- Home
- /
- दिल्ली-एनसीआर
- /
- वोटर लिस्ट से 47 लाख...

x
Delhi दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राजधानी में चल रही 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) प्रक्रिया के तहत वोटर लिस्ट से लाखों नाम हटाने के खिलाफ दायर याचिका पर सोमवार को सुनवाई करने पर सहमति जताई। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि वह 21 सितंबर को इस मामले की सुनवाई करेगी। इससे पहले, याचिकाकर्ताओं अंजलि भारद्वाज और अमृता जौहरी की ओर से वकील प्रशांत भूषण ने बताया कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाए गए 47 लाख लोगों के अलावा, 33 लाख और वोटरों को 'लॉजिकल डिसक्रेपेंसी' (तार्किक विसंगतियों) और 'अनमैप्ड' होने के आधार पर नोटिस भेजे गए हैं। भूषण ने सवाल उठाया, "उन्होंने यह नहीं बताया है कि किन लोगों को नोटिस भेजे गए हैं या किन आधारों पर उनके नाम हटाए गए हैं। उन्होंने यह भी नहीं बताया कि नोटिस किसे भेजा गया है। 'लॉजिकल डिसक्रेपेंसी' क्या हैं और वे 'अनमैप्ड' कैसे हैं?"
याचिका में शीर्ष अदालत से आग्रह किया गया कि वह चुनाव आयोग को अस्पष्ट नोटिसों के आधार पर वोटर लिस्ट से वोटरों के नाम हटाने से रोके, क्योंकि इन नोटिसों में ज़रूरी तथ्य या जानकारी नहीं दी गई थी।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग और दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने नोटिस पाने वाले वोटरों के नाम और नोटिस जारी करने के खास कारणों का खुलासा नहीं किया। उन्होंने दिल्ली में SIR के दौरान 'लॉजिकल डिसक्रेपेंसी' की श्रेणी में वोटरों के वर्गीकरण के लिए इस्तेमाल किए गए मानदंडों, परिभाषाओं, एल्गोरिदम पैरामीटर और ऑपरेशनल गाइडलाइंस का खुलासा करने की मांग की। उन्होंने तर्क दिया कि नोटिस पाने वाले वोटरों के नाम प्रकाशित न करना चुनाव आयोग के 14 मई, 2026 के कम्युनिकेशन के खिलाफ था। उन्होंने दिल्ली SIR के दौरान नोटिस पाने वाले सभी वोटरों की एक संयुक्त और खोजने योग्य (सर्च करने योग्य) सूची प्रकाशित करने की मांग की, जिसमें उनके पते और हर नोटिस के लिए खास कारण या श्रेणी भी शामिल हो। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि 'लॉजिकल डिसक्रेपेंसी' शब्द को परिभाषित नहीं किया गया है और चुनाव आयोग के 14 मई के कम्युनिकेशन में यह तय करने के लिए कोई खास मानदंड या पैरामीटर नहीं बताए गए थे कि कोई वोटर इस श्रेणी में कब आएगा।
उन्होंने बताया कि 31 अगस्त को प्रकाशित दिल्ली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 97.53 लाख वोटर दर्ज थे जिन्होंने अपने एन्यूमरेशन फॉर्म जमा किए थे, और इसके अलावा 47.56 लाख वोटरों को 'अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लिकेट' (ASDD) श्रेणी के तहत ड्राफ्ट लिस्ट से हटा दिया गया था। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ड्राफ्ट रोल में शामिल लगभग 33.13 लाख वोटरों को 'नो मैपिंग' या 'लॉजिकल गड़बड़ियों' के आधार पर नोटिस जारी करने के लिए चुना गया था। इनमें से 13.79 लाख वोटर 'नो मैपिंग' वाले थे, जबकि 19.33 लाख वोटर 'लॉजिकल गड़बड़ियों' की श्रेणी में आते थे।
Next Story





