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SC ने कहा, ड्रग्स का धंधा करने वालों के खिलाफ सख्ती जरूरी, याचिका खारिज

Kavita2
2 Jun 2026 3:47 PM IST
SC ने कहा, ड्रग्स का धंधा करने वालों के खिलाफ सख्ती जरूरी, याचिका खारिज
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New Delhi नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ड्रग्स के अवैध व्यापार के मामलों में सख्त रुख अपनाने की आवश्यकता को दोहराया। न्यायाधीशों की बेंच – जस्टिस विक्रम नाथ, शील नागू और वी मोहना – ने जून 2022 में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट (NDPS), 1985 के तहत दर्ज एक मामले में आरोपी की ज़मानत याचिका खारिज कर दी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ड्रग्स का धंधा करने वाले लोग पीढ़ी दर पीढ़ी देश के युवाओं की ज़िंदगी बर्बाद कर रहे हैं। जस्टिस विक्रम नाथ ने स्पष्ट किया कि ऐसे अपराधियों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई होनी चाहिए ताकि न केवल अवैध कारोबार पर अंकुश लगे, बल्कि युवाओं को इस भयानक प्रवृत्ति से बचाया जा सके।

मामले का विवरण बताते हुए कोर्ट ने कहा कि आरोपी को जून 2022 में गिरफ्तार किया गया था। उस समय उसके खिलाफ NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। आरोपी ने अपनी ज़मानत याचिका में कोर्ट से रिहाई की मांग की थी, लेकिन बेंच ने कहा कि आरोपी की सक्रियता और ड्रग्स के गंभीर प्रभाव को देखते हुए उसे तत्काल रिहा करना उचित नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि ड्रग्स का अवैध व्यापार केवल व्यक्तिगत अपराध नहीं है, बल्कि यह समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए बड़ा खतरा है। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि न्यायपालिका के साथ-साथ प्रशासन और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को भी इस समस्या से लड़ने में पूरी प्रतिबद्धता दिखानी होगी।

जस्टिस शील नागू और वी मोहना ने भी सहमति जताते हुए कहा कि युवाओं को ड्रग्स से दूर रखना राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक स्वास्थ्य का मुद्दा है। अदालत ने कहा कि कानून का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना, अवैध ड्रग्स की तस्करी में शामिल लोगों को उदाहरण बनाने का अवसर है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह रुख न केवल न्यायिक दृष्टिकोण को स्पष्ट करता है, बल्कि राज्य सरकारों और केंद्रीय एजेंसियों के लिए भी दिशा-निर्देश देता है कि ड्रग्स के खिलाफ अभियान में तेजी लाना जरूरी है। अदालत ने यह संदेश भी दिया कि जमानत जैसे कानूनी उपायों का इस्तेमाल केवल उन्हीं मामलों में होना चाहिए, जहाँ आरोपी अपराध का जोखिम कम हो और वह समाज के लिए खतरा न बन रहा हो।

NDPS एक्ट 1985 के तहत अपराधियों को गंभीर सजा का प्रावधान है। इस एक्ट के अंतर्गत तस्करी, वितरण और इस्तेमाल करने वाले सभी व्यक्तियों पर कड़ी कार्रवाई की जाती है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि युवाओं को सुरक्षित रखने के लिए इस कानून के तहत कार्रवाई तेज़ और निर्णायक होनी चाहिए।

अदालत ने यह भी कहा कि ड्रग्स का धंधा करने वाले अपराधी अक्सर संगठित गिरोहों का हिस्सा होते हैं और उनके कार्य समाज के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं। ऐसे में उन्हें रोकने के लिए कानून के प्रावधानों का पूरी तरह पालन करना अपरिहार्य है।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि ड्रग्स के मामलों में किसी भी तरह की नरमी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और न्यायपालिका युवा पीढ़ी की सुरक्षा के लिए कड़ा रुख अपनाएगी।

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