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Delhi चिड़ियाघर के जटायु के लिए साथी की तलाश

Kiran
2 Sept 2026 9:46 AM IST
Delhi चिड़ियाघर के जटायु के लिए साथी की तलाश
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दिल्ली चिड़ियाघर के इकलौते ‘जटायु’ को मिलेगा साथी! दो चिड़ियाघरों से चल रही बातचीत
Delhi दिल्ली। दिल्ली के नेशनल जूलॉजिकल पार्क में लंबे समय से अकेले रह रहे इजिप्शियन गिद्ध ‘जटायु’ के लिए अब साथी मिलने की उम्मीद जगी है। दो दशक से अधिक समय से बिना किसी साथी के रह रहे इस बुजुर्ग गिद्ध के लिए दिल्ली चिड़ियाघर प्रशासन दूसरे राज्यों के दो चिड़ियाघरों से बातचीत कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जटायु के लिए उपयुक्त साथी की तलाश की जा रही है, हालांकि यह प्रक्रिया अभी शुरुआती चरण में है। जटायु दिल्ली चिड़ियाघर का इकलौता इजिप्शियन गिद्ध है। उसे दो दशक से भी अधिक समय पहले बचाए जाने के बाद नेशनल जूलॉजिकल पार्क लाया गया था। इसके बाद से वह इसी चिड़ियाघर में रह रहा है। समय के साथ उसके साथ रहने वाले अन्य इजिप्शियन गिद्धों की उम्र और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण मौत हो गई। इसके बाद जटायु अकेला रह गया। अब चिड़ियाघर प्रशासन का प्रयास है कि उसके लिए एक उपयुक्त साथी की व्यवस्था की जाए, ताकि उसके जीवन में साथ मिल सके और प्रजाति के संरक्षण से जुड़े प्रयासों को भी आगे बढ़ाया जा सके।
दो चिड़ियाघरों से संपर्क
दिल्ली चिड़ियाघर के एक अधिकारी ने बताया कि जटायु के लिए साथी तलाशने के उद्देश्य से दूसरे राज्यों के दो चिड़ियाघरों के साथ बातचीत की जा रही है। हालांकि, अधिकारियों ने फिलहाल उन दोनों चिड़ियाघरों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं। अधिकारी के अनुसार, बातचीत अभी प्रारंभिक स्तर पर है। साथी के चयन में कई पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा। इनमें पक्षी की उम्र, स्वास्थ्य, लिंग, प्रजातिगत अनुकूलता और उसके मौजूदा वातावरण में रहने की क्षमता जैसे पहलू महत्वपूर्ण होंगे। चिड़ियाघर प्रशासन जल्दबाजी में कोई फैसला लेने के बजाय सभी जरूरी पहलुओं की जांच के बाद ही आगे बढ़ना चाहता है। खासतौर पर जटायु की बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए उसके लिए ऐसा साथी तलाशना जरूरी होगा, जिसके साथ वह सहज रह सके।
दो दशक से ज्यादा समय से अकेला है जटायु
जटायु की कहानी दिल्ली चिड़ियाघर में लंबे समय से वन्यजीव प्रेमियों के लिए दिलचस्पी का विषय रही है। दो दशक से अधिक समय पहले बचाए जाने के बाद उसे नेशनल जूलॉजिकल पार्क लाया गया था। उस समय उसके साथ अन्य इजिप्शियन गिद्ध भी मौजूद थे। लेकिन वर्षों के दौरान उम्र और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते अन्य गिद्धों की मौत हो गई। इसके बाद जटायु अपने बाड़े में अकेला रह गया। लंबे समय तक उसके लिए किसी साथी की व्यवस्था नहीं हो सकी। अब चिड़ियाघर प्रशासन की नई पहल से उसके लिए उम्मीद पैदा हुई है। यदि दूसरे चिड़ियाघरों के साथ बातचीत सफल रहती है तो जटायु को लंबे अंतराल के बाद अपनी ही प्रजाति का साथी मिल सकता है।
साथी तलाशना क्यों है चुनौतीपूर्ण?
किसी वन्यजीव को साथी उपलब्ध कराना केवल उसे दूसरे स्थान से लाकर उसी बाड़े में रखने जितना आसान नहीं होता। खास तौर पर उम्रदराज पक्षी के मामले में स्वास्थ्य और व्यवहार संबंधी पहलुओं की जांच जरूरी होती है। जटायु की उम्र काफी अधिक हो चुकी है। ऐसे में उसके लिए साथी चुनते समय यह देखना होगा कि नया पक्षी उसके साथ अनुकूल व्यवहार करता है या नहीं। इसके अलावा दोनों पक्षियों की स्वास्थ्य स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी। चिड़ियाघर प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि दूसरे संस्थान से आने वाले पक्षी के स्थानांतरण के दौरान सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किया जाए। नए पक्षी को दिल्ली के वातावरण में ढलने में भी समय लग सकता है।
संरक्षण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण पहल
इजिप्शियन गिद्धों की आबादी में पिछले दशकों में कई क्षेत्रों में गिरावट दर्ज की गई है। ऐसे में चिड़ियाघरों में इस प्रजाति की देखभाल और संरक्षण का महत्व बढ़ जाता है। दिल्ली चिड़ियाघर में जटायु का अकेला होना इस प्रजाति की कैद में मौजूदगी से जुड़ी एक अलग चुनौती भी है। यदि जटायु के लिए उपयुक्त साथी मिल जाता है तो यह केवल उसके अकेलेपन को दूर करने की पहल नहीं होगी, बल्कि प्रजाति संरक्षण की दिशा में भी एक सकारात्मक कदम माना जा सकता है। हालांकि, इस स्तर पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि दोनों पक्षियों के बीच प्रजनन की संभावना कितनी होगी, क्योंकि जटायु की उम्र और स्वास्थ्य इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
नाम सार्वजनिक नहीं किए गए
चिड़ियाघर प्रशासन ने अभी उन दो चिड़ियाघरों के नाम नहीं बताए हैं, जिनसे जटायु के साथी को लेकर बातचीत की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि प्रक्रिया अभी शुरुआती चरण में है और अंतिम निर्णय होने के बाद ही विस्तृत जानकारी सामने आ सकती है। फिलहाल, जटायु अपने बाड़े में अकेला ही है, लेकिन उसके लिए साथी तलाशने की प्रक्रिया शुरू होने से उसके लंबे अकेलेपन के खत्म होने की उम्मीद जगी है। अगर बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है और सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी हो जाती हैं, तो आने वाले समय में दिल्ली चिड़ियाघर में जटायु के साथ उसकी ही प्रजाति का एक और गिद्ध नजर आ सकता है। दो दशक से अधिक समय से अकेले रह रहे इस बुजुर्ग गिद्ध के लिए यह बदलाव उसके जीवन में एक नया अध्याय शुरू कर सकता है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि चिड़ियाघर प्रशासन की बातचीत किस नतीजे तक पहुंचती है और जटायु के लिए उसका नया साथी कब दिल्ली आता है।
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