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संजय राउत के बयान से नया विवाद भाजपा ने मांगा स्पष्टीकरण

Ratna Netam
21 Oct 2026 4:45 PM IST
संजय राउत के बयान से नया विवाद भाजपा ने मांगा स्पष्टीकरण
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नई दिल्ली। देश में सत्ता परिवर्तन को लेकर विपक्षी नेताओं के बयानों के बीच राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत पर तीखा हमला बोला। उन्होंने राउत के उस बयान पर सवाल उठाए, जिसमें उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की वियतनाम यात्रा को सत्ता परिवर्तन से जोड़ा था। त्रिवेदी ने कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन से पूछा कि आखिर राहुल गांधी की विदेश यात्रा और देश में सत्ता परिवर्तन के बीच क्या संबंध है। उन्होंने विपक्ष पर राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिश का आरोप भी लगाया।
संजय राउत के बयान पर भाजपा ने उठाए सवाल
नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सुधांशु त्रिवेदी ने शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि जो लोग बालासाहेब ठाकरे की राजनीतिक विरासत के उत्तराधिकारी होने का दावा करते हैं, वे आज ऐसे राजनीतिक दलों के साथ खड़े हैं, जिनकी विचारधारा पर भाजपा लगातार सवाल उठाती रही है।त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि विपक्ष के कुछ नेता देश की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को नुकसान पहुंचाने वाली ताकतों का समर्थन कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि संजय राउत के बयान से कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं। भाजपा जानना चाहती है कि राहुल गांधी के बारे में ऐसी कौन-सी जानकारी राउत के पास है, जिसके आधार पर वह सत्ता परिवर्तन की बात कर रहे हैं।
राहुल गांधी की वियतनाम यात्रा से जुड़ा विवाद
यह विवाद उस समय शुरू हुआ, जब संजय राउत ने राहुल गांधी की वियतनाम यात्रा के बारे में पूछे गए सवाल पर सत्ता परिवर्तन का जिक्र किया।राउत ने कहा था कि राहुल गांधी को वियतनाम से लौटने दीजिए, उसके बाद देश में सत्ता परिवर्तन होगा।उनके इस बयान के बाद भाजपा ने कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन से स्पष्टीकरण मांगना शुरू कर दिया।भाजपा नेताओं ने सवाल उठाया कि आखिर विदेश यात्रा के बाद सत्ता परिवर्तन का दावा किस आधार पर किया जा रहा है। हालांकि, राउत के बयान से किसी वास्तविक साजिश या गैरकानूनी योजना की पुष्टि नहीं होती है।
सुधांशु त्रिवेदी ने पूछा- आखिर क्या है यह फॉर्मूला?
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि यदि राउत सत्ता परिवर्तन को लेकर इतने आश्वस्त हैं, तो उन्हें अपने दावे का आधार सार्वजनिक करना चाहिए।उन्होंने सवाल किया कि आखिर वह कौन-सा फॉर्मूला है, जिसकी जानकारी संजय राउत को है, लेकिन कांग्रेस के दूसरे नेताओं को नहीं है।त्रिवेदी ने इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस नेतृत्व की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल अलग-अलग राजनीतिक मुद्दों के माध्यम से सरकार के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं।भाजपा नेता ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार बदलने का अधिकार जनता के पास है और यह परिवर्तन संवैधानिक प्रक्रियाओं के माध्यम से ही होना चाहिए।
बालासाहेब ठाकरे की विरासत पर भी टिप्पणी
सुधांशु त्रिवेदी ने शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की राजनीतिक विरासत का उल्लेख करते हुए उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट पर निशाना साधा।उन्होंने आरोप लगाया कि शिवसेना (यूबीटी) ने अपने पुराने वैचारिक रुख से अलग राजनीतिक रास्ता अपनाया है।त्रिवेदी ने कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) की राजनीतिक साझेदारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि दोनों दलों की पूर्व राजनीतिक विचारधाराओं में महत्वपूर्ण अंतर रहा है।यह भाजपा का राजनीतिक आरोप है। शिवसेना (यूबीटी) अपने गठबंधन और राजनीतिक निर्णयों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बताती रही है।
सत्ता परिवर्तन को लेकर पहले भी हो चुका है विवाद
देश में सत्ता परिवर्तन को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच पिछले कुछ दिनों से बयानबाजी जारी है।इससे पहले भी सुधांशु त्रिवेदी ने कहा था कि चुनाव के माध्यम से सरकार बदलना लोकतंत्र का सामान्य हिस्सा है, लेकिन गैर-लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता बदलने का प्रयास अलग विषय है।दसरी ओर, संजय राउत ने 18 अक्टूबर को कहा था कि लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन की मांग करना कोई अपराध नहीं है। उन्होंने मौजूदा सरकार और चुनावी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए राजनीतिक बदलाव की आवश्यकता बताई थी।
भाजपा और विपक्ष के बीच तेज हुई बयानबाजी
संजय राउत के बयान और सुधांशु त्रिवेदी की प्रतिक्रिया के बाद सत्ता परिवर्तन का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।भाजपा ने विपक्ष से अपने दावों का आधार स्पष्ट करने को कहा है, जबकि विपक्षी नेता सत्ता परिवर्तन की मांग को लोकतांत्रिक अधिकार बता रहे हैं।फिलहाल राहुल गांधी की वियतनाम यात्रा और सत्ता परिवर्तन के बीच किसी कथित साजिश का स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया है।आने वाले दिनों में यह मुद्दा कांग्रेस, भाजपा और शिवसेना (यूबीटी) के बीच राजनीतिक बयानबाजी का विषय बना रह सकता है।
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