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आंदोलन का श्रेय लेने की होड़ कांग्रेस और CJP के बीच बढ़ा विवाद

Ratna Netam
5 Sept 2026 8:10 PM IST
आंदोलन का श्रेय लेने की होड़ कांग्रेस और CJP के बीच बढ़ा विवाद
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नई दिल्ली। देश की विपक्षी राजनीति में अब युवाओं के मुद्दों को लेकर एक नई खींचतान देखने को मिल रही है। कांग्रेस और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) समर्थकों के बीच इन दिनों **क्रेडिट लेने की होड़** तेज हो गई है। छात्र आंदोलनों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर किसने सबसे पहले आवाज उठाई और किसके प्रयासों से बदलाव आया, इसे लेकर सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों के समर्थक आमने-सामने हैं।
यह विवाद खास तौर पर उस समय बढ़ा जब छात्र कार्यकर्ता निशु आजाद और उनके पिता संजय कुमार से जुड़े मामले में कार्रवाई को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कांग्रेस समर्थकों ने इस मुद्दे पर राहुल गांधी की सक्रियता को प्रमुखता दी, वहीं CJP समर्थकों ने दावा किया कि जमीन पर संघर्ष और आंदोलन को आगे बढ़ाने में उनके कार्यकर्ताओं की अहम भूमिका रही।
युवाओं के मुद्दों पर बढ़ी राजनीतिक सक्रियता
पिछले कुछ समय से बेरोजगारी, परीक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और छात्रों से जुड़े मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं।
युवा वर्ग को अपने साथ जोड़ने के लिए राजनीतिक दल लगातार नए अभियान और आंदोलन चला रहे हैं। सोशल मीडिया के दौर में छात्र आंदोलनों का प्रभाव तेजी से बढ़ा है और यही वजह है कि राजनीतिक दल युवाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
कांग्रेस लंबे समय से युवाओं के मुद्दों को उठाने का दावा करती रही है। वहीं CJP जैसे नए डिजिटल-आधारित समूह युवाओं के बीच अलग तरह की पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद बढ़ा विवाद
क्रेडिट वॉर की शुरुआत उन दावों से हुई, जिनमें अलग-अलग पक्षों ने छात्र आंदोलनों और न्याय की लड़ाई में अपनी भूमिका को प्रमुख बताया।
CJP समर्थकों का कहना है कि कई मौकों पर उनके कार्यकर्ता सीधे सड़क पर उतरकर छात्रों और पीड़ित परिवारों के साथ खड़े रहे। वहीं कांग्रेस समर्थकों का तर्क है कि बड़े राजनीतिक मंच और राष्ट्रीय स्तर पर मुद्दों को उठाने का काम विपक्षी दलों ने किया।
इस पूरी बहस ने विपक्ष के भीतर नेतृत्व और युवाओं के मुद्दों पर पकड़ को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।
CJP ने कहा क्रेडिट की राजनीति से बचें
CJP प्रवक्ता सौरव दास ने इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि न्याय के मुद्दे को श्रेय लेने की लड़ाई में नहीं बदलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि निशु आजाद और उनके पिता की मदद करने वाले हर व्यक्ति को बराबर श्रेय मिलना चाहिए। उनके अनुसार मुख्य मुद्दा न्याय और कार्रवाई है, न कि यह तय करना कि किसे कितना राजनीतिक लाभ मिलेगा।
CJP की ओर से यह संदेश देने की कोशिश की गई कि आंदोलन किसी एक संगठन या व्यक्ति की संपत्ति नहीं है।
कांग्रेस की नजर युवा वोट बैंक पर
कांग्रेस के लिए युवा मतदाता हमेशा से महत्वपूर्ण रहे हैं। पार्टी लगातार छात्रों, बेरोजगार युवाओं और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को उठाने की कोशिश कर रही है।
राहुल गांधी भी कई मौकों पर युवाओं के साथ संवाद और उनके मुद्दों को राजनीतिक एजेंडे में शामिल करने की बात करते रहे हैं। कांग्रेस की रणनीति युवाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की दिखाई देती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले चुनावों में युवा मतदाता बड़ी भूमिका निभा सकते हैं, इसलिए सभी दल इस वर्ग तक पहुंच बनाने में जुटे हैं।
नए डिजिटल आंदोलनों की चुनौती
CJP जैसे समूहों ने दिखाया है कि सोशल मीडिया के जरिए बिना पारंपरिक राजनीतिक ढांचे के भी बड़ी संख्या में युवाओं को जोड़ा जा सकता है।
ऐसे डिजिटल आंदोलन युवाओं की नाराजगी और मुद्दों को तेजी से सामने ला सकते हैं। यही वजह है कि पारंपरिक राजनीतिक दलों के सामने अब नई चुनौती खड़ी हो गई है।
राजनीतिक दलों को अब केवल रैलियों और भाषणों के जरिए नहीं बल्कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी अपनी मौजूदगी मजबूत करनी पड़ रही है।
क्या विपक्ष में नई खींचतान बढ़ेगी?
कांग्रेस और CJP के बीच बढ़ती बयानबाजी से यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या विपक्षी खेमे में युवा मुद्दों को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
जहां कांग्रेस खुद को राष्ट्रीय स्तर का राजनीतिक विकल्प बताती है, वहीं नए संगठन युवाओं की नाराजगी को सीधे मुद्दों के रूप में उठाने का दावा कर रहे हैं।
यह मुकाबला सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की राजनीति में युवा समर्थन हासिल करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
युवाओं को साधने की बड़ी कोशिश
भारत में युवा आबादी चुनावी राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। रोजगार, शिक्षा, परीक्षा और अवसरों से जुड़े मुद्दे युवाओं के लिए सबसे अहम हैं।
इसी वजह से राजनीतिक दल और नए संगठन युवाओं की समस्याओं को अपनी राजनीति का केंद्र बना रहे हैं।
क्रेडिट वॉर भले ही सोशल मीडिया पर दिखाई दे रहा हो, लेकिन इसके पीछे युवाओं के समर्थन को लेकर बड़ी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा छिपी हुई है।
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