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संसदीय स्थायी समितियों का पुनर्गठन, TMC के हाथ से गई दो अहम समितियों की अध्यक्षता

Kavita2
4 Oct 2026 9:47 AM IST
संसदीय स्थायी समितियों का पुनर्गठन, TMC के हाथ से गई दो अहम समितियों की अध्यक्षता
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नई दिल्ली। संसद की विभाग-संबंधी स्थायी समितियों का वर्ष 2026-27 के लिए पुनर्गठन कर दिया गया है। शनिवार को राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विभिन्न समितियों के अध्यक्षों और सदस्यों को लेकर नई व्यवस्था को अंतिम रूप दिया। इस फेरबदल में कई समितियों के अध्यक्ष बदले गए हैं, जबकि कई प्रमुख नेताओं को उनके मौजूदा पदों पर बरकरार रखा गया है। सबसे ज्यादा चर्चा तृणमूल कांग्रेस (TMC) की हो रही है, जिसके हाथ से दो महत्वपूर्ण संसदीय समितियों की अध्यक्षता चली गई है।

पुनर्गठन के तहत भाजपा के राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी को वाणिज्य संबंधी संसदीय स्थायी समिति का नया अध्यक्ष बनाया गया है। इससे पहले इस समिति की अध्यक्षता तृणमूल कांग्रेस की डोला सेन के पास थी। इस बदलाव के साथ वाणिज्य समिति की कमान अब भाजपा के पास आ गई है।

वहीं रसायन एवं उर्वरक संबंधी संसदीय समिति की अध्यक्षता में भी बदलाव किया गया है। इस समिति की कमान पहले तृणमूल कांग्रेस से जुड़े कीर्ति आजाद के पास थी। अब काकोली घोष दस्तीदार को इसका अध्यक्ष बनाया गया है। हालिया राजनीतिक घटनाक्रम में उन्हें तृणमूल के बागी खेमे से जोड़ा गया है। इस तरह पुनर्गठन के बाद TMC के पास मौजूद दोनों प्रमुख अध्यक्ष पद चले गए हैं।

संसद की विभाग-संबंधी स्थायी समितियां अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों के कामकाज की समीक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ये समितियां मंत्रालयों की अनुदान मांगों, विधेयकों और संबंधित नीतिगत विषयों का अध्ययन करती हैं। इनमें लोकसभा और राज्यसभा दोनों के सदस्य शामिल होते हैं और इनका समय-समय पर पुनर्गठन किया जाता है।

इस बार के फेरबदल में कानून एवं न्याय समिति की कमान भी बदली गई है। भाजपा के सुजीत कुमार को कार्मिक, लोक शिकायत, कानून एवं न्याय समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। उन्होंने भाजपा के ही बृज लाल की जगह ली है। इसके अलावा श्रम और रेलवे से संबंधित समितियों में भी नए अध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं।

श्रम संबंधी संसदीय समिति का अध्यक्ष भाजपा सांसद शशांक मणि त्रिपाठी को बनाया गया है। उन्होंने बसवराज बोम्मई की जगह ली है। इसी तरह रेलवे संबंधी समिति की जिम्मेदारी भाजपा के सुधीर गुप्ता को दी गई है। इससे पहले इस समिति के अध्यक्ष सीएम रमेश थे।

हालांकि सभी समितियों में बदलाव नहीं किया गया है। विपक्ष के कई वरिष्ठ नेताओं को उनकी मौजूदा जिम्मेदारियों पर बरकरार रखा गया है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर विदेश मामलों की संसदीय समिति के अध्यक्ष बने रहेंगे। वहीं कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी को कृषि संबंधी समिति की जिम्मेदारी पर बरकरार रखा गया है।

कांग्रेस नेता मुकुल वासनिक भी शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल से संबंधित संसदीय समिति का नेतृत्व जारी रखेंगे। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण समिति की अध्यक्षता पर बरकरार रखा गया है। इससे साफ है कि पुनर्गठन में सत्ता पक्ष के साथ विपक्ष के नेताओं को भी विभिन्न महत्वपूर्ण समितियों में नेतृत्व की जिम्मेदारी मिली हुई है।

डीएमके को भी दो महत्वपूर्ण समितियों की अध्यक्षता बरकरार रखने का मौका मिला है। डीएमके सांसद तिरुचि शिवा उद्योग संबंधी समिति के अध्यक्ष बने रहेंगे, जबकि सांसद कनिमोझी खाद्य, उपभोक्ता मामले और सार्वजनिक वितरण संबंधी संसदीय समिति की अध्यक्षता जारी रखेंगी।

सत्तारूढ़ गठबंधन के सहयोगी दलों के नेताओं को भी कई समितियों में उनकी जिम्मेदारियों पर कायम रखा गया है। जेडीयू के संजय कुमार झा परिवहन, पर्यटन और संस्कृति समिति के अध्यक्ष बने रहेंगे। शिवसेना के श्रीरंग बारणे को ऊर्जा संबंधी समिति के प्रमुख के रूप में बरकरार रखा गया है।

इसके अलावा भाजपा के कई वरिष्ठ सांसदों को महत्वपूर्ण समितियों की जिम्मेदारी दी गई है। राधा मोहन सिंह रक्षा संबंधी समिति का नेतृत्व करेंगे। पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर को कोयला, खान और इस्पात संबंधी समिति की जिम्मेदारी पर बरकरार रखा गया है। राजीव प्रताप रूडी जल संसाधन संबंधी समिति की अध्यक्षता जारी रखेंगे।

भाजपा सांसद भर्तृहरि महताब वित्त संबंधी समिति के अध्यक्ष बने रहेंगे। राधा मोहन दास अग्रवाल को गृह मामलों की समिति की जिम्मेदारी पर बरकरार रखा गया है। निशिकांत दुबे संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी समिति की अध्यक्षता जारी रखेंगे।

संसदीय समितियों की भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि संसद में विधेयकों और नीतियों पर होने वाली व्यापक चर्चा के अलावा ये समितियां संबंधित मंत्रालयों के कामकाज का विस्तृत अध्ययन करती हैं। समिति की बैठकों में विभिन्न मुद्दों पर अधिकारियों से जानकारी ली जाती है और आवश्यकता के अनुसार रिपोर्ट तैयार कर संसद के सामने रखी जाती है।

इस पुनर्गठन का सबसे उल्लेखनीय राजनीतिक पहलू तृणमूल कांग्रेस से दो समितियों की अध्यक्षता का जाना है। वाणिज्य समिति में डोला सेन की जगह सुधांशु त्रिवेदी और रसायन एवं उर्वरक समिति में कीर्ति आजाद की जगह काकोली घोष दस्तीदार को जिम्मेदारी मिलने से TMC की संसदीय समिति नेतृत्व में स्थिति बदली है।

वहीं कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और डीएमके जैसे विपक्षी दलों के कई नेताओं को महत्वपूर्ण समितियों में बरकरार रखा गया है। सत्तारूढ़ गठबंधन के सहयोगी दलों को भी अध्यक्ष पद मिले हुए हैं। इस तरह वर्ष 2026-27 के लिए पुनर्गठित संसदीय समितियों में कुछ महत्वपूर्ण बदलावों के साथ कई पुराने अध्यक्षों को निरंतरता दी गई है।

अब नई संरचना के तहत ये विभाग-संबंधी स्थायी समितियां संबंधित मंत्रालयों के कामकाज, नीतियों, विधेयकों और बजटीय मांगों पर अपनी संसदीय जिम्मेदारियां निभाएंगी। फिलहाल इस पूरे फेरबदल में TMC की दो महत्वपूर्ण समितियों की अध्यक्षता जाना सबसे प्रमुख बदलाव के रूप में सामने आया है।

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