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शाही जामा मस्जिद सर्वे केस: मुस्लिम पक्ष की बहस पूरी, आगे होगी सुनवाई

नई दिल्ली : संभल की शाही जामा मस्जिद के कोर्ट कमिश्नर सर्वे को लेकर चल रहे विवाद पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। मामले में मुस्लिम पक्ष की ओर से अदालत के सामने अपनी दलीलें रखी गईं। हालांकि, सुनवाई पूरी नहीं हो सकी, जिसके बाद सर्वोच्च अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 4 अगस्त की तारीख तय कर दी है। अगली सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष की ओर से अपनी दलीलें पेश की जाएंगी।
यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने से जुड़ा हुआ है, जिसमें संभल की शाही जामा मस्जिद का कोर्ट कमिश्नर के माध्यम से सर्वे कराने के निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा गया था। मुस्लिम पक्ष ने हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और निचली अदालत के सर्वे आदेश पर सवाल उठाए हैं।
मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपनी बात रखी। उन्होंने तर्क दिया कि सिविल कोर्ट द्वारा कोर्ट कमिश्नर नियुक्त कर मस्जिद के सर्वे का आदेश देना उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि निचली अदालत ने जिस प्रक्रिया के तहत सर्वे का आदेश दिया, वह कानूनी प्रावधानों के अनुरूप नहीं है।
मुस्लिम पक्ष की ओर से अदालत में यह दलील दी गई कि किसी धार्मिक स्थल से जुड़े मामले में इस तरह का सर्वे कराने का आदेश देना गंभीर विषय है और इसके लिए अदालत के अधिकार क्षेत्र और कानूनी सीमाओं को ध्यान में रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि निचली अदालत के आदेश को सही नहीं माना जा सकता, क्योंकि उनके अनुसार ऐसा आदेश जारी करने का अधिकार अदालत के पास नहीं था।
मुस्लिम पक्ष ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को भी चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि हाईकोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखते समय उन कानूनी पहलुओं पर पर्याप्त विचार नहीं किया, जिनका इस मामले में महत्व है।
वहीं, इस मामले में हिंदू पक्ष भी अपनी दलीलें सुप्रीम कोर्ट के सामने रखेगा। अदालत ने अगली सुनवाई 4 अगस्त को निर्धारित की है, जिसमें हिंदू पक्ष की ओर से अपना पक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद ही मामले में आगे की सुनवाई की दिशा स्पष्ट होगी।
बता दें कि संभल की शाही जामा मस्जिद के सर्वे को लेकर विवाद उस समय सामने आया था, जब निचली अदालत ने कोर्ट कमिश्नर के माध्यम से मस्जिद परिसर का सर्वे कराने का आदेश दिया था। इस आदेश के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया और इसके खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने कानूनी रास्ता अपनाया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा था, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। अब सर्वोच्च अदालत में दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर मामले की सुनवाई आगे बढ़ रही है।
इस मामले को लेकर दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग कानूनी तर्क दिए जा रहे हैं। जहां मुस्लिम पक्ष सर्वे आदेश के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठा रहा है, वहीं हिंदू पक्ष अपनी ओर से मामले के विभिन्न पहलुओं को अदालत के सामने रखेगा।
सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि 4 अगस्त को हिंदू पक्ष की दलीलों के बाद मामले की आगे की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण दिशा तय हो सकती है। फिलहाल अदालत ने दोनों पक्षों को सुनवाई का अवसर देते हुए मामले को आगे के लिए सुरक्षित रखा है।





