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SEBI की सख्ती से F&O में घटे निवेशक और नुकसान

Ratna Netam
11 Aug 2026 5:44 PM IST
SEBI की सख्ती से F&O में घटे निवेशक और नुकसान
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नई दिल्ली : इक्विटी डेरिवेटिव्स यानी फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) में रिटेल निवेशकों के लगातार हो रहे नुकसान को कम करने के लिए भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) की ओर से उठाए गए नियामकीय कदमों का असर अब आंकड़ों में दिखाई देने लगा है। सरकार ने मंगलवार को संसद में जानकारी देते हुए बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में रिटेल निवेशकों का कुल नुकसान घटकर 91,685 करोड़ रुपये रह गया। यह वित्त वर्ष 2024-25 में दर्ज 1,11,788 करोड़ रुपये के मुकाबले करीब 18 प्रतिशत कम है।
राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि नवंबर 2024 से लागू किए गए नियामकीय बदलावों के बाद इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में रिटेल निवेशकों की भागीदारी और ट्रेडिंग गतिविधियों में कमी देखी गई है। सरकार के मुताबिक, नियामकीय उपायों का एक प्रमुख उद्देश्य छोटे और व्यक्तिगत निवेशकों को अत्यधिक जोखिम वाले डेरिवेटिव्स कारोबार से होने वाले बड़े नुकसान से बचाना है।
आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में F&O सेगमेंट में हिस्सा लेने वाले यूनिक रिटेल निवेशकों की संख्या करीब 98.10 लाख थी। वित्त वर्ष 2025-26 में यह संख्या लगभग 20 प्रतिशत घटकर 78.60 लाख रह गई। यानी करीब 19.5 लाख यूनिक निवेशकों ने इस अवधि में F&O सेगमेंट में भागीदारी नहीं की या उनकी सक्रिय भागीदारी कम हुई। सरकार के अनुसार, निवेशकों की संख्या और कुल ट्रेडिंग गतिविधि में यह गिरावट सेबी द्वारा लागू किए गए नए नियमों के बाद देखने को मिली है।
कुल नुकसान के आंकड़ों में भी कमी आई है। वित्त वर्ष 2024-25 में F&O में रिटेल निवेशकों का कुल नुकसान 1,11,788 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में घटकर 91,685 करोड़ रुपये रह गया। इस तरह कुल नुकसान में करीब 20,103 करोड़ रुपये की कमी आई है। हालांकि, निवेशकों की संख्या घटने के बावजूद प्रति निवेशक औसत नुकसान में मामूली बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2024-25 में प्रति निवेशक औसत नुकसान 1,13,913 रुपये था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 1,16,654 रुपये हो गया।
इससे संकेत मिलता है कि F&O में सक्रिय निवेशकों की संख्या कम होने के बावजूद इस सेगमेंट में बने रहने वाले कई निवेशकों के लिए जोखिम अभी भी काफी अधिक है। फ्यूचर्स और ऑप्शंस में कम समय में बड़ी रकम कमाने की संभावना के साथ भारी नुकसान का जोखिम भी रहता है। यही वजह है कि नियामक लगातार इस क्षेत्र में जोखिम कम करने और निवेशकों को अधिक सावधानी बरतने के लिए प्रेरित करने वाले नियम लागू कर रहा है।
सरकार ने संसद में बताया कि सेबी ने इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इनमें साप्ताहिक और मासिक इंडेक्स डेरिवेटिव्स प्रोडक्ट्स को तर्कसंगत बनाना, इंडेक्स डेरिवेटिव्स के लिए बड़े कॉन्ट्रैक्ट साइज तय करना और ऑप्शंस की एक्सपायरी वाले दिन अधिक टेल-रिस्क कवरेज सुनिश्चित करना शामिल है। इसके अलावा ऑप्शन खरीदारों से प्रीमियम की अग्रिम वसूली, एक्सपायरी के दिन कैलेंडर स्प्रेड ट्रीटमेंट को हटाना और पोजीशन लिमिट की इंट्राडे मॉनिटरिंग जैसे कदम भी उठाए गए हैं।
इन उपायों का उद्देश्य विशेष रूप से उन परिस्थितियों में जोखिम को नियंत्रित करना है, जहां बाजार में अचानक तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। एक्सपायरी के दिन अक्सर डेरिवेटिव्स बाजार में ट्रेडिंग गतिविधि बढ़ जाती है और छोटे निवेशक कम समय में बड़े मुनाफे की उम्मीद में अत्यधिक जोखिम ले सकते हैं। सेबी की ओर से लागू किए गए नियमों का मकसद ऐसे जोखिमों पर निगरानी बढ़ाना है।
मई 2025 में भी बाजार नियामक ने एक्सचेंजों पर डेरिवेटिव्स की एक्सपायरी के दिनों को सुव्यवस्थित करने और F&O सेगमेंट में रिस्क मॉनिटरिंग तथा डिस्क्लोजर को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त कदम उठाए थे। सरकार के अनुसार, इन उपायों के बाद इक्विटी डेरिवेटिव्स में कुल टर्नओवर भी घटा है। वित्त वर्ष 2024-25 में यह करीब 213 लाख करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में घटकर 202 लाख करोड़ रुपये रह गया।
हालांकि, F&O कारोबार में गतिविधि कम होने के बावजूद सरकार को इस सेगमेंट से सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) के रूप में मिलने वाला राजस्व काफी बढ़ा है। वित्त राज्य मंत्री के अनुसार, F&O ट्रेड्स पर STT से प्राप्त आय वित्त वर्ष 2024-25 में 7,893 करोड़ रुपये थी, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 27,695 करोड़ रुपये हो गई। यह बढ़ोतरी डेरिवेटिव्स कारोबार पर कर व्यवस्था और ट्रेडिंग पैटर्न में आए बदलावों के बीच महत्वपूर्ण आंकड़ा है।
कुल मिलाकर संसद में सामने आए आंकड़े बताते हैं कि सेबी के नियामकीय कदमों के बाद F&O बाजार में रिटेल निवेशकों की संख्या और कुल नुकसान दोनों में कमी आई है। हालांकि, प्रति निवेशक औसत नुकसान का बढ़ना यह भी दर्शाता है कि डेरिवेटिव्स में जोखिम अभी खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में छोटे निवेशकों के लिए बाजार की समझ, जोखिम प्रबंधन और निवेश से पहले पर्याप्त जानकारी हासिल करना बेहद महत्वपूर्ण बना हुआ है। सरकार और बाजार नियामक की कोशिश अब यही है कि F&O बाजार में ट्रेडिंग जारी रहे, लेकिन अत्यधिक जोखिम लेने की प्रवृत्ति को नियंत्रित किया जा सके।
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