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दिल्ली विश्वविद्यालय में आज से आरक्षित श्रेणी के छात्र अपग्रेड कर सकेंगे सीट

Admin Delhi 1
18 Nov 2022 6:01 AM GMT
दिल्ली विश्वविद्यालय में आज से आरक्षित श्रेणी के छात्र अपग्रेड कर सकेंगे सीट
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दिल्ली न्यूज़: दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के पोर्टल पर शुक्रवार से सीटों को अपग्रेड करने के लिए खिड़की खुलने जा रही है। अपग्रेड की सुविधा केवल ईसीए, स्पोर्ट्स, शहीदों के बच्चे, कश्मीरी विस्थापित और जीसस एंड मेरी कॉलेज व सेंट स्टीफंस कॉलेज में दाखिले के लिए आवेदन कर रहे ईसाई समुदाय के छात्रों को मिलेगी। डीयू के मुताबिक, बृहस्पतिवार शाम चार बजकर 59 मिनट तक तीसरे चरण के तहत दाखिले की फीस जमा करने की अंतिम तिथि थी। अब केवल उक्त श्रेणी के छात्र अगर दाखिले को लेकर सीटों में कोई अपडेट चाहते हैं, तो वे 18 नवंबर सुबह 10 बजे से 19 नवंबर शाम 4. 59 बजे तक अपग्रेड का विकल्प चुन सकते हैं। आरक्षित श्रेणी के लिए यह अंतिम अवसर है। इसके बाद सीटों को अपग्रेड करने का मौका नहीं दिया जाएगा। वहीं, सीटों को अपग्रेड करने के बाद छात्रों को विश्वविद्यालय द्वारा प्रदान की जाने वाली सीटों को स्वीकार करना होगा। डीयू के मुताबिक, अंतिम चरण में कुल 70 हजार सीटों में से करीब नौ हजार सीटों पर दाखिला प्रक्रिया चल रही है।

शिक्षकों को हफ्ते में 40 घंटे पढ़ाना होगा: दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में अब एक शिक्षक को सप्ताह में कम से कम 40 घंटे की कक्षा लेनी होगी। डीयू ने इस शैक्षणिक सत्र से प्राध्यापकों, सहायक प्राध्यापकों और सह प्राध्यापकों के पढ़ाने के घंटे निर्धारित कर दिए हैं। इसके तहत प्राध्यापकों और सह-प्राध्यापकों को 14 घंटे और सहायक प्राध्यापकों को 16 घंटे पढ़ाना होगा। इसमें हर सप्ताह दो घंटे प्रशासनिक कार्य के लिए निर्धारित हैं। वहीं, शिक्षक संगठनों ने इस नए फैसले का विरोध जताया है।

डीयू के मुताबिक, पीएचडी के विद्यार्थियों को मार्गदर्शन के लिए, परीक्षा कार्य व अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए एक सप्ताह में 24 से 26 घंटे तय किए गए हैं। इन घंटों में से स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए अनुसंधान के तहत हर दिन दो घंटे दिए जाएंगे, जिन्हें प्रशासनिक कार्यों के लिए निर्धारित घंटों में शामिल किया जाएगा। इस संबंध में डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट के पदाधिकारियों का कहना है कि कॉलेजों में काम को लेकर मानदंड लागू किए जा रहे हैं, लेकिन स्नातकोत्तर स्तर तक इनका विस्तार करने से सीखने की गुणवत्ता पर असर पड़ेगा। फोरम ऑफ एकेडेमिक्स फार सोशल जस्टिस के चेयरमैन डॉ. हंसराज सुमन के मुताबिक, डीयू का ये निर्देश शिक्षकों से बंधुआ मजदूरी कराने के समान है।

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