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जिमखाना क्लब पर SC का बड़ा निर्देश

Kavita2
5 Oct 2026 12:52 PM IST
जिमखाना क्लब पर SC का बड़ा निर्देश
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नई दिल्ली। दिल्ली जिमखाना क्लब से जुड़े विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को महत्वपूर्ण निर्देश दिया। शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाई कोर्ट से क्लब के 11 सदस्यों की ओर से दायर याचिका पर विचार करने को कहा है। इन सदस्यों ने क्लब के 27.3 एकड़ परिसर को अपने कब्जे में लेने के केंद्र सरकार के फैसले और उसके बाद शुरू की गई बेदखली की कार्रवाई को चुनौती दी है।

मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच के समक्ष हुई। क्लब के सदस्यों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने अदालत को बताया कि दिल्ली हाई कोर्ट ने सदस्यों की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था।

वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह के मुताबिक, हाई कोर्ट का कहना था कि केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती देने का अधिकार क्लब के पास है और व्यक्तिगत सदस्य इसे चुनौती नहीं दे सकते। इसके बाद सदस्यों से सुप्रीम कोर्ट से इस संबंध में स्पष्टीकरण लेने को कहा गया था।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचे क्लब के 11 सदस्य

दिल्ली जिमखाना क्लब के 11 सदस्यों ने केंद्र सरकार के फैसले और उसके बाद की बेदखली की कार्रवाई के खिलाफ कानूनी रास्ता अपनाया है। उनका मामला पहले दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा था, लेकिन वहां उनकी याचिका पर सुनवाई नहीं हुई।

इसके बाद सदस्य सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने शीर्ष अदालत के सामने पक्ष रखा। उन्होंने बेंच को बताया कि हाई कोर्ट ने इस आधार पर याचिका पर विचार करने से इनकार किया था कि केंद्र के फैसले को केवल क्लब ही चुनौती दे सकता है।

सदस्यों का सवाल मुख्य रूप से इस बात से जुड़ा है कि क्या वे व्यक्तिगत रूप से केंद्र सरकार की कार्रवाई को अदालत में चुनौती दे सकते हैं।

हाई कोर्ट ने मांगा था सुप्रीम कोर्ट से स्पष्टीकरण

सुनवाई के दौरान विकास सिंह ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि दिल्ली हाई कोर्ट ने सदस्यों से शीर्ष अदालत से यह स्पष्टीकरण लेने को कहा था कि क्या वे भी केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ याचिका दाखिल कर सकते हैं।

इसी के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने पहुंचा। शीर्ष अदालत ने मामले को सुनने के बाद दिल्ली हाई कोर्ट से क्लब के 11 सदस्यों की याचिका पर विचार करने को कहा है।

इस निर्देश के बाद अब सदस्यों की ओर से उठाए गए मुद्दों पर दिल्ली हाई कोर्ट में विचार का रास्ता खुल गया है।

27.3 एकड़ परिसर को लेकर विवाद

पूरा विवाद दिल्ली जिमखाना क्लब के 27.3 एकड़ के परिसर से जुड़ा है। क्लब के सदस्यों ने केंद्र सरकार द्वारा इस परिसर को अपने कब्जे में लेने के फैसले पर आपत्ति जताई है।

इसके अलावा उन्होंने इस फैसले के बाद की बेदखली की कार्रवाई को भी चुनौती दी है। मामला संपत्ति और उससे जुड़े अधिकारों के साथ-साथ इस सवाल से भी संबंधित है कि केंद्र के निर्णय को चुनौती देने का अधिकार किसके पास है।

हाई कोर्ट के सामने जब सदस्य पहुंचे थे, तब अदालत ने उनकी याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए कहा था कि इस तरह की चुनौती क्लब की ओर से दी जानी चाहिए।

इसके बाद व्यक्तिगत सदस्यों की याचिका की स्वीकार्यता का मुद्दा सामने आया।

सदस्यों की ओर से विकास सिंह ने रखा पक्ष

सुप्रीम कोर्ट में क्लब के सदस्यों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह पेश हुए। उन्होंने तीन सदस्यीय बेंच के सामने दिल्ली हाई कोर्ट में हुई कार्यवाही की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि सदस्यों ने केंद्र के फैसले को चुनौती देने के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन उनकी याचिका पर सुनवाई नहीं की गई। इसके पीछे कारण यह बताया गया कि संबंधित निर्णय को चुनौती देने का अधिकार केवल क्लब को है।

सिंह ने बेंच के सामने यह भी रखा कि हाई कोर्ट ने ही सदस्यों से कहा था कि वे सुप्रीम कोर्ट से यह स्पष्ट करा लें कि क्या व्यक्तिगत सदस्य इस मामले में याचिका दायर कर सकते हैं।

अब हाई कोर्ट में होगा विचार

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद मामला एक बार फिर दिल्ली हाई कोर्ट के सामने जाएगा। शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट से 11 सदस्यों की याचिका पर विचार करने को कहा है।

इसका अर्थ यह है कि हाई कोर्ट अब सदस्यों की ओर से उठाए गए मुद्दों को कानून के मुताबिक देख सकेगा। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश को केंद्र सरकार के फैसले के गुण-दोष पर अंतिम निर्णय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

फिलहाल शीर्ष अदालत के सामने प्रमुख मुद्दा यह था कि क्लब के सदस्य अपनी शिकायत लेकर अदालत के सामने आ सकते हैं या नहीं।

बेदखली की कार्रवाई को भी दी गई चुनौती

क्लब के सदस्यों ने केवल परिसर को कब्जे में लेने के केंद्र के फैसले को ही चुनौती नहीं दी है, बल्कि उसके बाद की बेदखली की कार्रवाई पर भी सवाल उठाया है।

सदस्यों की याचिका में 27.3 एकड़ परिसर से जुड़ी कार्रवाई प्रमुख मुद्दा है। अब दिल्ली हाई कोर्ट में मामले पर विचार होने के दौरान याचिकाकर्ता अपने तर्क रख सकेंगे।

आगे की सुनवाई में केंद्र सरकार की ओर से भी अपना पक्ष रखा जा सकता है। इसके बाद अदालत कानून और संबंधित तथ्यों के आधार पर मामले में आगे की प्रक्रिया तय करेगी।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश से खुला सुनवाई का रास्ता

दिल्ली जिमखाना क्लब का मामला अब एक बार फिर हाई कोर्ट के समक्ष पहुंचने वाला है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश ने उन 11 सदस्यों के लिए अपनी याचिका पर विचार कराने का रास्ता खोल दिया है, जिन्हें पहले हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली थी।

अब सभी की नजर दिल्ली हाई कोर्ट में होने वाली अगली कार्यवाही पर रहेगी। वहां यह देखा जाएगा कि केंद्र सरकार द्वारा दिल्ली जिमखाना क्लब के 27.3 एकड़ परिसर को अपने कब्जे में लेने के फैसले और उसके बाद की बेदखली कार्रवाई को लेकर सदस्यों की ओर से उठाई गई आपत्तियों पर अदालत क्या रुख अपनाती है।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने विवाद के मूल मुद्दे पर कोई अंतिम फैसला देने के बजाय दिल्ली हाई कोर्ट से सदस्यों की याचिका पर विचार करने को कहा है।

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