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- चेक बाउंस केस में...

नई दिल्ली। चेक बाउंस मामले में बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव की कानूनी मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मामले की सुनवाई करते हुए अभिनेता को सरेंडर से छूट पाने के लिए पांच करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह रकम सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा करने को कहा है।
शीर्ष अदालत के इस निर्देश के बाद अब राजपाल यादव को सरेंडर से राहत हासिल करने के लिए निर्धारित शर्त पूरी करनी होगी। पांच करोड़ रुपये जमा करने के बाद ही उन्हें इस संबंध में राहत मिल सकेगी। मामला लंबे समय से अदालत में चल रहा है और इससे जुड़े वित्तीय विवाद को लेकर अभिनेता को पहले भी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा है।
सुप्रीम कोर्ट ने रखी पांच करोड़ की शर्त
मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव की ओर से मांगी गई राहत पर विचार किया। अदालत ने कहा कि सरेंडर से छूट की मांग के लिए उन्हें पांच करोड़ रुपये रजिस्ट्री में जमा करने होंगे।
अदालत के निर्देश के बाद अब अभिनेता की ओर से उठाए जाने वाले अगले कदम पर नजर है। यदि वह निर्धारित रकम जमा करते हैं तो उन्हें सरेंडर से संबंधित राहत मिल सकती है। हालांकि मामले की मूल कानूनी कार्यवाही अलग से जारी रहेगी।
लंबे समय से चल रहा चेक बाउंस विवाद
राजपाल यादव का चेक बाउंस से जुड़ा मामला काफी समय से अदालत में चल रहा है। वित्तीय लेन-देन से जुड़े विवाद में जारी किए गए चेक के बाउंस होने के बाद मामला कानूनी प्रक्रिया तक पहुंचा था।
चेक बाउंस के मामलों में संबंधित पक्ष द्वारा भुगतान नहीं किए जाने पर निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत कार्रवाई की जा सकती है। राजपाल यादव से जुड़े मामले में भी अलग-अलग स्तरों पर सुनवाई होती रही है।
सरेंडर से राहत की मांग
अभिनेता की ओर से सुप्रीम कोर्ट के सामने सरेंडर से राहत की मांग रखी गई थी। इस पर अदालत ने राहत को बिना शर्त स्वीकार करने के बजाय पांच करोड़ रुपये जमा करने की शर्त रखी।
इस निर्देश को मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इतनी बड़ी राशि जमा करने की शर्त पूरी करने के बाद ही अभिनेता को तत्काल राहत का रास्ता मिल सकेगा।
पहले भी कानूनी मुश्किलों का कर चुके हैं सामना
राजपाल यादव इससे पहले भी वित्तीय विवादों से जुड़े मामलों में अदालतों का सामना कर चुके हैं। चेक बाउंस विवाद के कारण उन्हें कई बार अदालत में पेश होना पड़ा है।
अब मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने के बाद अभिनेता को पांच करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश मिला है। इस आदेश ने एक बार फिर उनके वित्तीय विवाद को चर्चा में ला दिया है।
क्या होता है चेक बाउंस मामला
किसी व्यक्ति द्वारा जारी किया गया चेक बैंक में भुगतान के लिए प्रस्तुत किए जाने पर पर्याप्त राशि नहीं होने या कुछ अन्य निर्धारित कारणों से अस्वीकार हो जाता है तो इसे आमतौर पर चेक बाउंस कहा जाता है।
ऐसे मामलों में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत भुगतान की मांग की जाती है। भुगतान नहीं होने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ अदालत में मामला दायर किया जा सकता है। कानून में इसके लिए जुर्माने और सजा का भी प्रावधान है, हालांकि प्रत्येक मामले का फैसला उसके तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर होता है।
कोर्ट के अगले कदम पर नजर
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब यह देखना होगा कि राजपाल यादव पांच करोड़ रुपये कब तक जमा करते हैं और मामले में आगे अदालत क्या फैसला करती है।
यदि निर्धारित शर्त पूरी की जाती है तो सरेंडर से राहत के संबंध में अभिनेता की स्थिति बदल सकती है। वहीं, शर्त पूरी नहीं होने की स्थिति में उन्हें आगे कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ सकता है।
फिल्मी करियर के बीच कानूनी विवाद
राजपाल यादव हिंदी फिल्म जगत के लोकप्रिय हास्य अभिनेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने अपने लंबे फिल्मी करियर में कई चर्चित फिल्मों में काम किया है और अपनी कॉमिक टाइमिंग से अलग पहचान बनाई है।
हालांकि पिछले कुछ वर्षों में वह वित्तीय और कानूनी विवादों को लेकर भी सुर्खियों में रहे हैं। चेक बाउंस का यह मामला भी उन्हीं विवादों में शामिल है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के मंगलवार के निर्देश के बाद राजपाल यादव की मुश्किलें बरकरार हैं। उन्हें सरेंडर से छूट हासिल करने के लिए पांच करोड़ रुपये कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा करने होंगे। अब सभी की नजर अभिनेता की ओर से इस शर्त को पूरा करने और मामले में होने वाली अगली सुनवाई पर रहेगी।





