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रक्षाबंधन के बाद लौटा था दिल्ली, सत्य निकेतन हादसे में गई जान

Kavita2
8 Sept 2026 9:35 AM IST
रक्षाबंधन के बाद लौटा था दिल्ली, सत्य निकेतन हादसे में गई जान
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नई दिल्ली/देवास। दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक इमारत हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। किसी ने अपना इकलौता बेटा खो दिया तो किसी के भविष्य के सपने एक पल में मलबे में दब गए। हादसे में जान गंवाने वालों में मध्य प्रदेश के देवास का रहने वाला 19 वर्षीय अर्पित भी शामिल था। रक्षाबंधन के बाद वह रविवार सुबह ही दिल्ली लौटा था और कुछ ही घंटों बाद उसकी मौत की खबर ने पूरे परिवार को झकझोर दिया।

अर्पित ने दिल्ली पहुंचने के बाद अपने माता-पिता को फोन कर सकुशल पहुंचने की जानकारी दी थी। परिवार को लगा था कि उनका बेटा सुरक्षित है और जल्द ही अपने काम व पढ़ाई में जुट जाएगा, लेकिन शाम होते-होते एक फोन कॉल ने परिवार की जिंदगी बदल दी।

सुबह माता-पिता को दी थी पहुंचने की जानकारी

जानकारी के मुताबिक, देवास निवासी अर्पित रक्षाबंधन का त्योहार मनाने के बाद दिल्ली वापस लौटा था। रविवार सुबह करीब 6 बजे वह दिल्ली पहुंचा था। दिल्ली पहुंचने के बाद उसने अपने माता-पिता को फोन कर बताया कि वह सुरक्षित पहुंच गया है।

इस बातचीत के बाद परिवार को बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि कुछ घंटों बाद उनके लिए इतनी दुखद खबर आने वाली है। माता-पिता अपने बेटे की कुशलता को लेकर निश्चिंत थे, लेकिन शाम को आई एक फोन कॉल ने सब कुछ बदल दिया।

दोस्तों के फोन से मिली मौत की खबर

अर्पित के परिवार के अनुसार, शाम के समय उसके दोस्तों ने उसकी मां को फोन कर हादसे की जानकारी दी। दोस्तों ने बताया कि सत्य निकेतन में हुए हादसे में अर्पित की मौत हो गई है।

यह सुनते ही परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। अचानक मिली इस खबर से परिजन बदहवास हो गए। बेटे को खोने के गम में परिवार का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

फ्लाइट से दिल्ली पहुंचे परिजन

अर्पित की मौत की जानकारी मिलने के बाद उसके परिजन तत्काल दिल्ली के लिए रवाना हुए। वे फ्लाइट से दिल्ली पहुंचे, जहां हादसे की भयावह स्थिति देखकर उनका दर्द और बढ़ गया।

परिवार के लिए सबसे मुश्किल पल वह था, जब उन्हें अपने बेटे को खोने की सच्चाई स्वीकार करनी पड़ी। जिस बेटे को सुबह सुरक्षित दिल्ली पहुंचने की खबर मिली थी, उसी की शाम को मौत की सूचना आ गई।

परिवार के सपने अधूरे रह गए

19 वर्षीय अर्पित परिवार की उम्मीदों का सहारा था। कम उम्र में ही उसने अपने भविष्य को लेकर कई सपने देखे थे। माता-पिता को उम्मीद थी कि उनका बेटा आगे बढ़कर परिवार का नाम रोशन करेगा, लेकिन एक हादसे ने उनकी सारी उम्मीदें छीन लीं।

सत्य निकेतन हादसे में मारे गए अन्य लोगों की तरह अर्पित का परिवार भी अब केवल यादों के सहारे रह गया है।

सत्य निकेतन हादसे में सात लोगों की मौत

रविवार को दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक पांच मंजिला इमारत अचानक गिर गई थी। हादसे में सात लोगों की मौत हो गई थी। घटना के बाद राहत और बचाव दलों ने मौके पर पहुंचकर मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकाला।

हादसे के बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। इमारत की स्थिति, सुरक्षा मानकों और पीजी संचालन से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है।

हादसे ने उठाए सुरक्षा पर सवाल

सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में पुरानी और जर्जर इमारतों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। बड़ी संख्या में छात्र और युवा दिल्ली में पीजी और किराए के मकानों में रहते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि समय-समय पर भवनों की जांच और सुरक्षा मानकों का पालन बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

एक फोन कॉल ने बदल दी परिवार की दुनिया

अर्पित के परिवार के लिए रविवार का दिन कभी न भूलने वाला दर्द बन गया। सुबह जिस बेटे की आवाज सुनकर माता-पिता खुश हुए थे, शाम को उसी बेटे की मौत की खबर ने उन्हें तोड़ दिया।

सत्य निकेतन हादसे ने कई परिवारों को ऐसा दर्द दिया है, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती। अब परिवार केवल न्याय और हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की उम्मीद कर रहा है।

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