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SC ने निजी विश्वविद्यालयों से 5 साल का वित्तीय, परिचालन रिकॉर्ड मांगा

Kiran
22 Sept 2026 9:55 AM IST
SC ने निजी विश्वविद्यालयों से 5 साल का वित्तीय, परिचालन रिकॉर्ड मांगा
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Delhi सुप्रीम कोर्ट ने प्राइवेट हायर एजुकेशन में मुनाफ़ाखोरी के ख़िलाफ़ अपनी चेतावनी को जवाबदेही तय करने की एक देशव्यापी मुहिम में बदल दिया है। कोर्ट ने सरकारों को निर्देश दिया है कि वे यूनिवर्सिटीज़ के पिछले पाँच सालों के फाइनेंशियल और ऑपरेशनल रिकॉर्ड उसके सामने पेश करें। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने साफ़ कर दिया है कि कोई भी प्राइवेट यूनिवर्सिटी मुनाफ़ा कमाने वाली संस्था के तौर पर नहीं चलाई जा सकती, हालाँकि टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ़ के सही वेतन और कामकाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए उचित फाइनेंशियल गुंजाइश रखी जा सकती है।
यह आदेश सिर्फ़ बैलेंस शीट तक ही सीमित नहीं है। यूनिवर्सिटीज़ को यह बताना होगा कि फ़ीस (जिसमें डेवलपमेंट और इवेंट चार्ज भी शामिल हैं) कैसे वसूली और इस्तेमाल की जाती है, सरप्लस (बची हुई रकम) का निवेश कैसे किया जाता है और उन लोगों को भुगतान कैसे किया जाता है जो सीधे तौर पर शिक्षा से जुड़े नहीं हैं। उन्हें ज़मीन के आवंटन और कानूनी छूट जैसी सरकारी रियायतों के बारे में भी जानकारी देनी होगी।
इस जांच-पड़ताल का दायरा क्लासरूम तक भी है। संस्थाओं से कहा गया है कि वे जनवरी 2025 से कोर्स के हिसाब से जानकारी दें, जिसमें टीचरों को अलॉट की गई क्लास, असल में ली गई क्लास और क्लास न होने पर किए गए वैकल्पिक इंतज़ाम शामिल हों। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 17 सितंबर के आदेश के छह हफ़्ते के भीतर अपने मुख्य सचिवों के ज़रिए जानकारी हासिल करनी होगी और हलफ़नामा (एफ़िडेविट) दाखिल करना होगा। प्रोफेशनल रेगुलेटर्स से अलग से कहा गया है कि वे मान्यता के लिए इस्तेमाल किए गए इंस्पेक्शन रिकॉर्ड और फैकल्टी की जानकारी का खुलासा करें।
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