दिल्ली-एनसीआर

पुराने कपड़ों से बन रहे गलीचे-बैग

Kiran
14 Sept 2026 9:01 AM IST
पुराने कपड़ों से बन रहे गलीचे-बैग
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Delhi दिल्ली मेट्रो स्टेशनों पर बने 10 'अर्पण केंद्रों' से 41 टन से ज़्यादा पुराने कपड़े इकट्ठा किए गए हैं। इन बेकार कपड़ों को दोबारा इस्तेमाल (रीयूज़), अपसाइकल और रीसायकल करके गलीचे, बैग, पाउच और फ़ोल्डर जैसे सामान बनाए जा रहे हैं। 31 अगस्त तक के आंकड़ों के मुताबिक, 3,940 लोगों ने इन केंद्रों पर कुल 41,181.59 किलोग्राम कपड़े जमा किए। सबसे ज़्यादा कपड़े डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर अस्पताल मेट्रो स्टेशन पर जमा हुए (9,861.40 किलोग्राम), इसके बाद शालीमार बाग का नंबर रहा (9,761.03 किलोग्राम)।
पंजाबी बाग वेस्ट में 6,534.98 किलोग्राम, शाहदरा में 6,386.08 किलोग्राम, मयूर विहार-1 में 5,189.40 किलोग्राम, हौज खास में 1,680.70 किलोग्राम, द्वारका-काकरोला में 689.40 किलोग्राम, मालवीय नगर में 467.40 किलोग्राम, लाजपत नगर में 395.70 किलोग्राम और मोहन एस्टेट में 215.50 किलोग्राम कपड़े जमा किए गए। इनमें से पांच केंद्र 3 अगस्त को शुरू किए गए थे, जबकि बाकी केंद्र 12 और 17 अगस्त को चालू हुए। यह पहल दिल्ली के लोगों को अपने बेकार कपड़ों को लैंडफिल (कचरा डंपिंग साइट) में भेजने के बजाय ज़िम्मेदारी से निपटाने का एक ज़रिया देती है।
इकट्ठा किए गए सामान में से लगभग 4,266 किलोग्राम कपड़े दोबारा इस्तेमाल और अपसाइकलिंग के लिए रखे गए हैं, जबकि 29,424 किलोग्राम कपड़े रीसाइक्लिंग के लिए भेजे गए हैं। स्वयं-सहायता समूह (सेल्फ़-हेल्प ग्रुप) इस सामान से गलीचे, फ़ोल्डर, की-रिंग, पाउच, बैग और तोरण जैसी उपयोगी चीज़ें बना रहे हैं, जिन्हें इन केंद्रों पर प्रदर्शित भी किया जा रहा है। इस पहल से इकट्ठा किए गए कपड़ों से बने उत्पादों की बिक्री से 27,036 रुपये की कमाई भी हुई है। इससे एक ऐसा सिस्टम बना है जिसमें बेकार कपड़ों को एक नई ज़िंदगी मिल रही है। इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए, जनवरी 2027 में मॉडल टाउन, INA, IP एक्सटेंशन, पश्चिम विहार वेस्ट, राजेंद्र प्लेस, जनकपुरी वेस्ट, राजौरी गार्डन, ग्रेटर कैलाश, द्वारका सेक्टर 10 और छतरपुर मेट्रो स्टेशनों पर 10 और 'अर्पण केंद्र' खोलने का प्रस्ताव है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह पहल पुराने कपड़ों को ठिकाने लगाने का एक व्यावहारिक समाधान देती है और साथ ही यह भी सुनिश्चित करती है कि उनका दोबारा इस्तेमाल और रीसाइक्लिंग करके ज़्यादा से ज़्यादा उपयोग हो सके। उन्होंने कहा, "दिल्ली के लोगों की भागीदारी इस सिस्टम को और आगे बढ़ाने में मदद कर सकती है। हमारी कोशिश है कि लोग आसानी से और सुविधा के साथ पुराने कपड़े दान कर सकें और उनका ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल हो सके, जिससे दिल्ली को और साफ़, सुंदर और हरा-भरा बनाने की कोशिशें और मज़बूत हों।"
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