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AAP और CJP के रिश्तों में दिखी दूरी

Kavita2
6 Oct 2026 9:34 AM IST
AAP और CJP के रिश्तों में दिखी दूरी
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नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के रिश्तों को लेकर लंबे समय से राजनीतिक चर्चाएं होती रही हैं। इसकी बड़ी वजह सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके और उसके कुछ प्रमुख नेताओं का पहले आम आदमी पार्टी से जुड़ा रहना है। खुद अरविंद केजरीवाल भी सार्वजनिक रूप से स्वीकार कर चुके हैं कि अभिजीत दीपके और आशुतोष रांका जैसे नेता किसी समय AAP से जुड़े रहे थे। इसके बावजूद हाल के दिनों में दोनों संगठनों के बीच कुछ अहम मुद्दों पर स्पष्ट सहमति दिखाई नहीं दे रही है।

सबसे बड़ा फर्क चुनाव और विपक्ष की रणनीति को लेकर दिखाई दे रहा है। अभिजीत दीपके ने हाल में विपक्षी दलों से सवाल किया था कि यदि उन्हें चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी का भरोसा है तो वे ऐसे चुनावों में हिस्सा क्यों ले रहे हैं। उन्होंने विपक्षी दलों के सामने चुनाव के बहिष्कार का मुद्दा उठाया। लेकिन इस मांग पर आम आदमी पार्टी की ओर से अब तक कोई स्पष्ट समर्थन सामने नहीं आया है।

दूसरी ओर अरविंद केजरीवाल ने भी सीजेपी से अपनी एक अपेक्षा सार्वजनिक रूप से रखी है। रिपोर्टों के मुताबिक केजरीवाल चाहते हैं कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चलाए जा रहे सीजेपी के आंदोलन का राजनीतिक निशाना केवल चुनाव आयोग तक सीमित न रहे, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की जवाबदेही के सवाल को भी इसमें प्रमुखता से जोड़ा जाए। केजरीवाल की ओर से यह अपील एक से अधिक बार किए जाने की बात सामने आई है, लेकिन सीजेपी नेतृत्व ने इस पर खुलकर कोई जवाब नहीं दिया है।

सीजेपी इन दिनों मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन चला रही है। मुंबई के शिवाजी पार्क समेत कई स्थानों पर संगठन ने प्रदर्शन किए हैं। अभिजीत दीपके ने मतदाता सूची संशोधन और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठाते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनावी व्यवस्था में अधिक पारदर्शिता की मांग की है।

2 अक्टूबर को मुंबई में सीजेपी के नेतृत्व में प्रदर्शन हुआ, जबकि दिल्ली में भी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए। दिल्ली के प्रदर्शन में आम आदमी पार्टी के नेता भी शामिल हुए और पार्टी नेता सौरभ भारद्वाज समेत कई लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया। इससे यह साफ है कि चुनाव आयोग और मतदाता सूची से जुड़े कुछ मुद्दों पर AAP और CJP की चिंताएं समान हैं, लेकिन आंदोलन की दिशा और राजनीतिक रणनीति को लेकर दोनों की प्राथमिकताएं पूरी तरह एक जैसी नहीं दिखाई दे रही हैं।

AAP और CJP के रिश्तों की चर्चा कोई नई नहीं है। सीजेपी के उभरने के शुरुआती दिनों से ही इसके नेतृत्व के पुराने राजनीतिक संबंध सवालों के घेरे में रहे हैं। अरविंद केजरीवाल ने अगस्त में एक बातचीत में कहा था कि उनकी पार्टी एक तरह की “ट्रेनिंग अकैडमी” रही है, जहां से कई लोग राजनीति सीखकर आगे बढ़े हैं। उन्होंने यह स्वीकार किया था कि अभिजीत दीपके और आशुतोष रांका किसी समय आम आदमी पार्टी से जुड़े थे। हालांकि उन्होंने सीजेपी को सीधे AAP का संगठन बताने वाली धारणा से दूरी भी बनाई थी।

इससे पहले जून में जब सीजेपी ने युवाओं, शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा संबंधी मुद्दों पर आंदोलन किया था, तब अरविंद केजरीवाल ने खुलकर आंदोलन की मांगों का समर्थन किया था। उन्होंने कहा था कि युवाओं के गुस्से और निराशा को समझने की जरूरत है और सरकार को उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए। उस समय AAP और CJP एक-दूसरे के काफी करीब दिखाई दिए थे।

अब स्थिति कुछ अलग नजर आ रही है। अभिजीत दीपके जहां विपक्षी दलों से चुनाव बहिष्कार जैसे बड़े कदम पर स्पष्ट रुख चाहते हैं, वहीं AAP इस पर सार्वजनिक रूप से आगे नहीं बढ़ी है। इसके उलट केजरीवाल चाहते हैं कि सीजेपी अपने चुनाव आयोग विरोधी आंदोलन में केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री की राजनीतिक जवाबदेही को अधिक स्पष्ट तरीके से शामिल करे। इस मांग को भी सीजेपी ने फिलहाल स्वीकार या खारिज नहीं किया है।

राजनीतिक रूप से देखा जाए तो दोनों संगठनों की स्थिति भी अलग है। आम आदमी पार्टी एक स्थापित राजनीतिक दल है और दिल्ली, पंजाब तथा दूसरे राज्यों में चुनाव लड़ती रही है। उसके लिए चुनाव के बहिष्कार जैसे फैसले का असर उसकी पूरी राजनीतिक रणनीति पर पड़ेगा। दूसरी तरफ सीजेपी खुद को युवा आंदोलन और व्यवस्था परिवर्तन से जुड़े मुद्दों के मंच के रूप में पेश करती रही है। इसी वजह से दोनों संगठनों के तरीके और प्राथमिकताएं अलग होना स्वाभाविक माना जा सकता है।

सीजेपी ने 10 अक्टूबर से व्यापक आंदोलन की भी घोषणा की है। अभिजीत दीपके और संगठन के अन्य नेताओं ने सरकार पर आंदोलनकारियों को दबाने का आरोप लगाया है और देशभर से लोगों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की है।

फिलहाल AAP और CJP के बीच किसी औपचारिक राजनीतिक गठबंधन की पुष्टि नहीं है। दोनों के नेताओं के पुराने संबंध और कई मुद्दों पर समान रुख जरूर हैं, लेकिन ताजा घटनाक्रम से यह भी साफ हो रहा है कि दोनों संगठन हर राजनीतिक सवाल पर एकमत नहीं हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि क्या AAP अभिजीत दीपके की चुनाव बहिष्कार वाली मांग पर कोई स्पष्ट रुख अपनाती है और क्या सीजेपी अरविंद केजरीवाल की अपील के मुताबिक अपने आंदोलन की दिशा में कोई बदलाव करती है।

आने वाले दिनों में सीजेपी के प्रस्तावित प्रदर्शनों और AAP के बयानों से दोनों संगठनों के राजनीतिक रिश्तों की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल स्थिति यही है कि कुछ मुद्दों पर साथ दिखने वाले दोनों संगठन एक-दूसरे से अलग-अलग सवालों पर जवाब का इंतजार कर रहे हैं।

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