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शिवराज सिंह चौहान ने दिल्ली में सरस आजीविका फूड फेस्टिवल का किया शुभारंभ

SHIDDHANT
1 Dec 2025 10:26 PM IST
शिवराज सिंह चौहान ने दिल्ली में सरस आजीविका फूड फेस्टिवल का किया शुभारंभ
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Delhi दिल्ली: केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को सरस आजीविका फूड फेस्टिवल 2025 का उद्घाटन किया। इस अवसर पर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी भी मौजूद रहीं। यह आयोजन नई दिल्ली स्थित सुंदर नर्सरी, भारत स्काउट्स एंड गाइड्स मार्ग, निजामुद्दीन में आयोजित किया गया। उद्घाटन समारोह में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि लखपति बहनों ने अपनी मेहनत और कर्मठता से विकास और समृद्धि की एक नई कहानी लिखी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का महिलाओं के विकास का संकल्प और केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की पहल के कारण अब कोई दीदी गरीब नहीं रहेगी, बल्कि अपने हुनर और परिश्रम के बल पर आगे बढ़ेगी।
शिवराज सिंह चौहान ने फूड फेस्टिवल में हर प्रांत के व्यंजनों का महत्व बताते हुए कहा कि भारत की विविध संस्कृति और परंपराएं हमारे भोजन में झलकती हैं। उन्होंने आम जनता को इस आयोजन में आने और देशभर की व्यंजनों का स्वाद लेने का निमंत्रण दिया। सरस आजीविका फूड फेस्टिवल राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं, विशेषकर सैकड़ों लखपति दीदियों को आर्थिक पहचान और बाजार उपलब्ध कराने वाला मजबूत मंच है। इसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना, स्वरोजगार के अवसर देना और अन्य महिलाओं को प्रेरित करना है।
फूड फेस्टिवल में 25 राज्यों से आई महिलाएं 62 स्टॉलों के माध्यम से 500 से अधिक पारंपरिक और स्वादिष्ट व्यंजन पेश कर रही हैं। यह फेस्टिवल 9 दिसंबर तक प्रतिदिन सुबह 11.30 बजे से रात 9.30 बजे तक आम जनता के लिए खुला रहेगा। फेस्टिवल में पेश किए जाने वाले व्यंजनों में हिमाचली सीडडू, उत्तराखंड की तंदूर चाय, जम्मू-कश्मीर का कलारी कुल्चा, हैदराबादी दम बिरयानी, नॉर्थ ईस्टर्न मोमो, बंगाली फ्राइड मछली, राजस्थान की कैर सागरी, गट्टे की सब्ज़ी, बाजरे की रोटी, तेलंगाना का चिकन, केरल की मालाबार बिरयानी, बिहार का लिट्टी-चोखा और पंजाब का सरसों का साग-मक्के की रोटी शामिल हैं।
फूड स्टॉलों के साथ-साथ प्राकृतिक और ग्रामीण उत्पादों के स्टॉल भी लगाए गए हैं, जिससे आगंतुक ग्रामीण अर्थव्यवस्था, सांस्कृतिक विविधता और महिलाओं के नेतृत्व वाली आजीविका मॉडल से परिचित हो रहे हैं। यह फेस्टिवल ग्रामीण भारत की समृद्ध परंपराओं, आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण को सामने लाने वाला प्रभावी मंच साबित हो रहा है।
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