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दिल्ली-एनसीआर
BRICS सम्मेलन को लेकर IGI एयरपोर्ट पर परखी गई सुरक्षा व्यवस्था
nidhi
2 Sept 2026 7:58 AM IST

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IGI एयरपोर्ट पर सुरक्षा का मेगा टेस्ट
नई दिल्ली: BRICS सम्मेलन से पहले राजधानी दिल्ली में सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करने की कवायद तेज हो गई है। इसी क्रम में इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) एयरपोर्ट पर बड़े स्तर की मॉक ड्रिल आयोजित की गई। अभ्यास का उद्देश्य आतंकी हमले, यात्रियों को बंधक बनाए जाने और एयरपोर्ट परिसर में उत्पन्न होने वाली दूसरी गंभीर आपात स्थितियों से निपटने के लिए सुरक्षा एजेंसियों की तैयारियों को परखना था।
मॉक ड्रिल के दौरान ऐसी काल्पनिक परिस्थितियां तैयार की गईं जिनका सामना वास्तविक आतंकी हमले या सुरक्षा संकट के समय करना पड़ सकता है। सुरक्षाकर्मियों को सूचना मिलने से लेकर घटनास्थल तक पहुंचने, इलाके को सुरक्षित करने और खतरे को नियंत्रित करने तक की पूरी प्रक्रिया का अभ्यास कराया गया। इस दौरान अलग-अलग सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय और प्रतिक्रिया में लगने वाले समय पर विशेष ध्यान दिया गया। अभ्यास में एक स्थिति ऐसी बनाई गई जिसमें हथियारबंद हमलावरों के एयरपोर्ट परिसर में घुसने की आशंका जताई गई। सुरक्षा टीमों को तत्काल सक्रिय होकर संवेदनशील हिस्सों की घेराबंदी करने और यात्रियों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने का अभ्यास करना पड़ा। दूसरी परिस्थिति में बंधक संकट से निपटने की क्षमता को परखा गया। इसमें सुरक्षा बलों की प्राथमिकता बंधकों को सुरक्षित निकालने के साथ हमलावरों को नियंत्रित करने की रही।
एयरपोर्ट जैसे संवेदनशील स्थान पर किसी भी आपात स्थिति के दौरान केवल हमलावरों से निपटना ही चुनौती नहीं होती। हजारों यात्रियों की सुरक्षा, उड़ानों का संचालन, टर्मिनल के भीतर भीड़ को नियंत्रित करना और अफवाहों को रोकना भी महत्वपूर्ण होता है। मॉक ड्रिल में इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए संबंधित टीमों की जिम्मेदारियों को जांचा गया।
BRICS सम्मेलन के दौरान कई देशों के प्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों की आवाजाही होने की संभावना को देखते हुए दिल्ली के प्रवेश बिंदुओं और महत्वपूर्ण स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था बेहद अहम हो जाती है। IGI एयरपोर्ट विदेशी प्रतिनिधिमंडलों की आवाजाही का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में एयरपोर्ट की सुरक्षा में किसी भी तरह की कमी न रहे, इसके लिए संभावित खतरों को ध्यान में रखकर तैयारियां की जा रही हैं।
मॉक ड्रिल का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य विभिन्न एजेंसियों के बीच कम्युनिकेशन सिस्टम की प्रभावशीलता जांचना भी था। किसी वास्तविक संकट में सूचना तेजी से संबंधित अधिकारियों तक पहुंचना जरूरी होता है। इसके साथ ही यह भी देखा गया कि आपात स्थिति में उपलब्ध संसाधनों और सुरक्षाकर्मियों को कितनी तेजी से तैनात किया जा सकता है। अभ्यास के बाद सुरक्षा व्यवस्था में सामने आई कमियों और प्रतिक्रिया प्रणाली का मूल्यांकन किया जाएगा। जहां सुधार की जरूरत महसूस होगी वहां आवश्यक बदलाव किए जा सकते हैं। BRICS सम्मेलन से पहले इस तरह की मॉक ड्रिल के जरिए सुरक्षा एजेंसियां किसी भी अप्रत्याशित स्थिति के लिए अपनी तैयारी मजबूत करने में जुटी हैं।
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