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छात्र प्रदर्शन में यौन उत्पीड़न पर SC सख्त, जांच समिति को जल्द रिपोर्ट के निर्देश

Kavita2
24 Aug 2026 4:59 PM IST
छात्र प्रदर्शन में यौन उत्पीड़न पर SC सख्त, जांच समिति को जल्द रिपोर्ट के निर्देश
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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कथित हिंसा और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ यौन उत्पीड़न के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए जांच प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए। भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि पुलिस कार्रवाई की जांच के लिए गठित हाई-पावर्ड कमेटी को महिला प्रदर्शनकारियों की ओर से सामने आई यौन उत्पीड़न की शिकायतों पर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करनी होगी।

अदालत ने स्पष्ट किया कि पिछले सप्ताह दिए गए आदेश के अनुसार जांच समिति को इन शिकायतों की जांच तेजी से करते हुए जल्द से जल्द अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए छात्र विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं।

यौन उत्पीड़न की शिकायतों पर प्राथमिकता

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई-पावर्ड जांच समिति को महिला प्रदर्शनकारियों की ओर से की गई यौन उत्पीड़न संबंधी शिकायतों को प्राथमिकता देनी चाहिए। अदालत ने संकेत दिया कि इस तरह के आरोपों की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।

पीठ ने पिछले सप्ताह पारित अपने आदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि समिति को यौन उत्पीड़न की शिकायतों पर जल्द से जल्द अंतरिम रिपोर्ट दाखिल करनी है। इसका उद्देश्य शिकायतों की प्रारंभिक जांच और उनसे जुड़े तथ्यों को समयबद्ध तरीके से सामने लाना है।

अदालत के इस रुख से स्पष्ट है कि मामले में केवल पुलिस की कथित हिंसा ही जांच का विषय नहीं है, बल्कि महिला प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों को भी गंभीरता से देखा जा रहा है।

स्वतः संज्ञान लेने की मांग

सुप्रीम कोर्ट में यह मुद्दा वरिष्ठ वकील शोभा गुप्ता की ओर से उठाया गया। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए छात्र विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित यौन उत्पीड़न की घटनाओं का स्वतः संज्ञान लिया जाए।

वकील की ओर से अदालत का ध्यान महिला प्रदर्शनकारियों की शिकायतों की ओर आकर्षित किया गया और मामले में तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की गई। इसके बाद अदालत ने जांच समिति की जिम्मेदारी और अंतरिम रिपोर्ट से जुड़े निर्देशों को दोहराया।

इस मामले में यौन उत्पीड़न के आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है, ताकि शिकायतों में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता सामने आ सके।

छात्र प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई पर विवाद

20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए छात्र विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस कार्रवाई को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर कथित तौर पर बल प्रयोग और हिंसा के आरोप लगाए थे। इसके बाद मामले की जांच के लिए हाई-पावर्ड समिति का गठन किया गया।

प्रदर्शनकारियों की ओर से आरोप लगाया गया कि विरोध के दौरान पुलिस की कार्रवाई जरूरत से ज्यादा सख्त थी। वहीं, अब महिला प्रदर्शनकारियों से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने जांच समिति के माध्यम से इन आरोपों की जांच की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है। अदालत के निर्देश के बाद समिति को शिकायतों की जांच करते हुए अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट जल्द प्रस्तुत करनी होगी।

अंतरिम रिपोर्ट से सामने आ सकते हैं तथ्य

जांच समिति की अंतरिम रिपोर्ट इस मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रिपोर्ट के जरिए यह सामने आ सकता है कि महिला प्रदर्शनकारियों की ओर से किस तरह की शिकायतें की गई हैं और उनके संबंध में प्रारंभिक जांच में क्या तथ्य सामने आए हैं।

हालांकि, अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे। अंतरिम रिपोर्ट को शिकायतों की प्रारंभिक स्थिति और जांच की दिशा स्पष्ट करने वाले दस्तावेज के रूप में देखा जा सकता है।

अदालत ने समिति को जल्द कार्रवाई के निर्देश देकर यह संकेत दिया है कि मामले में शिकायतों को लंबे समय तक लंबित नहीं रखा जाना चाहिए।

संवेदनशील मामले में न्यायिक निगरानी

छात्र आंदोलनों में पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। लेकिन जब किसी प्रदर्शन में महिला प्रतिभागियों की ओर से यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप सामने आते हैं तो जांच की संवेदनशीलता और बढ़ जाती है।

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही प्रक्रिया से शिकायतकर्ताओं को निष्पक्ष जांच की उम्मीद मिली है। अदालत के निर्देश का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आरोपों की जांच निर्धारित प्रक्रिया के तहत हो और शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई की जाए।

शिकायतों की निष्पक्ष जांच पर जोर

मामले में आगे की कार्रवाई जांच समिति की रिपोर्ट और उसमें सामने आने वाले तथ्यों पर निर्भर करेगी। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने समिति को महिला प्रदर्शनकारियों की यौन उत्पीड़न संबंधी शिकायतों को प्राथमिकता देने और जल्द अंतरिम रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।

इससे पहले समिति को छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कथित हिंसा के आरोपों की जांच करनी थी। अब यौन उत्पीड़न की शिकायतों को भी जांच प्रक्रिया में प्राथमिकता दिए जाने से मामले का दायरा और संवेदनशील हो गया है।

सुप्रीम कोर्ट का सोमवार का निर्देश इस बात पर केंद्रित रहा कि गंभीर आरोपों की जांच में देरी नहीं होनी चाहिए। अदालत ने पिछले सप्ताह के आदेश के अनुरूप समिति को जल्द अंतरिम रिपोर्ट सौंपने की बात कही। अब सभी की नजर समिति की रिपोर्ट और उसमें सामने आने वाले तथ्यों पर है।

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