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गीता कालोनी के सीनियर सिटीजन ने पुलिस के साथ मिलकर चीनी मांझा ना खरीदने के लिये चलाया अभियान

Admin Delhi 1
10 Aug 2022 11:39 AM IST
गीता कालोनी के सीनियर सिटीजन ने पुलिस के साथ मिलकर चीनी मांझा ना खरीदने के लिये चलाया अभियान
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दिल्ली न्यूज़: पूर्वी दिल्ली के गीता कालोनी के सीनियर सिटीजन ने पुलिस के साथ मिल कर चीनी मांझे की खरीद व बिक्री के खिलाफ अभियान चलाया है। यह लोग पुलिस अधिकारियों के साथ पतंग विक्रेताओं की दुकानों पर जाकर उन्हे चीनी मांझे से हुए हादसों के बारे मे बता कर उन्हे चीनी प्रतिबंधित मांझा ना बेचने के बारे में जागरूक करने के साथ ही मांझा बेचते पकड़े जाने पर होने वाली कानूनी कार्रवाई व सजा के प्रावधानों से भी अवगत करवा रहे हैं। यही नहीं इलाके के युवओं को भी चीनी मांझा ना खरीदने के लिये सचेत कर रहे हैं। वरिष्ठ नागरिक एसोसिएशन के सदस्य 76 वर्षिय सरदार जोगिंदर सिंह कहते हैं कि 2017 में चीनी मांझे को प्रतिबंधित किये जाने के बाद भी राजधानी में चीनी मांझा से गला कटने की दर्जनों घटनाएं सामने आ रही हैं। सीनियर सिटीजन एसोसिएशन के सदस्य दिल्ली पुलिस के साथ मिल कर लोगों और दुकानदारों से अपील कर रही है कि चीनी मांझे की खरीद व बिक्री ना करें। यह मांझा इंसानों और पक्षियों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है।

71 वर्षिय सूरज प्रकाश वैद ने बताया कि सीनियर सिटीजन एसो. ने मांझे से होने वाले हादसों की खबरों की कटिंग लगा कर कई पोस्टर तैयार किये हैं। एसोसिएशन के लोग पुलिस अधिकारियों के साथ पतंग दुकानों पर जाकर दुकानदारों को वह पोस्टर दिखा कर मांझे से हुए हदसों के बारे में बताते हैं कि कितने लोग मांझे के कारण हादसे का शिकार हो अपनी जान गंवा चुके हैं व घायल हो चुके हैं। उन्होने बताया कि सीनियर सटिीजन गांधी नगर, चांद मौहल्ला, गीता कालोनी, होज काजी इलाकों में पतंग दुकानदारों के बीच जाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं, अभी सीलमपुर व जाफराबाद पतंग बाजार में जाएंगे।

एनजीटी ने 2017 में चीनी मांझे पर लगाई थी रोक: नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने जुलाई 2017 में जानलेवा मांझे की बिक्री पर देश भर में प्रतिबंध लगा दिया था। पीपल्स फॉर एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल (पेटा) की अर्जी पर ये आदेश दिया गया था। ऑर्डर में कहा गया था कि पतंग उड़ाना देश की परंपरा रही है, लेकिन खतरनाक मांझे से पशु-पक्षी और लोग बुरी तरह जख्मी हो जाते हैं। बढ़ते हादसों के मद्देनजर दखल की जरूरत पड़ी। मांझा बनाने वाली कंपनियां उच्चतम न्यायालय गईं लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली।

5 साल की सजा, 1 लाख जुर्माने का है प्रावधान: दिल्ली सरकार ने एनजीटी का आदेश आने के बाद 2017 में नोटिफिकेशन जारी किया था। इसके मुताबिक,चाइनीज मांझे की खरीद-फरोख्त करने, इसे रखने और इस्तेमाल करने पर अधिकतम पांच साल की सजा या 1 लाख रुपये जुर्माना किया जाएगा। दोनों भी हो सकते हैं। पतंग उड़ाने के लिए सिर्फ सूती धागे के इस्तेमाल की इजाजत है।

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