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संजय राउत की केंद्र सरकार को चेतावनी बोले देश में फैल जाएगी अराजकता
Ratna Netam
20 Oct 2026 2:52 PM IST

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नई दिल्ली। शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने मंगलवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए देश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वर्तमान सरकार के शासन में इसी तरह की परिस्थितियां बनी रहीं, तो देश में चारों तरफ अराजकता फैल सकती है। राउत ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप करने की अपील करते हुए कहा कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।संजय राउत की यह प्रतिक्रिया 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के दो प्रमुख नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत बढ़ाए जाने के बाद सामने आई है। दोनों नेताओं को दिल्ली में विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में हिरासत में लिया गया था। सोमवार, 19 अक्टूबर को उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ा दी गई। इस फैसले के बाद विपक्षी नेताओं ने सरकार की कार्यप्रणाली और नागरिक अधिकारों को लेकर सवाल उठाए हैं।
सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप करने की अपील
संजय राउत ने सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत का मुद्दा उठाते हुए सर्वोच्च न्यायालय से मामले पर ध्यान देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि देश की वर्तमान परिस्थितियों में न्यायपालिका से लोगों की उम्मीदें बढ़ गई हैं।राउत ने सुप्रीम कोर्ट के प्रति अपना भरोसा जताते हुए कहा कि यह एकमात्र ऐसी संस्था है, जो देश को मौजूदा संकट से बचा सकती है। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि यदि वर्तमान सरकार इसी तरह सत्ता का संचालन करती रही, तो इसका असर देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और सामाजिक शांति पर पड़ सकता है।उनके बयान को केंद्र सरकार की नीतियों और विरोध प्रदर्शन करने वाले लोगों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई पर राजनीतिक विरोध के रूप में देखा जा रहा है।
सीजेपी के दो नेताओं की हिरासत बढ़ने से विवाद
कॉकरोच जनता पार्टी के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में न्यायिक हिरासत में हैं। दोनों नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन में हिस्सा लिया था।पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने और पुलिस के निर्देशों का उल्लंघन करने का प्रयास किया था। इसके बाद दोनों नेताओं को हिरासत में लिया गया।शुरुआत में उन्हें पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। सोमवार को दिल्ली के मंदिर मार्ग पुलिस थाने में विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए जाने के बाद उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ाने का आदेश दिया गया।इस मामले में अगली सुनवाई 21 अक्टूबर को निर्धारित है।
हिरासत बढ़ाने के फैसले पर उठे सवाल
सीजेपी नेताओं की हिरासत बढ़ाए जाने के बाद संगठन के पदाधिकारियों और उनके समर्थकों ने नाराजगी जताई है। संगठन का आरोप है कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने वाले लोगों की आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है।वहीं, पुलिस का पक्ष है कि संबंधित नेताओं ने सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए जारी निर्देशों का उल्लंघन किया था। अधिकारियों ने आशंका जताई कि उनकी रिहाई से कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।दूसरी ओर, बचाव पक्ष के वकीलों ने हिरासत के आधार पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता को सीमित करने के लिए स्पष्ट और ठोस कानूनी कारण होने चाहिए। सीजेपी ने हिरासत बढ़ाने के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देने की बात भी कही है।
लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों को लेकर बहस तेज
संजय राउत का बयान ऐसे समय में आया है, जब देश में विरोध प्रदर्शन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों पर प्रशासनिक दबाव बनाया जा रहा है। हालांकि, पुलिस प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा रही है।इस पूरे विवाद में न्यायपालिका की भूमिका भी चर्चा का विषय बन गई है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अधिकार प्राप्त है, लेकिन यह अधिकार सार्वजनिक सुरक्षा और कानून के तहत निर्धारित सीमाओं के अधीन है।
अब 21 अक्टूबर की सुनवाई पर नजर
सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत बढ़ाए जाने के बाद अब सभी की नजरें आगामी सुनवाई पर टिकी हैं। इस दौरान अदालत के सामने हिरासत की आवश्यकता और बचाव पक्ष की दलीलों पर विचार किए जाने की उम्मीद है।संजय राउत ने अपने बयान के माध्यम से केंद्र सरकार को चेतावनी देने के साथ ही सुप्रीम कोर्ट से लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। फिलहाल, सीजेपी नेताओं की हिरासत का मामला राजनीतिक और कानूनी चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।
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