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शत्रुजीत कपूर की सेवानिवृत्ति के बाद आईटीबीपी की जिम्मेदारी संभालेंगे संजय सिंघल

nidhi
28 Oct 2026 7:07 AM IST
शत्रुजीत कपूर की सेवानिवृत्ति के बाद आईटीबीपी की जिम्मेदारी संभालेंगे संजय सिंघल
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नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सशस्त्र सीमा बल यानी एसएसबी के महानिदेशक संजय सिंघल को भारत-तिब्बत सीमा पुलिस यानी आईटीबीपी के महानिदेशक का अतिरिक्त प्रभार सौंपने का फैसला किया है। यह व्यवस्था मौजूदा आईटीबीपी प्रमुख शत्रुजीत कपूर की 31 अक्टूबर 2026 को होने वाली सेवानिवृत्ति के बाद लागू होगी। सिंघल एसएसबी की जिम्मेदारी संभालते हुए आईटीबीपी का नेतृत्व भी करेंगे। संजय सिंघल उत्तर प्रदेश कैडर के 1993 बैच के भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी हैं। वर्तमान में वह एसएसबी के प्रमुख हैं। अतिरिक्त प्रभार मिलने के बाद उनके पास दो केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के नेतृत्व की जिम्मेदारी होगी। आईटीबीपी में यह नियमित नियुक्ति नहीं है। सरकार ने फिलहाल शीर्ष पद के लिए अंतरिम व्यवस्था तय की है। नियमित महानिदेशक की नियुक्ति के संबंध में अलग से निर्णय लिया जाएगा।
31 अक्टूबर को सेवानिवृत्त होंगे शत्रुजीत कपूर
आईटीबीपी के मौजूदा महानिदेशक शत्रुजीत कपूर हरियाणा कैडर के 1990 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। वह हरियाणा के पुलिस महानिदेशक भी रह चुके हैं। उन्होंने इसी वर्ष जनवरी में आईटीबीपी प्रमुख का पदभार संभाला था। अब 31 अक्टूबर को उनकी सेवानिवृत्ति निर्धारित है। इसी को ध्यान में रखते हुए गृह मंत्रालय ने अगले नेतृत्व की व्यवस्था की है। कपूर की सेवानिवृत्ति के बाद संजय सिंघल अतिरिक्त प्रभार के तहत बल के महानिदेशक की जिम्मेदारियां निभाएंगे। यह निर्णय ऐसे पद से जुड़ा है, जिसका संबंध सीमा सुरक्षा और बल के प्रशासनिक संचालन दोनों से है। महानिदेशक स्तर पर नेतृत्व की निरंतरता से विभिन्न इकाइयों, प्रशिक्षण संस्थानों और मुख्यालय के बीच निर्णय प्रक्रिया चलती रहती है। अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था का व्यावहारिक अर्थ है कि नियमित नियुक्ति होने तक संबंधित पद का कामकाज किसी सेवारत वरिष्ठ अधिकारी की देखरेख में जारी रहेगा। इससे अपने आप बल के दायित्वों या तैनाती में बदलाव घोषित नहीं हो जाता।
भारत-चीन सीमा की सुरक्षा करती है आईटीबीपी
भारत-तिब्बत सीमा पुलिस की स्थापना 24 अक्टूबर 1962 को हुई थी। बल की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह भारत-चीन सीमा के 3,488 किलोमीटर लंबे क्षेत्र की सुरक्षा करता है। इसका कार्यक्षेत्र लद्दाख के काराकोरम दर्रे से अरुणाचल प्रदेश के जाचेप ला तक फैला है। कठिन हिमालयी भूभाग में सीमा की निगरानी और सुरक्षा इसकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है। इस क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियां सामान्य मैदानी इलाकों से काफी अलग हैं। आईटीबीपी की कई सीमा चौकियां ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में स्थित हैं, जहां अत्यधिक ठंड, बर्फबारी और दुर्गम रास्तों जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। बल की वेबसाइट के अनुसार, अनेक चौकियां लगभग नौ हजार से 18,800 फीट की ऊंचाई पर हैं। सर्दियों में कुछ स्थानों पर तापमान शून्य से काफी नीचे चला जाता है। ऐसे वातावरण में जवानों की तैयारी, उपकरण, आवागमन और जरूरी सामग्री की उपलब्धता का विशेष महत्व होता है।
पर्वतारोहण और बचाव कार्यों में भी भूमिका
आईटीबीपी के जवानों को सामरिक प्रशिक्षण के साथ पर्वतारोहण और स्कीइंग जैसी विधाओं में भी प्रशिक्षित किया जाता है। ऊंचाई वाले इलाकों में काम करने की क्षमता बल की विशेष पहचान है। सीमा सुरक्षा के अलावा इसे आंतरिक सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियां भी दी जाती हैं। आधिकारिक विवरण में छत्तीसगढ़ में वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ अभियानों में इसकी भूमिका का भी उल्लेख है। अलग-अलग परिस्थितियों में काम करने के लिए प्रशिक्षण और तैयारियों का दायरा व्यापक रहता है। हिमालयी क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत और बचाव कार्य भी आईटीबीपी की महत्वपूर्ण भूमिका है। बल स्थानीय प्रशासन तथा अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर संकट में फंसे लोगों तक सहायता पहुंचाता रहा है। इसकी आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, जवानों ने वर्षों के दौरान अनेक खोज, बचाव और राहत अभियानों में हिस्सा लिया है। इस तरह इसकी जिम्मेदारी सीमावर्ती चौकियों की निगरानी से आगे आपात परिस्थितियों में नागरिकों की सहायता तक भी विस्तृत है।
नेपाल और भूटान सीमाओं पर तैनात है एसएसबी
संजय सिंघल जिस एसएसबी का नेतृत्व कर रहे हैं, वह भारत-नेपाल और भारत-भूटान सीमाओं की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है। एसएसबी को वर्ष 2001 में नेपाल सीमा और वर्ष 2004 में भूटान सीमा की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। बल के आधिकारिक विवरण के अनुसार, इसके दायित्वों में सीमा पार अपराध, तस्करी और अनधिकृत आवाजाही को रोकना शामिल है। सीमावर्ती आबादी में सुरक्षा की भावना मजबूत करना भी इसके कार्यों का हिस्सा है। दोनों बलों की सीमाएं और कार्य परिस्थितियां अलग हैं। आईटीबीपी का प्रमुख कार्यक्षेत्र ऊंचाई वाली भारत-चीन सीमा है, जबकि एसएसबी मित्र पड़ोसी देशों नेपाल और भूटान से लगी सीमाओं पर तैनात है। दोनों में प्रशासनिक नेतृत्व, प्रशिक्षण और संबंधित सरकारी एजेंसियों के साथ समन्वय आवश्यक होता है। सिंघल अपनी वर्तमान जिम्मेदारी के साथ आईटीबीपी का अतिरिक्त कार्यभार संभालेंगे। फिलहाल गृह मंत्रालय का निर्णय इसी अंतरिम नेतृत्व व्यवस्था तक सीमित है; नियमित आईटीबीपी महानिदेशक की नियुक्ति का इंतजार रहेगा।
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