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नई दिल्ली। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मंगलवार को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह आम आदमी पार्टी (AAP) से जुड़े हुए हैं और छात्र आंदोलन के बीच खुद को छात्र नेता के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रहे हैं।
रिजिजू ने कहा कि सरकार छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से लेती है, लेकिन किसी भी छात्र आंदोलन को राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी इस आंदोलन को अपने राजनीतिक हितों के लिए दिशा देने की कोशिश कर रही है।
न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत के दौरान किरेन रिजिजू ने कहा कि छात्रों की समस्याएं और उनकी मांगें महत्वपूर्ण हैं। सरकार उनकी बात सुनने और समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, उन्होंने कहा कि छात्र मुद्दों को राजनीतिक अवसरवाद से जोड़ना उचित नहीं है।
रिजिजू ने कहा कि लोकतंत्र में छात्रों और युवाओं को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन किसी आंदोलन को किसी राजनीतिक दल के एजेंडे के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग छात्र हितों के नाम पर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने अभिजीत दीपके का नाम लेते हुए कहा कि वह महाराष्ट्र से हैं और आम आदमी पार्टी से जुड़े हुए हैं। रिजिजू ने सवाल उठाया कि अगर कोई व्यक्ति किसी राजनीतिक दल का कार्यकर्ता है तो वह अचानक छात्र नेता के रूप में कैसे सामने आ सकता है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार युवाओं की आवाज को दबाने में विश्वास नहीं रखती। उन्होंने कहा कि जो भी वास्तविक छात्र समस्याएं हैं, उन पर चर्चा होनी चाहिए और समाधान निकाला जाना चाहिए। लेकिन आंदोलन के नाम पर राजनीतिक गतिविधियां चलाना सही नहीं है।
यह बयान उस समय आया है जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन हुए हैं। इन प्रदर्शनों के दौरान कई संगठनों और नेताओं ने सरकार के खिलाफ अपनी बातें रखी थीं। इसी बीच CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके की भूमिका को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया।
रिजिजू के आरोपों के बाद अब आम आदमी पार्टी और प्रदर्शन से जुड़े लोगों की प्रतिक्रिया का इंतजार है। इससे पहले भी केंद्र सरकार और विपक्षी दलों के बीच छात्र आंदोलनों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि छात्र आंदोलन अक्सर व्यापक सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों से जुड़े होते हैं। ऐसे आंदोलनों में विभिन्न राजनीतिक दलों की भागीदारी को लेकर बहस होना आम बात है। जहां सरकारें विपक्ष पर आंदोलन को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाती हैं, वहीं विपक्ष सरकार पर छात्रों की समस्याओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाता है।
किरेन रिजिजू ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार छात्रों की चिंताओं को लेकर संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि युवा देश का भविष्य हैं और उनकी समस्याओं का समाधान करना सरकार की जिम्मेदारी है। लेकिन उन्होंने दोहराया कि छात्र मुद्दों को राजनीतिक स्वार्थ से अलग रखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसी भी आंदोलन की विश्वसनीयता तभी बनी रहती है, जब उसमें वास्तविक मुद्दों और लोगों की भागीदारी हो। अगर कोई राजनीतिक संगठन अपने हितों के लिए किसी आंदोलन का इस्तेमाल करता है तो इससे आंदोलन की मूल भावना प्रभावित हो सकती है।
वहीं, CJP और अभिजीत दीपके को लेकर रिजिजू के आरोपों ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आम आदमी पार्टी और प्रदर्शन से जुड़े लोग इन आरोपों का किस तरह जवाब देते हैं।
फिलहाल छात्र आंदोलन, राजनीतिक भागीदारी और सरकार-विपक्ष के आरोपों के बीच यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बना हुआ है। सरकार जहां इसे राजनीतिक हस्तक्षेप से बचाने की बात कर रही है, वहीं प्रदर्शनकारी अपने मुद्दों को लेकर आवाज उठाने पर जोर दे रहे हैं।





