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दिल्ली-एनसीआर
रक्षा में आत्मनिर्भरता पर हुआ मंथन, तकनीकी नवाचार पर जोर
SHIDDHANT
14 Nov 2025 9:16 PM IST

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Delhi दिल्ली: इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (IDS) मुख्यालय द्वारा मानेकशॉ सेंटर में आयोजित ‘ब्रेनस्टॉर्मिंग सत्र 2.0’ के दूसरे संस्करण में भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को भविष्य के दृष्टिकोण से मजबूत करने पर व्यापक चर्चा हुई। कार्यक्रम का मुख्य विषय था ‘रक्षा में आत्मनिर्भरता: भविष्य के युद्धों के लिए रक्षा उद्योग पारिस्थितिकी तंत्र का लाभ उठाना। इस सत्र में शीर्ष रक्षा अधिकारियों, उद्योग विशेषज्ञों, रणनीतिक विश्लेषकों और नीति निर्माताओं ने भाग लिया। IDS मुख्यालय ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए ट्वीट किया कि यह सत्र भारतीय रक्षा उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप विकसित करने और भविष्य के हाई-टेक युद्धों के लिए आवश्यक आत्मनिर्भर पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करने का महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ।
CISC ने स्वागत भाषण में घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने पर दिया जोर सत्र की शुरुआत चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ टू द चेयरमैन (CISC) के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने रक्षा उत्पादन में घरेलू उद्योगों को मजबूत करने, अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाने और अनुसंधान एवं विकास (R&D) संरचना को विस्तार देने की आवश्यकता पर जोर दिया। CISC ने कहा कि भविष्य के युद्ध कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक, साइबर सुरक्षा और स्वचालित हथियार प्रणालियों पर आधारित होंगे, इसलिए भारत को अपने रक्षा नवाचार ढांचे को अब और अधिक मजबूत करना होगा।
CDS ने मुख्य भाषण में सार्वजनिक-निजी क्षेत्र और MSME के योगदान की सराहना की चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) ने मुख्य भाषण में भारत की रक्षा निर्माण क्षमता के तेज विस्तार पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज भारत रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा:
सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा कंपनियों का आधुनिकीकरण
निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी
और MSMEs के बढ़ते योगदान
भारत को विश्वस्तरीय रक्षा निर्माण हब बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
CDS ने यह भी उल्लेख किया कि भारत ने हाल के वर्षों में रिकॉर्ड रक्षा निर्यात हासिल किए हैं, जो देश की बढ़ती तकनीकी क्षमता का प्रमाण है।
भविष्य की युद्ध अवधारणाओं पर विशेष चर्चा
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने निम्न मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया—
स्वदेशी हथियार प्रणालियों का विस्तार
ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक
साइबर-वॉरफेयर क्षमता
क्वांटम संचार प्रणाली
रक्षा स्टार्टअप्स के लिए नीति समर्थन
और संयुक्त सैन्य-औद्योगिक साझेदारी मॉडल
सभी पैनलों में यह सहमति बनी कि तकनीकी नवाचार और मजबूत रक्षा विनिर्माण भारत के लिए भविष्य की युद्ध चुनौतियों का सामना करने की सबसे बड़ी ताकत होंगे।
ब्रेनस्टॉर्मिंग सत्र 2.0 का यह संस्करण राष्ट्रीय सुरक्षा, आत्मनिर्भर भारत मिशन और भविष्य की रणनीतिक तैयारियों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
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