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शक्ति इंजन उत्पादन को मिलेगी रफ्तार दूसरी प्रोडक्शन लाइन का ऐलान
Ratna Netam
6 Oct 2026 7:50 PM IST

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नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को एयरोस्पेस क्षेत्र में भारत की बढ़ती स्वदेशी क्षमताओं की सराहना करते हुए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) कोरापुट की महत्वपूर्ण उपलब्धि को देश की एयरोस्पेस यात्रा का अहम पड़ाव बताया। इस दौरान HAL कोरापुट ने अपना 2,000वां एयरो-इंजन सौंपा। इसके साथ ही शक्ति इंजन के लिए दूसरी प्रोडक्शन लाइन शुरू करने की घोषणा भी की गई।रक्षा मंत्रालय के अनुसार, राजनाथ सिंह ने 6 अक्टूबर को HAL कोरापुट की अपनी यात्रा के दौरान 2,000वें एयरो-इंजन की डिलीवरी देखी। इस अवसर पर उन्होंने शक्ति इंजन के लिए दूसरी प्रोडक्शन लाइन की घोषणा की और देश में एयरोस्पेस प्रोपल्शन से जुड़ी स्वदेशी क्षमताओं को और मजबूत करने पर जोर दिया।
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत को एयरोस्पेस क्षेत्र में डिजाइन से लेकर डेवलपमेंट, टेस्टिंग, मैन्युफैक्चरिंग और मेंटेनेंस, रिपेयर एवं ओवरहॉल यानी MRO तक अपनी घरेलू क्षमताओं को मजबूत करना होगा। उन्होंने कहा कि रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए केवल निर्माण ही नहीं, बल्कि तकनीक और अनुसंधान के पूरे इकोसिस्टम को मजबूत करना जरूरी है।रक्षा मंत्रालय ने बताया कि राजनाथ सिंह ने HAL कोरापुट द्वारा 2,000वें एयरो-इंजन की डिलीवरी को भारतीय एयरोस्पेस सेक्टर के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारत की तकनीकी क्षमता, इंजीनियरिंग दक्षता और स्वदेशी रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में हो रही प्रगति को दर्शाती है।
HAL कोरापुट लंबे समय से एयरो-इंजन उत्पादन और उससे जुड़ी तकनीकी गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। 2,000वें एयरो-इंजन की डिलीवरी इस इकाई की उत्पादन क्षमता और लंबे अनुभव का संकेत है। रक्षा मंत्री की मौजूदगी में यह उपलब्धि हासिल होना देश के एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।इस मौके पर शक्ति इंजन के लिए दूसरी प्रोडक्शन लाइन की घोषणा भी विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही। दूसरी उत्पादन लाइन शुरू होने से शक्ति इंजन के निर्माण की क्षमता बढ़ाने और मांग के अनुसार उत्पादन में तेजी लाने में मदद मिलने की उम्मीद है। इससे घरेलू स्तर पर एयरो-इंजन निर्माण व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में भी सहयोग मिलेगा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस अवसर पर स्वदेशी एयरोस्पेस प्रोपल्शन इकोसिस्टम विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रयास में केवल बड़ी रक्षा कंपनियों तक सीमित रहने के बजाय MSME, स्टार्ट-अप, निजी उद्योग, शैक्षणिक संस्थानों और रिसर्च संस्थानों को भी सक्रिय रूप से शामिल किया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि मजबूत एयरोस्पेस इकोसिस्टम तभी तैयार होगा, जब अलग-अलग क्षेत्रों की विशेषज्ञता को एक मंच पर लाकर नवाचार, अनुसंधान और उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे नई तकनीकों के विकास के साथ-साथ देश में रक्षा उत्पादन से जुड़े रोजगार और औद्योगिक अवसर भी बढ़ सकते हैं।
राजनाथ सिंह ने डिजाइन और डेवलपमेंट के क्षेत्र में स्वदेशी प्रयासों को बढ़ाने पर खास जोर दिया। उनका कहना था कि भारत को महत्वपूर्ण रक्षा तकनीकों के लिए बाहरी निर्भरता कम करते हुए घरेलू क्षमताओं को विकसित करना चाहिए। इसके लिए टेस्टिंग सुविधाओं, मैन्युफैक्चरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और MRO क्षमताओं को भी लगातार विस्तार देने की आवश्यकता है।एयरो-इंजन किसी भी आधुनिक विमानन और रक्षा प्रणाली का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। ऐसे में देश में इंजन निर्माण से जुड़ी तकनीक और उत्पादन क्षमता का विस्तार रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। HAL कोरापुट की उपलब्धि और शक्ति इंजन की दूसरी प्रोडक्शन लाइन की घोषणा इसी दिशा में एक अहम कदम है।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, सरकार स्वदेशी रक्षा उत्पादन और तकनीकी आत्मनिर्भरता को लगातार बढ़ावा दे रही है। विभिन्न रक्षा परियोजनाओं में घरेलू कंपनियों, MSME और स्टार्ट-अप की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। एयरोस्पेस सेक्टर में भी इसी मॉडल को आगे बढ़ाने की तैयारी है।राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत को ऐसा मजबूत एयरोस्पेस प्रोपल्शन इकोसिस्टम तैयार करना होगा, जिसमें उद्योग, अनुसंधान संस्थान और शैक्षणिक संस्थान मिलकर काम करें। इससे नई तकनीकों के विकास की गति तेज होगी और देश की दीर्घकालिक रक्षा जरूरतों को घरेलू स्तर पर पूरा करने की क्षमता बढ़ेगी।HAL कोरापुट द्वारा 2,000वें एयरो-इंजन की डिलीवरी और शक्ति इंजन के लिए दूसरी प्रोडक्शन लाइन की घोषणा ने भारत के स्वदेशी एयरोस्पेस कार्यक्रम को नई मजबूती दी है। रक्षा मंत्री ने इसे देश की एयरोस्पेस यात्रा में महत्वपूर्ण पड़ाव बताते हुए भविष्य में डिजाइन, अनुसंधान, निर्माण और रखरखाव के हर स्तर पर स्वदेशी क्षमताओं के विस्तार का आह्वान किया।
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