियां लगातार उपभोक्ताओं को जानकारी देती रही हैं।

ई-केवाईसी की समय सीमा 30 सितंबर निर्धारित की गई थी। अंतिम दिनों में गैस एजेंसियों पर प्रक्रिया पूरी कराने वाले उपभोक्ताओं की संख्या भी बढ़ी, लेकिन इसके बाद भी करीब 10 प्रतिशत लोग निर्धारित समय के भीतर ई-केवाईसी नहीं करा सके। इसके पीछे अलग-अलग कारण हो सकते हैं, लेकिन अब इन उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर लेते समय नई व्यवस्था का सामना करना पड़ सकता है।

आईओसीएल के आंकड़ों में भी ई-केवाईसी पूरी नहीं कराने वाले उपभोक्ताओं की संख्या दिखाई दे रही है। कंपनी के 87.20 प्रतिशत उपभोक्ताओं की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि बाकी उपभोक्ताओं का सत्यापन अभी लंबित है। दूसरी गैस कंपनियों और एजेंसियों के उपभोक्ताओं को मिलाकर पूरे जिले में ई-केवाईसी पूरा करने वालों का आंकड़ा करीब 90 प्रतिशत बताया गया है।

गैस कनेक्शन से संबंधित रिकॉर्ड को अपडेट रखने के लिए ई-केवाईसी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उपभोक्ता की पहचान और कनेक्शन की वास्तविक स्थिति की पुष्टि होने से रिकॉर्ड में मौजूद गलत या पुराने विवरण को भी चिन्हित करने में मदद मिलती है। केंद्र सरकार की ओर से इसी प्रक्रिया को पूरा कराने के लिए अंतिम तारीख निर्धारित की गई थी।

जिले में 23 गैस एजेंसियों के माध्यम से लाखों उपभोक्ताओं तक सिलेंडर पहुंचाए जाते हैं। ऐसे में सभी उपभोक्ताओं की ई-केवाईसी पूरी कराना बड़ा अभियान रहा। गैस एजेंसियों ने अपने स्तर पर उपभोक्ताओं तक सूचना पहुंचाने और प्रक्रिया पूरी कराने की कोशिश की। इसके बाद भी करीब हर 10 में से एक उपभोक्ता की ई-केवाईसी निर्धारित समय तक पूरी नहीं हो पाई।

अब सबसे ज्यादा चिंता उन उपभोक्ताओं को है जिनकी ई-केवाईसी लंबित है। उन्हें घरेलू सिलेंडर के लिए कमर्शियल दर चुकानी पड़ सकती है। इससे सिलेंडर पर होने वाला खर्च बढ़ जाएगा। ऐसे में जिन उपभोक्ताओं ने अब तक ई-केवाईसी नहीं कराई है, उनके लिए आगे गैस कनेक्शन और सिलेंडर की दर से संबंधित नियम महत्वपूर्ण होंगे।

फिलहाल जिले में करीब 90 प्रतिशत गैस उपभोक्ता ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं। वहीं शेष करीब 10 प्रतिशत उपभोक्ताओं के लिए समय सीमा खत्म होने के बाद स्थिति बदल गई है। आने वाले दिनों में गैस एजेंसियों पर ऐसे उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ सकती है, जो लंबित ई-केवाईसी और घरेलू सिलेंडर की दर से संबंधित जानकारी लेने पहुंचेंगे।

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