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दिल्ली दंगा केस में शादाब अहमद को सुप्रीम कोर्ट से झटका

Ratna Netam
26 Oct 2026 2:17 PM IST
दिल्ली दंगा केस में शादाब अहमद को सुप्रीम कोर्ट से झटका
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नई दिल्ली। वर्ष 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों से जुड़े एक मामले में आरोपी शादाब अहमद को सुप्रीम कोर्ट से जमानत की शर्तों में राहत नहीं मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने आरोपी की ओर से जमानत की शर्तों में ढील देने की मांग स्वीकार करने से इनकार कर दिया। अदालत ने शादाब अहमद को अपनी मांग लेकर संबंधित ट्रायल कोर्ट जाने को कहा है। इस फैसले के बाद अब आरोपी को जमानत की शर्तों में किसी भी प्रकार के बदलाव के लिए निचली अदालत के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करना होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट जाने को कहा
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की जमानत शर्तों में बदलाव करने के बजाय उसे संबंधित ट्रायल कोर्ट का रुख करने को कहा। अदालत के इस रुख से स्पष्ट है कि आरोपी को अपनी परिस्थितियों और राहत की आवश्यकता से जुड़े तथ्यों को निचली अदालत के समक्ष रखना होगा।जमानत की शर्तों में बदलाव से संबंधित मामलों में अदालतें आरोपी के अधिकारों के साथ-साथ मुकदमे की निष्पक्ष सुनवाई और न्यायिक प्रक्रिया को भी ध्यान में रखती हैं। हालांकि, शादाब अहमद की किन विशेष शर्तों में ढील मांगी गई थी, इसका विस्तृत विवरण उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं है।
जमानत मिलने के बाद भी शर्तों का पालन जरूरी
किसी आपराधिक मामले में आरोपी को जमानत मिलने का अर्थ यह नहीं होता कि वह सभी कानूनी प्रतिबंधों से मुक्त हो गया है। अदालत जमानत देते समय कई तरह की शर्तें निर्धारित कर सकती है। इनमें जांच और सुनवाई में सहयोग करना, निर्धारित तारीखों पर अदालत में उपस्थित होना तथा गवाहों को प्रभावित नहीं करना जैसी शर्तें शामिल हो सकती हैं।किसी आरोपी को यदि इन शर्तों के पालन में व्यावहारिक कठिनाई होती है, तो वह सक्षम अदालत के समक्ष संशोधन के लिए आवेदन कर सकता है। अदालत मामले की परिस्थितियों और संबंधित पक्षों की दलीलों के आधार पर फैसला करती है।शादाब अहमद के मामले में भी अब आगे की प्रक्रिया ट्रायल कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किए जाने वाले आवेदन पर निर्भर करेगी।
फरवरी 2020 में दिल्ली में भड़की थी हिंसा
गौरतलब है कि फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन और विरोध को लेकर तनाव के बीच हिंसा भड़क गई थी। इस दौरान कई स्थानों पर पथराव, आगजनी, तोड़फोड़ और हिंसक झड़पों की घटनाएं सामने आई थीं।इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी, जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए थे। हिंसा के दौरान सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को भी भारी नुकसान पहुंचा था। कई दुकानों, मकानों और वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया था।दिल्ली पुलिस ने दंगों से संबंधित विभिन्न घटनाओं में कई प्राथमिकी दर्ज की थीं। इन मामलों में अलग-अलग आरोपियों के खिलाफ जांच की गई और अदालतों में आरोपपत्र दाखिल किए गए।
कई मामलों में जारी है न्यायिक प्रक्रिया
दिल्ली दंगों से जुड़े विभिन्न मामलों में अदालतों में सुनवाई और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं जारी रही हैं। कुछ मामलों में आरोपियों को जमानत मिली है, जबकि अन्य मामलों में जमानत याचिकाओं और मुकदमे से संबंधित आवेदनों पर न्यायालयों ने अलग-अलग आदेश दिए हैं।कानूनी दृष्टि से प्रत्येक आरोपी के मामले का मूल्यांकन उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित परिस्थितियों के आधार पर किया जाता है। किसी आरोपी को जमानत मिलना या उसकी शर्तों में बदलाव से इनकार किया जाना उसके दोषी या निर्दोष होने का अंतिम फैसला नहीं माना जाता।
अब ट्रायल कोर्ट के फैसले पर नजर
सुप्रीम कोर्ट के ताजा रुख के बाद शादाब अहमद के पास संबंधित ट्रायल कोर्ट में आवेदन करने का विकल्प है। यदि आरोपी की ओर से आवेदन दाखिल किया जाता है, तो अदालत उसकी मांग और संबंधित पक्षों की दलीलों पर विचार कर सकती है।फिलहाल सर्वोच्च न्यायालय ने जमानत शर्तों में सीधे ढील देने से इनकार किया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आरोपी निचली अदालत में किस आधार पर राहत मांगता है और अदालत उस पर क्या निर्णय देती है।
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