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कांग्रेस-सपा में जल्द होगा सीट बंटवारा

Kavita2
2 Sept 2026 9:38 AM IST
कांग्रेस-सपा में जल्द होगा सीट बंटवारा
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। विपक्षी खेमे में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन लगभग तय माना जा रहा है। दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर जल्द औपचारिक बातचीत शुरू होने की संभावना है। इस बीच कांग्रेस ने गठबंधन के तहत अपने हिस्से में आने वाली सीटों की संभावित संख्या और मजबूत विधानसभा क्षेत्रों को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी ने कई दौर के सर्वे के बाद सीटों की संभावित संख्या को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है।

उत्तर प्रदेश में कुल 403 विधानसभा सीटें हैं और यहां सरकार बनाने के लिए बहुमत का आंकड़ा 202 है। राज्य की सत्ता के लिए मुख्य मुकाबले में भाजपा और समाजवादी पार्टी को देखा जाता है। कांग्रेस पिछले कुछ वर्षों में अपने संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में सपा के साथ गठबंधन कांग्रेस के लिए 2027 के चुनाव में महत्वपूर्ण रणनीति साबित हो सकता है।

कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने 2024 का लोकसभा चुनाव भी गठबंधन में लड़ा था। उत्तर प्रदेश में इस गठबंधन का प्रदर्शन महत्वपूर्ण रहा था। लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद दोनों दलों के बीच राजनीतिक तालमेल को विधानसभा चुनाव तक जारी रखने की संभावनाएं लगातार जताई जाती रही हैं। अब विधानसभा चुनाव की तैयारियां आगे बढ़ने के साथ सीट बंटवारे का मुद्दा महत्वपूर्ण होता जा रहा है।

बताया जा रहा है कि कांग्रेस ने सीटों पर अपनी स्थिति जानने के लिए कई स्तर पर सर्वे कराया है। इसमें पिछले चुनावों के नतीजे, पार्टी का संगठनात्मक आधार, स्थानीय नेताओं की सक्रियता, संभावित उम्मीदवारों की स्थिति और मतदाताओं के बीच पार्टी की पकड़ जैसे पहलुओं का आकलन किया गया है। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर कांग्रेस उन सीटों की पहचान करने में जुटी है जहां गठबंधन के उम्मीदवार के तौर पर उसका दावा मजबूत हो सकता है।

कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती गठबंधन की बातचीत शुरू होने से पहले अपनी मांग को ठोस आंकड़ों के साथ रखने की होगी। पार्टी केवल सीटों की संख्या बढ़ाने के बजाय ऐसी विधानसभा सीटों पर दावा करना चाहेगी जहां उसके उम्मीदवार के जीतने की संभावना अधिक हो। इसके लिए पार्टी की ओर से सीटवार राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों का अध्ययन किया जा रहा है।

दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में विपक्ष की सबसे बड़ी ताकत है। ऐसे में सीट बंटवारे की बातचीत में सपा अपनी राजनीतिक स्थिति और पिछले विधानसभा तथा लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन को आधार बना सकती है। सपा के सामने भी चुनौती यह होगी कि गठबंधन सहयोगी कांग्रेस को पर्याप्त सीटें देने के साथ अपने मजबूत क्षेत्रों में संतुलन बनाए रखा जाए।

सीट बंटवारे की बातचीत में पश्चिमी उत्तर प्रदेश, अवध, पूर्वांचल और बुंदेलखंड जैसे अलग-अलग क्षेत्रों के समीकरण महत्वपूर्ण होंगे। कांग्रेस की कोशिश उन क्षेत्रों में अधिक सीटें हासिल करने की हो सकती है जहां उसका परंपरागत संगठन या मजबूत स्थानीय नेतृत्व मौजूद है। वहीं समाजवादी पार्टी उन सीटों को अपने पास रखने पर जोर दे सकती है जहां उसका संगठन और वोट बैंक मजबूत माना जाता है।

दोनों दलों के बीच सीट बंटवारा केवल संख्या का मामला नहीं होगा। यह भी महत्वपूर्ण होगा कि कौन सी पार्टी किस विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ेगी। कई सीटों पर दोनों दलों के स्थानीय नेता टिकट के दावेदार हो सकते हैं। ऐसे में गठबंधन होने पर कुछ नेताओं को अपनी दावेदारी छोड़नी पड़ सकती है। इससे स्थानीय स्तर पर असंतोष पैदा होने की आशंका भी रहेगी।

यही वजह है कि दोनों दलों के नेतृत्व के सामने गठबंधन के साथ-साथ कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की चुनौती भी होगी। सीट बंटवारे की घोषणा जितनी जल्दी होगी, उम्मीदवारों को अपने क्षेत्रों में चुनावी तैयारी के लिए उतना अधिक समय मिल सकेगा।

कांग्रेस अपने संगठन को भी विधानसभा चुनाव के लिहाज से तैयार करने में जुटी है। पार्टी के लिए गठबंधन में मिलने वाली सीटों पर मजबूत उम्मीदवारों का चयन बेहद महत्वपूर्ण होगा। सर्वे के माध्यम से संभावित उम्मीदवारों की लोकप्रियता और जमीनी पकड़ का भी आकलन किए जाने की संभावना है।

समाजवादी पार्टी भी पहले से विधानसभा चुनाव की तैयारियों में सक्रिय है। पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव लगातार भाजपा सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेर रहे हैं। सपा की रणनीति अपने मौजूदा सामाजिक समीकरण के साथ अन्य वर्गों के मतदाताओं को जोड़ने की है। कांग्रेस के साथ गठबंधन इस रणनीति को और व्यापक बनाने का माध्यम बन सकता है।

भाजपा भी विपक्षी गठबंधन की रणनीति पर नजर बनाए हुए है। 2027 के चुनाव में सपा और कांग्रेस अगर मिलकर मैदान में उतरते हैं तो भाजपा के सामने कई सीटों पर संयुक्त विपक्षी उम्मीदवार होगा। ऐसी स्थिति में वोटों के बंटवारे को रोकना विपक्ष के लिए महत्वपूर्ण फायदा हो सकता है। हालांकि गठबंधन की सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि दोनों दलों के समर्थक एक-दूसरे के उम्मीदवारों के पक्ष में कितनी प्रभावी तरीके से मतदान करते हैं।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों की बड़ी भूमिका रहती है। इसी कारण कांग्रेस और सपा सीट बंटवारे से पहले प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के सामाजिक समीकरण का भी आकलन कर सकती हैं। उम्मीदवार चयन में जातीय संतुलन, स्थानीय लोकप्रियता और संगठनात्मक क्षमता जैसे कारकों को प्राथमिकता मिलने की संभावना है।

फिलहाल दोनों पार्टियों के बीच औपचारिक सीट बंटवारे की बातचीत शुरू होने का इंतजार है। कांग्रेस ने सर्वे के आधार पर अपनी संभावित सीटों और संख्या को लेकर तैयारी शुरू कर दी है। बातचीत की मेज पर कांग्रेस कितनी सीटों की मांग रखती है और समाजवादी पार्टी कितनी सीटें छोड़ने को तैयार होती है, यही गठबंधन की अगली बड़ी परीक्षा होगी।

यदि दोनों दल समय रहते सीट बंटवारे पर सहमति बना लेते हैं तो 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले विपक्षी गठबंधन को जमीनी स्तर पर तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल सकता है। फिलहाल इतना साफ है कि उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों के लिए होने वाली चुनावी लड़ाई में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीटों का बंटवारा आने वाले समय का बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनने वाला है।

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