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शहजाद पूनावाला ने बताया बीजेपी छोड़ने का कारण, बोले आर्थिक दबाव के चलते लिया फैसला

Kavita2
19 Aug 2026 9:50 AM IST
शहजाद पूनावाला ने बताया बीजेपी छोड़ने का कारण, बोले आर्थिक दबाव के चलते लिया फैसला
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नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने पार्टी छोड़ने के अपने फैसले को लेकर खुलकर बात की है। उन्होंने बताया कि उनका यह निर्णय राजनीतिक विचारधारा या पार्टी के प्रति प्रतिबद्धता में कमी के कारण नहीं लिया गया, बल्कि व्यक्तिगत और आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाना पड़ा।

शहजाद पूनावाला ने कहा कि लंबे समय तक पूर्णकालिक राजनीति में सक्रिय रहने के कारण उनके सामने आर्थिक चुनौतियां बढ़ती जा रही थीं। बढ़ते रहन-सहन के खर्च, रोजमर्रा की जरूरतों और बुनियादी जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए उन्हें आय के अन्य साधनों की जरूरत महसूस हुई। लेकिन राजनीति में पूरी तरह व्यस्त रहने के कारण वह किसी अन्य आय स्रोत पर ध्यान नहीं दे पा रहे थे।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में सक्रिय होना एक बड़ी जिम्मेदारी है, लेकिन इसके साथ व्यक्तिगत जीवन की आर्थिक जरूरतों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीतिक पद या पहचान होने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति अपनी निजी आर्थिक जिम्मेदारियों से मुक्त हो जाता है।

पूनावाला ने बताया कि किराया, दैनिक खर्च और अन्य जरूरी जरूरतों को पूरा करना भी हर व्यक्ति की तरह उनके लिए जरूरी था। उन्होंने कहा कि उनकी राजनीतिक भूमिका उन्हें इन बुनियादी खर्चों से अलग नहीं करती थी। इसी वजह से उन्होंने व्यावहारिक सोच के आधार पर अपना फैसला लिया।

बीजेपी छोड़ने के उनके फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। हालांकि, पूनावाला ने साफ किया कि यह कदम किसी नाराजगी या राजनीतिक मतभेद के कारण नहीं उठाया गया। उन्होंने कहा कि राजनीति के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पहले की तरह बनी हुई है।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पूर्णकालिक राजनीति में रहने वाले कई लोगों के सामने ऐसी चुनौतियां आती हैं। सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहने के दौरान व्यक्ति को कई बार व्यक्तिगत और आर्थिक संतुलन बनाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

शहजाद पूनावाला बीजेपी में राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर सक्रिय रहे हैं और टीवी डिबेट्स समेत कई मंचों पर पार्टी का पक्ष रखते रहे हैं। वह राजनीतिक मुद्दों पर अपनी बेबाक राय के लिए जाने जाते हैं। पार्टी में रहते हुए उन्होंने विपक्षी दलों पर कई मुद्दों को लेकर निशाना साधा था।

उन्होंने कहा कि राजनीति उनके लिए हमेशा से सेवा और विचारों से जुड़ा क्षेत्र रहा है। लेकिन किसी भी व्यक्ति को अपने परिवार और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा के बारे में भी सोचना पड़ता है। इसी संतुलन को ध्यान में रखते हुए उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला किया।

पूनावाला के इस बयान के बाद एक बार फिर पूर्णकालिक राजनीति करने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं की आर्थिक स्थिति को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। आमतौर पर बड़े नेताओं को मिलने वाली सुविधाओं के अलावा बड़ी संख्या में राजनीतिक कार्यकर्ता बिना किसी निश्चित आय के लंबे समय तक सक्रिय रहते हैं।

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी दल में सक्रिय कार्यकर्ताओं और प्रवक्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, लेकिन उनके लिए आर्थिक स्थिरता भी एक अहम मुद्दा है। कई बार यही कारण होता है कि लोग राजनीति के साथ अन्य काम करने की कोशिश करते हैं।

शहजाद पूनावाला ने अपने फैसले को व्यक्तिगत परिस्थिति से जुड़ा बताया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी छोड़ने का मतलब राजनीतिक जीवन से दूरी बनाना नहीं है। वह आगे भी सार्वजनिक मुद्दों पर अपनी राय रखते रहेंगे।

फिलहाल उनके बयान ने राजनीतिक क्षेत्र में एक अलग तरह की चर्चा को जन्म दिया है। जहां एक ओर उनके समर्थक इसे एक व्यावहारिक निर्णय बता रहे हैं, वहीं राजनीतिक विश्लेषक इसे पूर्णकालिक राजनीति में आर्थिक चुनौतियों के उदाहरण के तौर पर देख रहे हैं।

पूनावाला का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को अपने जीवन की वास्तविक परिस्थितियों के आधार पर फैसले लेने पड़ते हैं। उन्होंने आर्थिक दबाव और बढ़ते खर्चों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया और इसे राजनीति के प्रति अपनी निष्ठा से अलग बताया।

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